नई दिल्ली, 17 अक्टूबर। इस बार एशियाई खेलों में भारत के हर 10 में से करीब 4 पदक बेटियों ने जीते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अक्टूबर 2026 को खिलाड़ियों से मुलाकात में बताया कि भारत के 85 पदकों में से 38 महिलाओं के हैं। इनमें 11 स्वर्ण पदक हैं। यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय ने दी।
ब्लिट्ज के हिसाब से महिलाओं का हिस्सा 44.7 फीसदी बैठता है।
हॉकी से मैराथन तक
मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में प्रधानमंत्री ने एक-एक जीत गिनाई। पुरुष और महिला, दोनों हॉकी टीमों ने सोना जीता। महिला टीम का यह इंतजार 44 साल लंबा था।
कबड्डी में दो स्वर्ण आए और तीरंदाजी में पांच। वेटलिफ्टिंग में 28 साल बाद पदक मिला। मैराथन में 1982 के बाद पहली बार पदक आया।
मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स, सॉफ्ट टेनिस और नौकायन की कुछ स्पर्धाओं में भारत ने एशियाई खेलों में पहली बार पदक जीते।
खेलों पर कितना खर्च
प्रधानमंत्री ने बताया कि खेलो इंडिया को बढ़ाने और खेल महासंघों को मजबूत करने के लिए 36 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा रखे गए। देश में एक हजार से ज्यादा खेलो इंडिया केंद्र बने हैं।
टॉप्स योजना में चुने गए खिलाड़ी को हर महीने 50 हजार रुपये जेब खर्च मिलता है। किसी खेल में विदेश में ट्रेनिंग जरूरी हो तो उसका खर्च भी सरकार देती है।
अगला निशाना 2036
दल में 15 से 17 साल के कई खिलाड़ियों ने पदक जीते। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब 5 से 15 साल के बच्चों की पहचान पर जोर रहेगा। सामने 2028 का लॉस एंजिल्स ओलंपिक है, 2030 के कॉमनवेल्थ खेल भारत में होंगे, और 2036 ओलंपिक की मेजबानी की तैयारी है।
उसी दिन खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने खेल महासंघों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने चैंपियन तैयार करने की व्यवस्था मजबूत करने को कहा।
भारत को क्या मिला
किशोर उम्र के पदक विजेताओं की नई पीढ़ी, और यह सबूत कि देश के आधे पदकों का बोझ अब बेटियां उठा रही हैं।
एक नजर में
•एशियाई खेल 2026 में कुल पदक : 85।
•महिलाओं के पदक : 38, इनमें 11 स्वर्ण।
•खेलो इंडिया और महासंघों के लिए : 36 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा।
•टॉप खिलाड़ी का जेब खर्च : 50 हजार रुपये महीना।
तुलना
•महिलाओं के पदक : 38 — कुल का 44.7%
•पुरुषों और मिश्रित टीमों के पदक : 47 — कुल का 55.3%
•बाकी दल के हर 47 पदक के मुकाबले बेटियों ने 38 पदक जीते।
हमारा हिसाब
38 ÷ 85 = 44.7%
भारत को क्या मिला
कम उम्र के चैंपियन, और उन्हें जल्दी तैयार करने वाली व्यवस्था।
ब्लिट्ज की सराहना
महिला हॉकी टीम, जिसने 44 साल बाद सोना जीता।
आंकड़े प्रधानमंत्री कार्यालय की विज्ञप्ति (पीआईबी रिलीज आईडी 2324078) से; pib.gov.in और newsonair.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज की सलाह
खेल मंत्रालय 85 पदकों की खेलवार सूची हर खिलाड़ी के जिले के साथ जारी कर सकता है। इससे राज्य देख पाएंगे कि उनके कौन-से केंद्र चैंपियन बना रहे हैं।
