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इलेक्ट्रॉनिक्स में 74,628 नौकरियों का वादा, 38 फ़ैक्ट्रियाँ चालू

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 19, 2026
in the blitz
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अश्विनी वैष्णव

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।इलेक्ट्रॉनिक्स के पुर्ज़े बनाने की योजना में अब तक 106 परियोजनाओं को मंज़ूरी मिल चुकी है। लेकिन नौकरी ढूँढ़ रहे नौजवान के लिए असली आँकड़ा 38 है — इतनी फ़ैक्ट्रियों में काम शुरू हुआ है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 17 अगस्त को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफ़ैक्चरिंग स्कीम के तहत 31 और प्रस्तावों को मंज़ूरी दी। इसके साथ योजना में कुल 106 परियोजनाएँ, 30 उत्पाद और 15 राज्य शामिल हो गए। मंज़ूर निवेश 69,548 करोड़ रुपये है और सरकार का अनुमान है कि इससे 74,628 सीधी नौकरियाँ और क़रीब ढाई लाख अप्रत्यक्ष रोज़गार बनेंगे।

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अब असली तस्वीर। इन 106 में से 38 परियोजनाओं में उत्पादन शुरू हो चुका है और 16 में निर्माण या मशीन लगाने का काम आख़िरी दौर में है। यानी बाक़ी 52 अभी शुरुआती चरण में हैं। मंज़ूरी और नौकरी के बीच कारख़ाना खड़ा होने का पूरा वक़्त पड़ा है।

मंज़ूरी सौंपते हुए: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 17 अगस्त को नई दिल्ली में 31 नई मंज़ूरियाँ सौंपीं। नई परियोजनाएँ गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लगेंगी।

69,548 करोड़ रुपये में 74,628 सीधी नौकरियाँ — यानी एक नौकरी पर क़रीब 93 लाख रुपये का निवेश। यह मशीनों वाला उद्योग है, हाथ वाला नहीं। इसे समझकर ही इसमें उतरना चाहिए।

एक नज़र में

• मंज़ूरी: 17 अगस्त 2026 · 31 नई परियोजनाएँ
• कुल: 106 परियोजनाएँ · 30 उत्पाद · 15 राज्य
• निवेश: 69,548 करोड़ रुपये
• अनुमानित उत्पादन: 5,34,101 करोड़ रुपये
• नौकरियाँ: 74,628 सीधी · क़रीब 2.5 लाख अप्रत्यक्ष
• अब तक: 38 फ़ैक्ट्रियों में उत्पादन शुरू · 16 में काम आख़िरी दौर में
• नई परियोजनाओं से: 9,588 सीधी नौकरियाँ

नौजवान के लिए काम की बात यह है कि ये नौकरियाँ कहाँ बनेंगी। नई 31 परियोजनाएँ दस राज्यों में हैं — गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड। और जो चीज़ें बनेंगी उनमें कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल, कनेक्टर, रिले, स्पीकर, कैपेसिटर और एंटीना जैसे पुर्ज़े हैं। ये असेंबली लाइन का काम नहीं है, इनमें आईटीआई और डिप्लोमा स्तर की तकनीकी योग्यता चाहिए — और यही वह जगह है जहाँ कौशल विकास के संस्थानों को अभी से पाठ्यक्रम जोड़ने चाहिए।

एक और बात, जो कम बताई गई। इस बार पहली बार देश में लिथियम-आयन बैटरी में लगने वाले एसिटिलीन ब्लैक और इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव जैसे कच्चे माल बनाने की मंज़ूरी दी गई है, और दुर्लभ मृदा के स्थायी चुंबक भी। ये वही चीज़ें हैं जो अब तक लगभग पूरी तरह बाहर से आती थीं। बड़ी बात यह है कि मंज़ूर निवेश 59,350 करोड़ रुपये के शुरुआती अनुमान से 17 प्रतिशत ऊपर निकल गया है — यानी उद्योग की दिलचस्पी सरकार के अंदाज़े से ज़्यादा निकली। अब देखने की चीज़ यह है कि बाक़ी 68 परियोजनाएँ कितनी जल्दी चालू होती हैं। हर तिमाही में कितनी फ़ैक्ट्रियाँ शुरू हुईं, यह आँकड़ा सार्वजनिक हो तो नौकरी ढूँढ़ने वाला भी जान पाएगा कि कब और कहाँ अर्ज़ी देनी है।

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