पर्चे वाली दवा का विज्ञापन अब दुकान पर नहीं
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर। मोहल्ले के मेडिकल स्टोर का बोर्ड, पर्चा या व्हाट्सऐप संदेश। एप पर एंटीबायोटिक की छूट का बैनर। यह सब अब नियम के दायरे में आएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधि नियम 1945 में बदलाव का मसौदा निकाला है। यह राजपत्र में जी.एस.आर. 861(ई) के नाम से 28 सितंबर 2026 को छपा और पीआईबी पर 9 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:10 बजे बताया गया। मसौदा नियम 65 में एक नया उप-नियम (22) जोड़ता है। इसके तहत दवा बेचने, रखने, दिखाने या बांटने का लाइसेंस रखने वाला कोई भी — खुदरा या थोक — दायरे में आएगा। वह शेड्यूल एच, एच1 या X की दवा का विज्ञापन केंद्र सरकार की पहले से मंजूरी के बिना नहीं करेगा।
अब तक यह रोक सिर्फ दवा बनाने वाली कंपनियों पर थी। दुकानदार का नाम नियम में नहीं था। मसौदा औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (डीटीएबी) की 16 फरवरी 2026 की 93वीं बैठक के बाद आया है। राजपत्र की प्रति जनता को मिलने के 30 दिन के भीतर कोई भी आपत्ति या सुझाव भेज सकता है।
तीन शेड्यूल में क्या है
शेड्यूल एच पर्चे वाली दवाओं की आम सूची है। शेड्यूल एच1 उससे छोटी और सख्त सूची है, जो 2014 में बनी। इसमें तीसरी-चौथी पीढ़ी की एंटीबायोटिक, टीबी की दवाएं और आदत डालने वाली कुछ दवाएं हैं, जिनका अलग रजिस्टर दुकान पर रखना होता है। शेड्यूल X नशीली और मानसिक असर वाली दवाओं की सूची है, जिनके लिए पर्चे की दो प्रतियां चाहिए। मंत्रालय ने साफ लिखा है कि मकसद एंटीबायोटिक और मानसिक रोग की दवाओं पर पहरा मजबूत करना है।
दुकानदार पर रोक क्यों
मंत्रालय ने चार मकसद गिनाए हैं। पूरी आपूर्ति-शृंखला पर निगरानी। बिना मंजूरी के प्रचार पर रोक। खुद दवा लेने के खतरे में कमी। और डॉक्टर की देखरेख वाली दवाओं पर पहरा। वजह सीधी है। कंपनी एक ब्रांड का विज्ञापन एक बार करती है। एप वाली दवा-चेन हर दिन किसी न किसी दवा का करती है, और अब तक नियम उसके लिए चुप था।
भारत को क्या मिला
एक नियम जो दवा के पीछे-पीछे दुकान के काउंटर तक जाता है — और 30 दिन, जिसमें पाठक भी उस पर राय दे सकता है।
एक नजर में
•क्या : औषधि नियम 1945 में नया उप-नियम (22), नियम 65 के तहत मसौदा
•राजपत्र : जी.एस.आर. 861(ई), 28 सितंबर 2026
•घोषणा : 9 अक्टूबर 2026
•शेड्यूल : एच, एच1, X · •पहले : सिर्फ दवा निर्माता · अब : बेचने, रखने, दिखाने, बांटने का हर लाइसेंसधारी — खुदरा और थोक
•आधार : डीटीएबी की 93वीं बैठक, 16 फरवरी 2026 ·
•आपत्ति : राजपत्र मिलने के 30 दिन
तुलना
•रोक के दायरे में कड़ियां पहले : 1 (निर्माता) — 100%
•मसौदे के बाद : 3 (निर्माता, थोक, खुदरा)
• पहले का 300% रोक एक कड़ी से पूरी शृंखला तक पहुंची।
हमारा हिसाब
1 से 3 कड़ियां। 28 सितंबर से 9 अक्टूबर = राजपत्र से घोषणा तक 11 दिन। ब्लिट्ज का हिसाब।
