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अवमानना केस में भावनाओं में न बहें कोर्ट

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 11, 2023
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अदालतों को अवमानना के अधिकार का उपयोग करते हुए अतिसंवेदनशील नहीं होना चाहिए और न ही भावातिरेक में बहना चाहिए। न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने अदालत की अवमानना के मामले में डॉक्टर का लाइसेंस निलंबित करने संबंधी कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले को दरकिनार करते हुए उक्त बात कही। पीठ ने कहा, ‘न्यायालय ने बार-बार स्पष्ट किया है कि अदालतों को प्राप्त अवमानना का क्षेत्राधिकार केवल मौजूदा न्यायिक प्रणाली के बहुमत को बरकरार रखने के उद्देश्य से है।’

न्यायालय ने कहा, ‘इस अधिकार का उपयोग करते हुए अदालतों को अतिसंवेदनशील नहीं होता चाहिए और न ही भावना में बहना चाहिए, बल्कि सोच समझकर काम करना चाहिए।’

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पीठ ने कहा कि अवमानना की कार्यवाही के दंड के रूप में डॉक्टर का लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता।

किस मामले में की टिप्पणी
शीर्ष अदालत कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने एकल पीठ के विभिन्न आदेशों को बरकरार रखा था।

एकल पीठ ने अनधिकृत निर्माण को हटाने में विफलता के लिए अपीलकर्ता के खिलाफ शुरू की गई अवमानना कार्यवाही में दंड के रूप में अपीलकर्ता का मेडिकल लाइसेंस निलंबित कर दिया था।

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