नई दिल्ली। मई 2017 में बढ़ते फंसे कर्ज और घाटे के कारण भारतीय रिजर्व बैंक ने आईडीबीआई बैंक को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई यानी पीसीए के दायरे में रखा था। इसके तहत बैंक के कर्ज देने सहित कई कामकाज पर पाबंदियां लगाई गई थीं। करीब नौ साल बाद एक विदेशी निवेशक इसी बैंक में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी खरीदने के लिए प्रति शेयर ₹81 देने को तैयार है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 14 अक्टूबर 2026 को बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी दी। खरीदार कनाडा के टोरंटो स्थित बीमा एवं वित्तीय समूह फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
सौदे की कुल कीमत ₹52,878.08 करोड़ है। फेयरफैक्स के मुताबिक, यह लगभग 5.6 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि पूरा होने पर यह भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश होगा।
आकलित उचित मूल्य से ऊंची बोली
दो स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं ने 31 मार्च 2026 के वित्तीय आंकड़ों के आधार पर बैंक के शेयर का उचित मूल्य तय किया। एक ने बाजार में तुलनीय कंपनियों के मूल्यांकन का आधार लिया, जबकि दूसरे ने संपत्तियों के मूल्य का आकलन किया। दोनों के आकलन का औसत ₹75.99 प्रति शेयर रहा।
फेयरफैक्स की ₹81 प्रति शेयर की बोली इस औसत से करीब 6.6 प्रतिशत अधिक है। कंपनी के अनुसार, यह जून 2026 के अंत में बैंक के प्रति शेयर बही मूल्य से भी लगभग 23 प्रतिशत ऊपर है।
वित्त मंत्रालय ने शेयर बाजार के भाव को मूल्यांकन का मुख्य आधार नहीं बनाया। इसकी वजह शेयर में कम कारोबार और कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव था। मूल्यांकन अवधि में शेयर का भाव ₹61.01 से ₹118.38 के बीच रहा।
सुधरी है बैंक की वित्तीय स्थिति
आज आईडीबीआई बैंक की स्थिति 2017 से काफी अलग है।
30 जून 2026 को समाप्त तिमाही के नतीजों के अनुसार, बैंक का सकल एनपीए यानी कुल कर्ज में फंसे कर्ज का हिस्सा 2.30 प्रतिशत रहा। शुद्ध एनपीए 0.16 प्रतिशत था।
सौदे की कुल कीमत ₹52,878.08 करोड़ है, वित्त मंत्रालय का कहना है कि पूरा होने पर यह भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश होगा।
बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 26.92 प्रतिशत रहा। यह अनुपात बताता है कि जोखिमों का सामना करने के लिए बैंक के पास कितनी पूंजी है।
अप्रैल–जून तिमाही में बैंक ने ₹2,115.18 करोड़ का मुनाफा कमाया। पूरे वित्त वर्ष 2025–26 में उसका मुनाफा ₹9,513.36 करोड़ रहा।
₹81 प्रति शेयर के हिसाब से पूरे बैंक का मूल्य करीब ₹87,000 करोड़ बैठता है। यह उसके पिछले वित्त वर्ष के मुनाफे का लगभग नौ गुना है।
सरकार और एलआईसी को क्या मिलेगा
इस सौदे में केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत और भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहे हैं।
बेची जा रही हिस्सेदारी के अनुपात में केंद्र सरकार को करीब ₹26,544 करोड़ और एलआईसी को करीब ₹26,335 करोड़ मिलेंगे।
बिक्री के बाद भी सरकार के पास बैंक की 15 प्रतिशत और एलआईसी के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। हालांकि, दोनों बैंक के निदेशक मंडल से अपने नामित प्रतिनिधियों को हटा लेंगे।
वित्त मंत्रालय के सवाल-जवाब दस्तावेज के मुताबिक, एक बड़ा बदलाव यह होगा कि बैंक भविष्य में पूंजी जुटाने के लिए सरकारी सहायता पर निर्भर नहीं रहेगा।
यहां एक अंतर समझना जरूरी है: हिस्सेदारी बेचने से मिलने वाली रकम सरकार और एलआईसी को जाएगी। यह रकम सीधे बैंक में नई पूंजी के रूप में जमा नहीं होगी। बैंक में आगे किसी नए पूंजी निवेश की व्यवस्था अलग होगी।
फेयरफैक्स की आगे की योजना
फेयरफैक्स की योजना आईडीबीआई बैंक के साथ अपनी डिजिट बीमा कंपनियों और आईआईएफएल कैपिटल में अपनी हिस्सेदारी को जोड़ने की भी है। इसका उद्देश्य बैंकिंग के साथ बीमा और निवेश प्रबंधन सेवाएं देने वाला बड़ा वित्तीय कारोबार तैयार करना है।
हालांकि, यह फिलहाल प्रस्ताव है। इसके लिए रिजर्व बैंक, सेबी और बीमा नियामक इरडा की अलग-अलग मंजूरियां जरूरी होंगी। फेयरफैक्स ने भी स्पष्ट किया है कि इस प्रस्ताव पर अभी कोई बाध्यकारी समझौता नहीं हुआ है।
जिस आईडीबीआई बैंक को कभी सरकारी सहारे की जरूरत पड़ी थी, उसमें अब कनाडा की फेयरफैक्स नियंत्रणकारी हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। देश के लिए इस सौदे की अहमियत बिक्री से मिलने वाली रकम से कहीं अधिक है।
देश के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सौदा
सरकार और एलआईसी को मिलाकर करीब ₹53,000 करोड़ मिलना इस सौदे का एक बड़ा आर्थिक लाभ है। इसके साथ ही, जिस बैंक को कभी सरकारी सहारे की जरूरत थी, उसके लिए निजी स्वामित्व और भविष्य में बाजार से पूंजी जुटाने का रास्ता मजबूत हो सकता है।
आकलित उचित मूल्य से अधिक कीमत देने की फेयरफैक्स की पेशकश भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में उसकी दीर्घकालिक रुचि का संकेत भी है। हालांकि, सौदे के पूरे लाभ उसके सफलतापूर्वक पूरा होने और आगे बैंक के प्रदर्शन पर निर्भर करेंगे।
कीमतों की तुलना
फेयरफैक्स की बोली ₹81 प्रति शेयर है, जो ₹75.99 के आकलित उचित मूल्य से करीब 6.6 प्रतिशत अधिक है।
अक्टूबर 2022 में बिक्री की घोषणा से पहले शेयर का भाव ₹42.40 था। उसके मुकाबले यह बोली लगभग 1.9 गुना है।
ब्लिट्ज की सराहना
निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग यानी दीपम की भूमिका सराहनीय है। बिक्री प्रक्रिया में बैंक के आकलित उचित मूल्य से अधिक कीमत हासिल हुई है।
ब्लिट्ज का आकलन
अब अगला महत्वपूर्ण चरण रिजर्व बैंक की वह समीक्षा है, जिसमें खरीदार की पात्रता और उपयुक्तता परखी जाएगी।
इस प्रक्रिया की स्पष्ट समयसीमा सामने आने से जमाकर्ताओं, कर्मचारियों और निवेशकों को आगे की स्थिति समझने में मदद मिलेगी। सरकार की बची हुई 15 प्रतिशत हिस्सेदारी को लेकर भविष्य की योजना स्पष्ट होने से भी अनिश्चितता कम होगी।














