हरविंदर आहूजा
जनवरी 2027 से, ऑनलाइन खरीदारों को डिस्काउंट, स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग, सर्च रिजल्ट, डार्क पैटर्न, इम्पोर्टेड सामान और प्रोडक्ट की जानकारी पर सख्त नियम देखने को मिलेंगे।
मी डिया की रिपोर्ट के अनुसार, अगले साल से भारत में ऑनलाइन खरीदारों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कीमतें, डिस्काउंट, सर्च रिज़ल्ट और स्पॉन्सर्ड प्रोडक्ट दिखाए जाने के तरीके में कई बदलाव देखने को मिलेंगे।
हाल ही में कंज्यूमर अफेयर्स डिपार्टमेंट के एक सर्कुलर के अनुसार, सरकार ने कीमत में पारदर्शिता, स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग, सर्च रिज़ल्ट में हेरफेर और डार्क पैटर्न से जुड़े नियमों को सख्त करने के लिए कंज्यूमर प्रोटेक्शन (ई-कॉमर्स) रूल्स, 2020 में संशोधन किया है।
इन बदलावों का मकसद ऑनलाइन शॉपिंग को ज़्यादा पारदर्शी बनाना और खरीदारों को सही जानकारी के साथ फ़ैसले लेने में मदद करना है, साथ ही ई-कॉमर्स कंपनियों की जवाबदेही भी बढ़ाना है।
डिस्काउंट के साथ पिछली असली कीमत दिखानी होगी
एक अहम बदलाव डिस्काउंट के विज्ञापन के तरीके से जुड़ा है। जब भी कोई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म कीमत में कटौती की घोषणा करेगा, तो उसे डिस्काउंट वाली कीमत और पिछली कीमत दोनों दिखानी होंगी।
पिछली कीमत को उस सबसे कम कीमत के तौर पर परिभाषित किया गया है जिस पर डिस्काउंट की घोषणा से पहले के 30 दिनों के दौरान प्रोडक्ट बेचा गया था।
इसका मकसद खरीदारों को यह साफ़ तौर पर बताना है कि क्या बताया गया डिस्काउंट असल में कीमत में कटौती है।
सर्च रिजल्ट में हेरफेर नहीं की जा सकेगी
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को सर्च रिज़ल्ट में इस तरह से हेरफेर करने की इजाज़त नहीं होगी जिससे खरीदार गुमराह हों या सर्च क्वेरी के हिसाब से रिजल्ट की प्रासंगिकता पर असर पड़े। इसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म को यह पक्क ा करना होगा कि सर्च रिज़ल्ट में दिखने वाले प्रोडक्ट को जानबूझकर इस तरह से न तो व्यवस्थित किया जाए और न ही बदला जाए जिससे खरीदार गुमराह हो सकें।
स्पॉन्सर्ड प्रोडक्ट की साफ पहचान होनी चाहिए
अगर कोई प्रोडक्ट सर्च रिज़ल्ट या शॉपिंग प्लेटफॉर्म के किसी दूसरे हिस्से में इसलिए दिखता है क्योंकि वह स्पॉन्सर्ड है, तो खरीदारों को यह साफ़ तौर पर बताया जाना चाहिए। संशोधित नियमों के तहत स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग के साथ साफ और प्रमुख जानकारी देना ज़रूरी है।
इससे खरीदारों को उन प्रोडक्ट के बीच फ़र्क करने में मदद मिलेगी जो उनकी सर्च से जुड़े होने के कारण दिख रहे हैं और उन प्रोडक्ट के बीच जो पेड प्लेसमेंट के ज़रिए प्रमोट किए जा रहे हैं।
‘डार्क पैटर्न’ पर सख्त नियम
ई-कॉमर्स कंपनियों को ‘डार्क पैटर्न की रोकथाम और नियमन के लिए दिशानिर्देश, 2023’ का पालन करना होगा। ये असल में ऐसे डिज़ाइन तरीके हैं जो ग्राहकों को ऐसे फैसले लेने के लिए प्रभावित या गुमराह कर सकते हैं जो वे शायद सामान्य तौर पर नहीं लेते।
नए नियमों के तहत, ई-कॉमर्स कंपनियों को हर साल अपना सेल्फ-ऑडिट करना होगा और नियमों के पालन का सर्टिफिकेट दिखाना होगा।
उत्पादन करने वाले देश की जानकारी देनी होगी
बाहर से मंगाए गए (इंपोर्टेड) प्रोडक्ट्स के मामले में, खरीदार इंपोर्टर और प्रोडक्ट किस देश से आया है, इसकी जानकारी देख सकेंगे। इस नियम का मकसद ग्राहकों को यह बताना है कि प्रोडक्ट्स कहां से आए हैं और उन्हें इंपोर्ट करने के लिए कौन जिम्मेदार है।
प्रोडक्ट के बारे में ज्यादा जानकारी
मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को प्रोडक्ट के बारे में ज़रूरी जानकारी देनी होगी ताकि ग्राहक बेहतर तरीके से खरीदारी का फैसला ले सकें।
इसमें ये जानकारियां शामिल होंगी:
‘बेस्ट बिफोर’ या ‘यूज़ बिफोर’ (इस्तेमाल की आखिरी) तारीखें
रिटर्न और रिफंड पॉलिसी
वारंटी की जानकारी
डिलीवरी की जानकारी
पेमेंट से जुड़ी जानकारी
ये बदलाव उन प्रोडक्ट्स के लिए खास तौर पर जरूरी हैं जहां एक्सपायरी या ‘यूज़-बिफोर’ तारीखें खरीदारी के फैसले पर असर डाल सकती हैं।
बिना मंजूरी के बंडल फीस नहीं
संशोधित नियमों में मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा ग्राहकों की जानकारी के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है।
प्लेटफॉर्म ग्राहक की साफ और स्पष्ट मंज़ूरी के बिना तय कामों के लिए ग्राहक की जानकारी का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
उन्हें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ी न होने वाली सेवाओं के लिए बंडल फीस लेने से भी रोका जाएगा, सिवाय लॉयल्टी या मेंबरशिप प्रोग्राम के मामलों के।
ई-कॉमर्स कंपनियां नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन से जुड़ेंगी
हर ई-कॉमर्स कंपनी को नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (एनसीएच) की कन्वर्जेंस प्रोसेस (एकीकरण प्रक्रिया) में पार्टनर बनना होगा। सरकार ने कहा कि इन संशोधनों का मुख्य मकसद एक ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह और ग्राहक-केंद्रित ई-कॉमर्स इकोसिस्टम बनाना है।














