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अमेरिका-रूस-चीन की दादागीरी के दिन खत्म

भारत की सह-अध्यक्षता में पी4एम इनिशिएटिव की शुरुआत

by ब्लिट्ज़ इंडिया
October 5, 2026
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अमेरिका-रूस-चीन की दादागीरी के दिन खत्म

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के ठीक पहले भारत की सह-अध्यक्षता में बहुपक्षवाद पर शिखर सम्मेलन यानी पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म (पी4एम इनिशिएटिव) की शुरुआत हुई है। इस इनिशिएटिव में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा, यूरोपीय संघ और केन्या हैं। यह पहल ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक व्यवस्था दबाव में है। इसका मकसद दुनिया में एकध्रुवीय व्यवस्था बनने से रोकना है। जैसे- अमेरिका टैरिफ के जरिए दादागीरी कर रहा है। दुनिया रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान युद्ध से जूझ रही है और चीन लगातार पड़ोसी देशों के खिलाफ आक्रामकता दिखा रहा है।

भारत ने की सह-अध्यक्षता
इस मौके पर भारत ने जोर दिया कि अधिक भागीदारी वाली विचार-विमर्श की प्रक्रिया तथा पारदर्शी निर्णय लेने की व्यवस्था अब बेहद जरूरी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय 81वें सत्र के इतर आयोजित पहले ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी’ (बहुपक्षवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति और समृद्धि के लिए साझेदार) यानी पी4एम शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की।

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संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित सम्मेलन में जयशंकर ने कहा, भारत को सह-प्रायोजक के रूप में शामिल होकर खुशी है। हम ऐसे समय में मुलाकात कर रहे हैं जब वैश्विक व्यवस्था दबाव में है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में दुनिया ने शक्ति संतुलन में लगातार बदलाव देखा है, जो लंबे समय से अपेक्षित संरचनात्मक परिवर्तन था। जयशंकर ने कहा, हालांकि, तीव्र प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और वास्तविक संघर्षों ने इसे पूरी तरह अलग स्वरूप दे दिया है। यदि इसे अनियंत्रित छोड़ दिया गया, तो यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मूल भावना पर सवाल खड़ा कर सकता है। इसलिए इस समय बहुपक्षवाद का मजबूती से सामने आना बेहद जरूरी है।

भारत ने समुद्री व्यापार में पैदा हुए गतिरोध का किया जिक्र
उन्होंने कहा कि जारी संघर्षों के मामले में व्यापक शांति के लिए प्रयास करते हुए भी कुछ विशिष्ट पहलुओं पर ध्यान दिया जा सकता है। जयशंकर ने कहा, ईंन्धन, खाद्य, उर्वरक और वित्त की ‘4एफ’ समस्या को अपने हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता। जब नई क्षमताएं और चिंताएं सामने आती हैं, तो उनके लिए रूपरेखा और सुरक्षा उपाय तय करने का मजबूत आधार होता है। जहां किसी महत्वपूर्ण मार्ग पर प्रभुत्व और आपूर्ति में बाधा का खतरा हो, वहां जोखिम कम करने और स्रोतों में विविधता लाने को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, और जहां कोई ठोस कारण या मजबूत आधार हो, वहां समान सोच रखने वाले देशों को एक साथ आने का भरोसा होना चाहिए।

शिखर सम्मेलन में कौन-कौन शामिल हुआ
जयशंकर के साथ सम्मेलन के सह-प्रायोजक यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा, केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया मोटली भी शामिल हुए। ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो वीएरा और कनाडा के स्थायी प्रतिनिधि डेविड लैमेटी ने भी हिस्सा लिया। लैमेटी ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की ओर से वक्तव्य पढ़ा। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून, नियमों और मानदंडों का पूरी तरह पालन किए जाने पर ही बहुपक्षवाद को सबसे अधिक मजबूती मिलेगी।

जयशंकर बोले- वास्तविक मुद्दे दांव पर हैं
उन्होंने कहा, ‘‘बहुपक्षवाद को आगे बढ़ाने के लिए इसके समर्थन और व्यवहार, दोनों को मजबूत करना होगा। इसलिए बहुपक्षवाद में सुधार जरूरी है। अधिक भागीदारी वाला विचार-विमर्श और अधिक पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया दोनों की अब जरूरत है।’’ उन्होंने कहा कि इससे संयुक्त राष्ट्र प्रणाली को जरूरी उम्मीद और आशावाद मिलेगा तथा साथ मिलकर काम करने का संकल्प मजबूत होगा। जयशंकर ने आगाह किया कि इसमें ‘‘बहुत वास्तविक मुद्दे’’ दांव पर हैं, जिनमें शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का भविष्य, जलवायु कार्रवाई और जलवायु न्याय, उभरती प्रौद्योगिकियां और विकास वित्त पोषण, आतंकवाद से मुकाबला, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना, आपदाओं से निपटने की क्षमता बढ़ाना और महामारी के लिए तैयारी करना शामिल हैं।

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