• Latest
  • Trending
Bombay High Court

जेल में बंद महिला, बच्चे को जन्म देने के लिए कोर्ट ने दी 6 महीने की बेल

December 20, 2024
नार्को-सिंडिकेट पर महाप्रहार

नार्को-सिंडिकेट पर महाप्रहार

October 31, 2026
नशे पर सर्जिकल स्ट्राइक

नशे पर सर्जिकल स्ट्राइक

October 31, 2026
युवाओं के आइडिया और उत्पादों को पंख देने की तैयारी

युवाओं के आइडिया और उत्पादों को पंख देने की तैयारी

October 31, 2026
केविन पीटरसन ने बताया, कैसे बदल रहा है भारत

नया भारत, जिसे दुनिया देख रही है

October 31, 2026
यूपी सरकार 1,000 एकड़ में डेटा सेंटर और आईटी हब करेगी विकसित

यूपी सरकार 1,000 एकड़ में डेटा सेंटर और आईटी हब करेगी विकसित

October 31, 2026
यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली के 70 घाटों पर उतरे हजारों लोग

यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली के 70 घाटों पर उतरे हजारों लोग

October 31, 2026
फिर बदला भदोही का नाम

फिर बदला भदोही का नाम

October 31, 2026
'मोदी-आबे की दोस्ती पद से नहीं, विश्वास से बनी थी'

‘मोदी-आबे की दोस्ती पद से नहीं, विश्वास से बनी थी’

October 31, 2026
गुजरात लगातार पांचवीं बार स्टार्टअप के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य बना

गुजरात लगातार पांचवीं बार स्टार्टअप के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य बना

October 31, 2026
बेलापुर में भूमि के दाम आसमान पर

बेलापुर में भूमि के दाम आसमान पर

October 31, 2026
हवा सुधारने को बीएमसी का 'डीप क्लीन प्लान'

हवा सुधारने को बीएमसी का ‘डीप क्लीन प्लान’

October 31, 2026
बंगाल में चुनाव से पहले हुआ खेला लाखों फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट हुए थे जारी

पश्चिम बंगाल के स्कूलों में मोबाइल पर लगेगा बैन

October 31, 2026
Sunday, November 1, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

जेल में बंद महिला, बच्चे को जन्म देने के लिए कोर्ट ने दी 6 महीने की बेल

- मानवीय दृष्टिकोण के तहत कोर्ट ने दिया फैसला

by ब्लिट्ज़ इंडिया
December 20, 2024
in the blitz
0
Bombay High Court

YOU MAY ALSO LIKE

नार्को-सिंडिकेट पर महाप्रहार

नया भारत, जिसे दुनिया देख रही है

ब्लिट्ज ब्यूरो

नागपुर। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने जेल में बंद एक आरोपी गर्भवती महिला को 6 महीने की जमानत दी है। नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट में जेल में बंद इस महिला को मानवीय दृष्टिकोण के तहत जमानत मिली है। उसने अपनी डिलीवरी और शुरुआती देखभाल अवधि के लिए जमानत मांगी थी। कोर्ट ने उसे सशर्त जमानत दी, ताकि वह ठीक होने के बाद वापस हिरासत में आ सके।
जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के की सिंगल-जज बेंच ने यह फैसला दिया। बेंच ने कैदियों के लिए सम्मान और मानवीय विचारों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जेल की चारदीवारी में बच्चे को जन्म देने से मां और बच्चे दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
नागपुर बेंच की जस्टिस ने क्या कहा
कोर्ट ने कहा, ‘यह सच है कि सरकारी अस्पताल आवश्यक देखभाल प्रदान कर सकते हैं। प्रसव के दौरान जेल में माहौल मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर स्थायी मनोवैज्ञानिक और शारीरिक प्रभाव डाल सकता है।’ जस्टिस जोशी-फाल्के ने इस बात पर जोर दिया कि जेल में बच्चे को जन्म देने से उन्हें वह सम्मान और देखभाल नहीं मिल पाती, जिसकी वे हकदार हैं। जज ने कहा कि महिला को जेल के बाहर प्रसव की अनुमति देना संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप है।
दो महीने की गर्भवती थी, तब हुई थी गिरफ्तार
गोंदिया की रहने वाली महिला को उसके पति के साथ नार्कोटिक्स अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। उसे रेलवे पुलिस बल ने इस साल 30 अप्रैल को प्रतिबंधित सामान ले जाते हुए पकड़ा था। महिला जब पकड़ी गई थी, उस समय वह दो महीने की गर्भवती थी।
महिला ने याचिका में क्या कहा
महिला ने तर्क दिया कि प्रसव के समय उसे संभावित जटिलताओं के लक्षण दिख रहे थे और इसलिए मानवीय आधार पर, उसे अस्थायी जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए। उसने आगे कहा कि वह जेल में है, जो आपातकालीन चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के लिए तैयार नहीं है। उसने प्रसव और प्रारंभिक देखभाल अवधि के लिए जमानत मांगी।
हाई कोर्ट ने कही यह बात
न्यायमूर्ति जोशी-फाल्के ने कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया महिला की मांग सही है। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के आलोक में, कुछ कारकों पर विचार करने की आवश्यकता है। याचिकाकर्ता की रिहाई उच्च सुरक्षा जोखिम पैदा नहीं करती है। नार्कोटिक्स अधिनियम की धारा 37 के तहत कठोरता होने के बावजूद जांच में कोई पूर्वाग्रह पैदा नहीं हुई। परिस्थितियों को देखते हुए, उसे अस्थायी जमानत पर रिहा करने के आवेदन पर मानवीय आधार पर विचार किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के ने 50,000 रुपये के निजी मुचलके और एक या अधिक जमानतदारों को पेश करने पर उसे रिहा करने का निर्देश दिया। अदालत ने दो सप्ताह की नकद सुरक्षा विकल्प की भी अनुमति दी। महिला को सबूतों से छेड़छाड़ करने या गवाहों को डराने-धमकाने से प्रतिबंधित किया गया है। उसे जांच अधिकारियों को एक फ़ोन नंबर और पता देने और अपनी जमानत अवधि के दौरान इसी तरह के अपराधों से बचने के लिए कहा गया।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation