नई दिल्ली, 12 अक्टूबर। आपकी थाली की दाल अब पहले से कहीं ज्यादा देश के खेतों से आ रही है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के 11 अक्टूबर 2026 के ब्योरे के मुताबिक 2024-25 में दाल के आयात पर 46,427 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। 2025-26 में यह खर्च घटकर 31,794 करोड़ रुपये रह गया।
यानी एक ही साल में 14,634 करोड़ रुपये देश में ही रहे। ब्लिट्ज के हिसाब से यह 31.5 फीसदी की कमी है।
खेत में क्या बदला
दाल की पैदावार 256.83 लाख टन से बढ़कर 274.09 लाख टन पहुंच गई। यह 2025-26 का तीसरा अग्रिम अनुमान है। बढ़त करीब 6.7 फीसदी की है।
खेती का रकबा 277.20 लाख हेक्टेयर से 286.46 लाख हेक्टेयर हुआ। एक हेक्टेयर की उपज 926 किलो से बढ़कर 957 किलो हो गई। दोनों में करीब 3.3 फीसदी की बढ़त है।
सरकारी खरीद सबसे तेज बढ़ी। यह 18.40 लाख टन से 31.41 लाख टन पर पहुंची, यानी 70.7 फीसदी ज्यादा। दाल का निर्यात भी 85.5 करोड़ डॉलर से बढ़कर करीब 97 करोड़ डॉलर हो गया।
किसान को कितना भाव
2026-27 के लिए अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,450 रुपये प्रति क्विंटल है। यह 2024-25 से 900 रुपये यानी 11.9 फीसदी ज्यादा है। उड़द का भाव 8,200 रुपये और मसूर का 7,000 रुपये प्रति क्विंटल है।
आगे का रास्ता
दालों में आत्मनिर्भरता मिशन पर 2025-26 से 2030-31 तक 11,440 करोड़ रुपये खर्च होंगे। लक्ष्य है 2030-31 तक करीब 350 लाख टन पैदावार। इसके लिए हर साल करीब 5 फीसदी बढ़त चाहिए।
असली चुनौती उपज की है। लक्ष्य 1,130 किलो प्रति हेक्टेयर का है, जो आज से 18.1 फीसदी ज्यादा है। किसानों को छह साल में 87.5 लाख बीज किट मुफ्त मिलेंगी।
ब्योरे में खरीद के दो आंकड़े आपस में मेल नहीं खाते। एक जगह 2025-26 की खरीद 31.41 लाख टन है। एनसीसीएफ के डैशबोर्ड का कुल आंकड़ा 17 जून 2026 तक 10.55 लाख टन बताया गया है।
देश को क्या मिला
: एक साल में 14,634 करोड़ रुपये की बचत, और घर के खेतों में उगा सस्ता प्रोटीन।
एक नजर में
•दाल का आयात : 46,427.60 करोड़ रुपये (2024-25), 31,793.59 करोड़ रुपये (2025-26)
•पैदावार : 256.83 लाख टन से 274.09 लाख टन
•सरकारी खरीद : 18.40 लाख टन से 31.41 लाख टन
•मिशन का बजट : 11,440 करोड़ रुपये, 2025-26 से 2030-31 तक
तुलना
•मिशन का छह साल का बजट : 11,440 करोड़ रुपये — 100%
•एक साल की आयात बचत : 14,634 करोड़ रुपये — बजट का 128%
•एक साल की बचत छह साल के बजट से 28 फीसदी ज्यादा है।
हमारा हिसाब
46,427.60 − 31,793.59 = 14,634 करोड़ रुपये। 14,634 ÷ 11,440 = 1.28। 1,130 ÷ 957 = 18.1% ज्यादा उपज चाहिए।
भारत को क्या मिला
विदेश जाने वाले 14,634 करोड़ रुपये एक साल में देश में रहे।
ब्लिट्ज की सराहना
देश के दाल किसान, जिन्होंने एक साल में 17.26 लाख टन ज्यादा दाल उगाई।
आंकड़े कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के 11 अक्टूबर 2026 के ब्योरे से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
मंत्रालय अगले अपडेट में खरीद के दोनों आंकड़ों का फर्क साफ कर दे, तो किसान और व्यापारी एक ही आंकड़ा पढ़ेंगे।
रेलवे में 3,548 पदों पर भर्ती
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर।ग्रेजुएट युवाओं के लिए रेलवे में नौकरी का मौका है। रेल मंत्रालय की 11 अक्टूबर की जानकारी के मुताबिक रेलवे भर्ती बोर्डों ने एनटीपीसी ग्रेजुएट स्तर के 3,548 पद निकाले हैं। विज्ञापन संख्या सीईएन 06/2026 है।
सबसे ज्यादा 2,750 पद गुड्स ट्रेन मैनेजर के हैं, यानी कुल का करीब 77.5 फीसदी। सीनियर क्लर्क-कम-टाइपिस्ट के 371, जूनियर अकाउंट्स असिस्टेंट-कम-टाइपिस्ट के 300 और चीफ कमर्शियल-कम-टिकट सुपरवाइजर के 127 पद हैं।
किसी भी मान्यता वाले विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट आवेदन कर सकता है। उम्र 1 जनवरी 2027 को 18 से 33 साल के बीच होनी चाहिए। आवेदन rrbapply.gov.in पर 6 नवंबर 2026 की रात 11:59 बजे तक होंगे। फीस 8 नवंबर तक भरनी है और फॉर्म में सुधार 9 से 18 नवंबर तक होगा।
सुपरवाइजर पद की शुरुआती बेसिक सैलरी 35,400 रुपये है। बाकी तीन पदों पर यह 29,200 रुपये है। चुनाव दो कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं से होगा। टाइपिस्ट पदों पर अलग टाइपिंग टेस्ट नहीं होगा।
ब्लिट्ज़ की सलाह
आखिरी हफ्ते में पोर्टल पर भीड़ रहती है, इसलिए फॉर्म पहले भर लें।
चेन्नई में 13,000 करोड़ के प्रोजेक्ट
चेन्नई, 12 अक्टूबर।चेन्नई के पश्चिमी इलाकों से शहर के बीच तक पहुंचना अब आसान होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2026 को चेन्नई मेट्रो फेज-2 का पूनमल्ली-वडपलानी हिस्सा लोगों को सौंपा। इसमें 3.7 किलोमीटर का दो मंजिला ढांचा है। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक इस पर करीब 4,900 करोड़ रुपये लगे।

पैसा कहां लगा
कुल प्रोजेक्ट 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के हैं। हाईवे पर करीब 3,700 करोड़, रेलवे पर 750 करोड़ से ज्यादा और मनाली रिफाइनरी के नए प्लांट पर करीब 1,620 करोड़ रुपये लगेंगे। ब्लिट्ज के हिसाब से मेट्रो का हिस्सा 37.7 फीसदी है।
इन सबको जोड़ें तो 10,970 करोड़ रुपये बनते हैं। बाकी करीब 2,030 करोड़ रुपये बंदरगाहों के काम के हैं, जिनकी अलग कीमत नहीं बताई गई।
एनएच-744 पर 36 किलोमीटर और मदुरै रिंग रोड पर 30 किलोमीटर चार लेन की सड़क खुली। पलनी, वेल्लोर कैंटोनमेंट, अंबासमुद्रम, परमकुडी और नामक्कल के नए अमृत भारत स्टेशन भी शुरू हुए।
प्रधानमंत्री ने कहा, “इससे यहां नए रोजगार बनेंगे और देश के आयात को कम करने में भी बहुत मदद मिलेगी।” वे लुब्रिकेंट बेस ऑयल के नए प्लांट की बात कर रहे थे, जो हर साल 2.70 लाख टन बनाएगा।
देश में मेट्रो 2014 में 5 शहरों में करीब 250 किलोमीटर थी। अब यह 25 शहरों में 1,100 किलोमीटर से ज्यादा है, यानी लंबाई 4.4 गुना हो गई।
देश को क्या मिला
चेन्नई में छोटा सफर, दक्षिण तमिलनाडु में 66 किलोमीटर नई चार लेन सड़क और लुब्रिकेंट के कच्चे माल का अपना स्रोत।
एक नजर में
•कुल प्रोजेक्ट : 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा
•मेट्रो पूनमल्ली-वडपलानी : करीब 4,900 करोड़ रुपये
•हाईवे : करीब 3,700 करोड़ रुपये; 66 किलोमीटर खुले
मनाली प्लांट : करीब 1,620 करोड़ रुपये, 2.70 लाख टन सालाना
तुलना
•मेट्रो : 4,900 करोड़ रुपये — कुल का 37.7%
•हाईवे : 3,700 करोड़ रुपये — कुल का 28.5%
•मनाली प्लांट : 1,620 करोड़ रुपये — कुल का 12.5%
•मेट्रो का खर्च सारे हाईवे के काम से 32 फीसदी ज्यादा है।
हमारा हिसाब
4,900 + 3,700 + 750 + 1,620 = 10,970 करोड़ रुपये। 13,000 − 10,970 = करीब 2,030 करोड़ रुपये बंदरगाहों के काम के। 1,100 ÷ 250 = 4.4 गुना मेट्रो।
भारत को क्या मिला
तेज सफर, नई सड़कें और आयात घटाने वाला कारखाना।
ब्लिट्ज की सराहना
चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड, जिसने व्यस्त रास्ते पर दो मंजिला मेट्रो खड़ी की।
आंकड़े प्रधानमंत्री कार्यालय की 10 और 11 अक्टूबर 2026 की जानकारी से; pmindia.gov.in और pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
बंदरगाह अपने हर प्रोजेक्ट की लागत और क्षमता बता दें, तो 2,030 करोड़ रुपये का हिसाब भी साफ हो जाएगा।
रूस और ब्रिटेन में भारतीय युद्धपोत
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर। 13 से 15 अक्टूबर के बीच भारतीय नौसेना एक साथ दो बड़ी नौसेनाओं के साथ समुद्र में होगी। रक्षा मंत्रालय ने 11 अक्टूबर 2026 को दो घंटे के अंतर पर दो जानकारियां दीं।
पहली के मुताबिक मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल इंग्लैंड के प्लायमाउथ पहुंचा है। वहां 8 से 15 अक्टूबर तक ब्रिटेन की रॉयल नेवी के साथ ‘कोंकण-2026’ अभ्यास चल रहा है।
दूसरी के मुताबिक आईएनएस सह्याद्रि 10 अक्टूबर को रूस के व्लादिवोस्तोक पहुंचा। वहां 13 से 18 अक्टूबर तक रूसी नौसेना के साथ ‘इंद्र-2026’ अभ्यास होगा।

समुद्र में क्या होगा
कोंकण के दो हिस्से हैं। बंदरगाह में दोनों नौसेनाओं के जवान एक-दूसरे के जहाज देखेंगे, खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। समुद्र में हेलिकॉप्टर एक-दूसरे के जहाज पर उतरेंगे। फायरिंग, हवाई सुरक्षा और पनडुब्बी-रोधी अभ्यास भी होंगे।
इंद्र में भी पहले बंदरगाह और फिर समुद्र का हिस्सा है। मंत्रालय ने इसे ‘महासागर’ सोच से जोड़ा है। मंत्रालय ने इसे दिसंबर 2025 की भारत-रूस सालाना शिखर बैठक की अगली कड़ी बताया है।
देश को क्या मिला
ऐसी नौसेना, जो एक ही हफ्ते में अटलांटिक में ब्रिटेन और प्रशांत में रूस के साथ काम करती है। दोनों से रिश्ता भारत अपनी शर्तों पर रखता है।
ब्लिट्ज़ की सलाह
नौसेना दोनों अभ्यासों के बाद छोटा ब्योरा जारी करे, तो पाठक जान सकेंगे कि क्या-क्या हासिल हुआ।
तेल कंपनियों को सीधे डॉलर देगा आरबीआई
मुंबई, 12 अक्टूबर। पेट्रोल-डीजल बेचने वाली तीन सरकारी कंपनियों को अब डॉलर के लिए बाजार में नहीं जाना होगा। रिजर्व बैंक की 10 अक्टूबर की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक 12 अक्टूबर से वह इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल को सीधे डॉलर बेचेगा। यह इंतजाम उनकी रोज की पूरी जरूरत के लिए है और अगले आदेश तक चलेगा।
उसी दिन रिजर्व बैंक ने रुपये के सौदों के नियम भी कड़े किए। अब बिना असली कारोबार दिखाए सिर्फ 50 लाख डॉलर तक की हेजिंग हो सकेगी। पहले यह सीमा 10 करोड़ डॉलर थी, यानी नई सीमा पुरानी का बीसवां हिस्सा है।
20 लाख डॉलर से बड़े कुछ सौदों पर बैंकों को उसकी रकम का 20 फीसदी नकद रिजर्व बैंक के पास रखना होगा। रद्द सौदे दोबारा बुक नहीं होंगे। रिजर्व बैंक ने कहा है कि यह कदम विदेशी मुद्रा बाजार को व्यवस्थित रखने के लिए है।
देश को क्या मिला
तेल के आयात के लिए डॉलर का पक्का इंतजाम, और ऐसा बाजार जहां हेजिंग असली कारोबार से जुड़ी हो।
ब्लिट्ज़ की सलाह
रिजर्व बैंक हर महीने बताए कि इस खिड़की से कितने डॉलर दिए गए, तो बाजार को पूरी जानकारी मिलेगी।
केलांग में आईसीएमआर शोध केंद्र
केलांग, 12 अक्टूबर। पहाड़ों में रहने वालों की सेहत पर अब उन्हीं के बीच शोध होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा 12 अक्टूबर को हिमाचल के केलांग में आईसीएमआर के नए केंद्र की नींव रखने वाले थे। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय ने 11 अक्टूबर 2026 को दी। केलांग लाहौल-स्पीति जिले में है।
इस केंद्र का नाम आईसीएमआर हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च सेंटर है। यहां ऊंचाई पर शरीर के ढलने, पहाड़ी बीमारियों, मां-बच्चे की सेहत, पोषण और आपदा में इलाज पर शोध होगा। टेलीमेडिसिन और ड्रोन से दवा पहुंचाने का काम भी परखा जाएगा।
सेना की चिकित्सा सेवा और हिमाचल सरकार इसमें साझेदार हैं। केंद्र की लागत और आकार अभी नहीं बताए गए।
देश को क्या मिला
: सीमा के पहाड़ी इलाकों के जवानों, चरवाहों और जनजातीय परिवारों के लिए उन्हीं की जगह पर शोध।
फोटो नहीं — यह खाना खाली रखें : समारोह प्रकाशन के दिन ही है; अगले स्लॉट से पहले 12 अक्टूबर 2026 की पीआईबी फोटो गैलरी देखें।
ब्लिट्ज़ की सलाह
आईसीएमआर केंद्र की लागत, स्टाफ और पूरा होने की तारीख भी बता दे।
रिसर्च डेस्क : 100 इंसानी दिमागों का नक्शा
चेन्नई, 12 अक्टूबर। आईआईटी मद्रास का एक केंद्र अब 100 से ज्यादा इंसानी दिमागों का कोशिका स्तर तक का नक्शा बनाएगा। यह नक्शा जन्म से पहले से लेकर बुढ़ापे तक का होगा। प्रधानमंत्री कार्यालय की 10 अक्टूबर 2026 की जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री ने 11 अक्टूबर को सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर देश को सौंपा और यह मिशन शुरू किया।
उन्होंने सी-स्ट्रोक नाम का एटलस भी जारी किया। इसमें स्ट्रोक से प्रभावित एक दिमाग के 1,000 से ज्यादा माइक्रोस्कोपिक हिस्से दर्ज हैं। इससे इलाज के नए रास्ते खोजने में मदद मिलेगी।
यह केंद्र जून 2026 में दिमाग के निचले हिस्से ब्रेनस्टेम का एटलस ‘एंकर’ जारी कर चुका है। आईआईटी मद्रास के मुताबिक इसमें 200 से ज्यादा हिस्से 500 से ज्यादा परतों से जोड़कर दिखाए गए हैं। यह anchor.humanbrain.in पर सबके लिए मुफ्त है।
केंद्र के प्रमुख प्रोफेसर मोहनशंकर शिवप्रकाशम हैं। करीब 20 विदेशी साझेदार और 200 से ज्यादा शोधकर्ता इससे जुड़े हैं। नए मिशन का बजट और समय-सीमा अभी किसी दस्तावेज में नहीं है।
देश को क्या मिला
भारत में बना इंसानी दिमाग का खुला नक्शा, जो दुनिया भर के शोधकर्ताओं को भारत की ओर खींचेगा।
फोटो नहीं — यह खाना खाली रखें : पीएमओ और आईआईटी मद्रास के पन्नों पर केंद्र की तस्वीर नहीं मिली। अगले स्लॉट से पहले 11 अक्टूबर की पीआईबी गैलरी देखें।
ब्लिट्ज़ की सलाह
आईआईटी मद्रास मिशन की समय-सीमा और अब तक स्कैन हुए दिमागों की गिनती बता दे।