शहरों में काम पर निकलीं ज्यादा महिलाएं
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर। शहरों में अब पहले से ज्यादा महिलाएं काम कर रही हैं या काम ढूंढ़ रही हैं। सितंबर 2026 में 15 साल से ऊपर की शहरी महिलाओं में यह दर 25.9 फीसदी रही। अगस्त में यह 25.4 फीसदी थी।
यह अक्टूबर 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के मासिक बुलेटिन में है, जो 15 अक्टूबर 2026 को जारी हुआ।
गांवों की तस्वीर भी अच्छी है
ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी 38.9 फीसदी रही, जो एक साल पहले 37.9 फीसदी थी। गांव की महिलाओं में बेरोजगारी दर घटकर 3.9 फीसदी पर आ गई। यह 2026 का सबसे निचला स्तर है।
पूरे देश में बेरोजगारी दर 5 फीसदी पर टिकी रही। एक साल पहले यह 5.2 फीसदी थी। यह सर्वे 3,70,513 लोगों से बात करके बना है।
एक बात ध्यान में रखिए। महीने-दर-महीने के आंकड़े थोड़ा ऊपर-नीचे होते हैं। साल भर की
तुलना
ज्यादा भरोसेमंद है, और वह भी बढ़त दिखा रही है।
भारत को क्या मिला
घर में एक और कमाने वाला हाथ। परिवार की आमदनी बढ़ाने का यह सबसे सीधा रास्ता है।
एक नजर में
•शहरी महिलाओं की श्रम भागीदारी, सितंबर 2026 : 25.9%
•सभी महिलाओं की श्रम भागीदारी : 34.6%
•ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी : 38.9%
•बेरोजगारी दर (15 साल से ऊपर) : 5.0%
तुलना
•सभी महिलाएं : 34.6% सितंबर 2025 में।
•ग्रामीण महिलाएं : 38.9% — सितंबर 2025 में 37.9%
बेरोजगारी दर : 5.0%
• सितंबर 2025 में 5.2%
•साल भर में गांव की महिलाओं की भागीदारी, कुल महिलाओं के मुकाबले दोगुनी रफ्तार से बढ़ी।
हमारा हिसाब
2,11,333 गांव के लोग + 1,59,180 शहर के लोग = 3,70,513 लोगों का सर्वे।
भारत को क्या मिला
शहर और गांव, दोनों में कमाई करती ज्यादा महिलाएं।
ब्लिट्ज की सराहना
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के वे सर्वेक्षक, जो हर महीने 3.7 लाख लोगों तक पहुंचते हैं।
आंकड़े पीएलएफएस मासिक बुलेटिन, सितंबर 2026, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, 15 अक्टूबर 2026 से; mospi.gov.in और ddnews.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज की सलाह
सांख्यिकी कार्यालय तिमाही बुलेटिन में शहरी महिलाओं के आंकड़े राज्यवार दे सकता है। इससे राज्य देख पाएंगे कि बढ़त कहां से आ रही है।
छह महीने में 476 अरब डॉलर का निर्यात
नई दिल्ली, 17अक्टूबर। नोएडा या चेन्नई की फैक्ट्री में बना फोन जब विदेश बिकता है, तो कमाई और नौकरी दोनों यहीं रहती हैं। सितंबर 2026 में भारत ने 5.31 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचा। सितंबर 2025 में यह 3.11 अरब डॉलर था।
यानी 70.44 फीसदी की बढ़त। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 15 अक्टूबर 2026 को जारी व्यापार आंकड़ों में दी।
छह महीने का हिसाब
अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच भारत का कुल निर्यात, यानी सामान और सेवाएं मिलाकर, 476.20 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। पिछले साल इन्हीं महीनों में यह 418.31 अरब डॉलर था। बढ़त 13.84 फीसदी की है।
सिर्फ सामान का निर्यात 259.89 अरब डॉलर रहा, जो 18.51 फीसदी ज्यादा है।
गांव और कारखाने, दोनों की कमाई
सितंबर में इंजीनियरिंग सामान का निर्यात 20.91 फीसदी बढ़कर 12.17 अरब डॉलर पहुंचा। मोटे और दूसरे अनाज का निर्यात 49.88 फीसदी बढ़ा।
हस्तशिल्प और हाथ से बने कालीन 43.19 फीसदी बढ़े। मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पाद 35.18 फीसदी और हथकरघा व सूती धागा 20.76 फीसदी बढ़े।
अमेरिका सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक अप्रैल-सितंबर में अमेरिका को करीब 51 अरब डॉलर का सामान गया। पिछले साल यह 45.73 अरब डॉलर था। यह बात आकाशवाणी ने 16 अक्टूबर को बताई।
घाटा, और उसे भरने वाली सेवाएं
आयात भी बढ़ा है, इसलिए सामान के व्यापार में घाटा 177.64 अरब डॉलर रहा। यहां आईटी और दूसरी सेवाएं काम आईं। सेवाओं में भारत ने 102.71 अरब डॉलर ज्यादा कमाया।
ब्लिट्ज के हिसाब से सेवाओं की इस कमाई ने सामान के घाटे का 57.8 फीसदी हिस्सा भर दिया। सितंबर में सोने का आयात 81.27 फीसदी घटा।
भारत को क्या मिला
फैक्ट्री में बना ज्यादा सामान विदेश जा रहा है, और उसके पीछे ज्यादा रोजगार बन रहे हैं।
एक नजर में
•कुल निर्यात, अप्रैल-सितंबर 2026 : 476.20 अरब डॉलर
सामान का निर्यात, •अप्रैल-सितंबर 2026 : 259.89 अरब डॉलर
•इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात, सितंबर 2026 : 5.31 अरब डॉलर
•सेवाओं में बचत, अप्रैल-सितंबर 2026 : 102.71 अरब डॉलर
तुलना
•इलेक्ट्रॉनिक सामान, सितंबर : 5.31 अरब डॉलर — पिछले साल 3.11 अरब डॉलर
सामान का निर्यात, •सितंबर : 44.40 अरब डॉलर — पिछले साल 36.08 अरब डॉलर
•कुल निर्यात, छह महीने : 476.20 अरब डॉलर — पिछले साल 418.31 अरब डॉलर
•इलेक्ट्रॉनिक सामान कुल सामान-निर्यात (23.06%) से करीब तीन गुना रफ्तार (70.44%) से बढ़ा
हमारा हिसाब
102.71 अरब डॉलर ÷ 177.64 अरब डॉलर = 57.8% — सामान के घाटे का आधे से ज्यादा हिस्सा सेवाओं ने भरा।
भारत को क्या मिला
फैक्ट्री के सामान का बढ़ता निर्यात और उसके साथ रोजगार।
ब्लिट्ज की सराहना
देश के इलेक्ट्रॉनिक्स कारखाने और उनके कामगार, जिनका निर्यात सबसे तेज बढ़ा।
आंकड़े वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की 15 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति (पीआईबी रिलीज आईडी 2324095) से; pib.gov.in और newsonair.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज की सलाह
वाणिज्य विभाग हर महीने इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को मोबाइल, पुर्जे और बाकी सामान में बांटकर बता सकता है। इससे राज्य अगली फैक्ट्री की योजना बेहतर बना पाएंगे।
वायुसेना को उपग्रह, नौसेना को टॉरपीडो
नई दिल्ली। वायुसेना को अब अपना संचार उपग्रह मिलेगा। रक्षा मंत्रालय ने 15 अक्टूबर को कुल 4,106 करोड़ रुपये के दो सौदे किए। यह जानकारी मंत्रालय की विज्ञप्ति में है।
पहला सौदा 2,563 करोड़ रुपये का है। यह बेंगलुरु की न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड के साथ जीसैट-7सी उपग्रह के लिए हुआ। यह उपग्रह पूरी तरह देश में डिजाइन होकर बनेगा। इससे वायुसेना के विमान, रडार और कमान केंद्र सुरक्षित तरीके से जुड़े रहेंगे।
दूसरा सौदा 1,543 करोड़ रुपये का है। यह हैदराबाद की भारत डायनामिक्स लिमिटेड के साथ वरुणास्त्र टॉरपीडो के लिए हुआ। वरुणास्त्र जहाज से छोड़ा जाने वाला पनडुब्बी-रोधी टॉरपीडो है। इसे नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला ने बनाया है। यह दूर तक दुश्मन की पनडुब्बी को निशाना बना सकता है।

ब्लिट्ज के हिसाब से कुल रकम में उपग्रह का हिस्सा 62 फीसदी है।
भारत को क्या मिला
आसमान और समुद्र, दोनों में ताकत, और वह भी देश की ही संस्थाओं से।
ब्लिट्ज की सलाह
रक्षा मंत्रालय जीसैट-7सी के लॉन्च का संभावित समय बता सकता है। इससे वायुसेना के जमीनी उपकरणों के ऑर्डर उसी हिसाब से दिए जा सकेंगे।
सुखना और सौज झील को अंतरराष्ट्रीय दर्जा
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश की सौज झील और चंडीगढ़ की सुखना झील अब अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि बन गई हैं। दोनों को रामसर सूची में जोड़ा गया है। इसके साथ देश में रामसर स्थलों की गिनती 103 हो गई। यह घोषणा पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने की।
रामसर सूची में आने का मतलब है कि झील का पानी, पक्षी और मछलियां बचाकर रखी जाएंगी, और लोग उसका इस्तेमाल भी करते रहेंगे। मंत्री ने कहा कि ऐसी झीलें जैव विविधता, पानी और स्थानीय रोजगार के लिए जरूरी हैं। उन्होंने सैलानियों से दोनों जगह घूमने आने की अपील की।
भारत को क्या मिला
दो और झीलों की देखभाल पर दुनिया की नजर, और आसपास के गांवों के लिए सैलानियों से कमाई का मौका।
ब्लिट्ज की सलाह
दोनों राज्यों के वेटलैंड प्राधिकरण हर साल पक्षियों की गिनती और पानी का स्तर जारी कर सकते हैं, ताकि लोग झील की सेहत खुद देख सकें।
महिला किसानों का दिन, दिल्ली में सम्मान
नई दिल्ली, 17अक्टूबर। कृषि मंत्रालय ने नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में महिला किसान दिवस मनाया। कृषि सचिव अतीश चंद्रा की अध्यक्षता में अलग-अलग राज्यों की आगे बढ़ी महिला किसानों को सम्मानित किया गया। इस साल का विषय था — विकसित खेती और विकसित भारत में महिला किसानों की भूमिका। मौके पर महिला किसानों की सफलता की कहानियों की एक किताब भी जारी हुई। कार्यक्रम राज्यों के कृषि प्रशिक्षण संस्थानों और मैनेज में भी हुए, जहां आदिवासी इलाकों की महिला किसानों पर खास जोर रहा।
भारत को क्या मिला
।
खेती में महिलाओं की मेहनत को पहचान, और दूसरी महिलाओं के लिए आगे बढ़ने की मिसाल।

ब्लिट्ज की सलाह
कृषि मंत्रालय सम्मानित महिला किसानों के तरीके वीडियो में ढालकर कृषि विज्ञान केंद्रों तक पहुंचा सकता है।
विश्व बैंक में भारत : नौकरियां गिनिए
बैंकॉक, अक्टूबर।विकास बैंक कितना पैसा जुटाते हैं, इससे ज्यादा जरूरी यह है कि उससे कितनी नौकरियां बनीं। यह बात वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विश्व बैंक की विकास समिति की 114वीं बैठक में कही। बैठक थाईलैंड के बैंकॉक में हुई। यह जानकारी वित्त मंत्रालय ने दी।
वित्त मंत्री ने छोटे उद्योगों और स्टार्टअप को विकास के केंद्र में रखने की बात कही। उन्होंने सस्ते कर्ज, स्थानीय मुद्रा में कर्ज और गारंटी जैसे साधनों पर जोर दिया। भारत ने विश्व बैंक के वैश्विक शासन सूचकांकों के तरीके की समीक्षा की मांग भी दोहराई।
भारत को क्या मिला
विकासशील देशों की आवाज, और देश के ढांचागत कामों और छोटे उद्योगों के लिए सस्ते पैसे की पैरवी।
ब्लिट्ज की सलाह
आर्थिक मामलों का विभाग उन परियोजनाओं की सूची जारी कर सकता है, जिनके लिए वह विश्व बैंक की गारंटी चाहता है।
कर्नाटक में बनेगा सीटी स्कैनर
नई दिल्ली, 17अक्टूबर।अस्पताल में सीटी स्कैन से डॉक्टर बिना चीरा लगाए शरीर के अंदर की गांठ, खून का थक्का या टूटी हड्डी देख लेते हैं। ज्यादातर ऐसी मशीनें विदेश से आती हैं। अब कर्नाटक के मालूर की कंपनी पैनासिया मेडिकल टेक्नोलॉजीज देसी 32-स्लाइस सीटी स्कैनर बनाएगी।
इसके लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने कंपनी के साथ समझौता किया है। यह जानकारी मंत्रालय ने दी।

सीटी स्कैनर घूमते एक्स-रे और डिजिटल डिटेक्टर से शरीर की तस्वीरें लेता है। फिर कंप्यूटर उन्हें जोड़कर अंदर की पूरी तस्वीर बनाता है। 32-स्लाइस मशीन एक चक्कर में 32 पतली परतें खींचती है।
पैनासिया पहले से कैंसर के इलाज और रेडियोलॉजी की मशीनें बनाती है। विज्ञप्ति में यह नहीं बताया गया कि बोर्ड कितनी रकम देगा, मशीन को मंजूरी कब मिलेगी और कीमत क्या होगी। जिला अस्पताल तक मशीन पहुंचेगी या नहीं, यह इन्हीं तीन बातों पर टिका है।
भारत को क्या मिला
अस्पताल की एक बड़ी मशीन देश में बनाने, सुधारने और सस्ती करने का मौका।
ब्लिट्ज की सलाह
बोर्ड और कंपनी प्रोटोटाइप, ट्रायल, मंजूरी और पहली बिक्री की तारीखें जारी कर सकते हैं, ताकि राज्य सरकारें खरीद की योजना बना सकें।
निर्यात लाइसेंस की कतार दिखेगी
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर। निर्यातक को अक्सर पता नहीं चलता कि उसकी लाइसेंस फाइल कहां अटकी है। अब फैसला करने वाले अफसर एक स्क्रीन पर पूरी कतार देख सकेंगे। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वाणिज्य भवन में राष्ट्रीय रणनीतिक व्यापार कमान केंद्र शुरू किया है।
इसमें आयातक-निर्यातक कोड, एडवांस ऑथराइजेशन, ईपीसीजी, मूल प्रमाणपत्र और स्कोमेट लाइसेंस के डैशबोर्ड हैं। स्कोमेट वह सूची है जिसमें संवेदनशील रसायन, उपकरण और तकनीक आती हैं।
स्कोमेट का डैशबोर्ड देखकर मंत्री ने कहा कि मंत्रालयों की समिति जरूरत पड़े तो हर हफ्ते बैठे और बकाया अर्जियां जल्दी निपटाए। विज्ञप्ति में यह नहीं बताया गया कि कितनी अर्जियां बकाया हैं।
भारत को क्या मिला
ऐसा व्यापार तंत्र जो अपनी देरी खुद देख सके, और निर्यातकों का कम इंतजार।
ब्लिट्ज की सलाह
विदेश व्यापार महानिदेशालय हर महीने बकाया अर्जियों की गिनती और निपटारे का औसत समय जारी कर सकता है।