भारत को क्या मिला
पर्चे वाली दवा के विज्ञापन का नियम जो दवा दुकान और एप तक जाता है, और उसे बनाने में जनता की राय।
ब्लिट्ज की सराहना
औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड और स्वास्थ्य मंत्रालय — एक विज्ञप्ति में राजपत्र का नंबर, नियम और शेड्यूल, तीनों लिखे।
आंकड़े स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की विज्ञप्ति, पीआईबी, 9 अक्टूबर 2026 (रिलीज आईडी 2321172) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) अंतिम नियम के साथ दुकानदारों के लिए एक पन्ने की गाइड छापे। उसमें लिखे कि कीमत-सूची, व्हाट्सऐप संदेश और एप की सूचना में से क्या “विज्ञापन” है। तब नियम लागू होने से पहले समझ में आएगा।
बिजलीघरों को कोयला 36 फीसदी ज्यादा
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर। बिजलीघर सितंबर में अपने कोयला भंडार से रोज 2.43 लाख टन ज्यादा खर्च कर रहे थे, जितना उन्हें मिल रहा था। अक्टूबर में यह फासला घटकर 1.16 लाख टन रोज रह गया है। यह कोयला मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को सुबह 10:54 बजे PIB पर जारी विज्ञप्ति में बताया। ब्लिट्ज के हिसाब से यह 52.3 फीसदी की कमी है — यानी “आधे से भी कम”, आंकड़ों में। बिजली क्षेत्र को रोज की आपूर्ति सितंबर के निचले स्तर से करीब 36 फीसदी ऊपर है। अक्टूबर की औसत आपूर्ति सितंबर से करीब 9 फीसदी ज्यादा है।
रेल का आंकड़ा देखने लायक है। अक्टूबर में रोज 465 से ज्यादा रेक लदे हैं। 470 रेक का लक्ष्य लगातार तीन दिन पूरा हुआ। मंत्रालय का कहना है कि रोज 465–475 रेक चलते रहें तो भंडार स्थिर रहेगा। 465 बनाम 470, यानी लक्ष्य का 98.9 फीसदी।

“क्रिटिकल” का मतलब
विज्ञप्ति एक शब्द भी समझाती है। “क्रिटिकल स्टॉक” की सूची में वह बिजलीघर आता है जिसके पास तय मानक से कम भंडार है। मंत्रालय के मुताबिक यह सिर्फ पहले से चेतावनी का निशान है, इसका मतलब यह नहीं कि बिजलीघर का कोयला खत्म हो गया या वह बंद होने वाला है। सूची में कितने बिजलीघर हैं, भंडार कितने दिन का है, कुल भंडार कितना है — यह विज्ञप्ति में नहीं है।
भारत को क्या मिला
त्योहार के हफ्तों की बिजली, जिसका हिसाब सामने है — भंडार की खपत आधी, रेलगाड़ियां लक्ष्य पर, और चेतावनी का निशान समझाया हुआ।
एक नजर में
•बिजली क्षेत्र को रोज आपूर्ति : सितंबर के निचले स्तर से करीब 36% ऊपर
• अक्टूबर औसत : सितंबर से करीब 9% ज्यादा
•रेल लदान, अक्टूबर : रोज 465 से ज्यादा रेक; 470 का लक्ष्य लगातार तीन दिन पूरा ·
•स्थिरता की सीमा : 465–475
•भंडार की रोज खपत : 2.43 लाख टन (सितंबर) से 1.16 लाख टन (अक्टूबर)
•नहीं बताया : क्रिटिकल सूची में बिजलीघर; कितने दिन का भंडार; कुल भंडार
तुलना
•रोज खपत, सितंबर : 2.43 लाख टन — 100%
•रोज खपत, अक्टूबर : 1.16 लाख टन — सितंबर का 47.7%
•भंडार पर रोज का बोझ 52.3% कम।
हमारा हिसाब
(0.243 − 0.116) ÷ 0.243 = 52.3%। 465 ÷ 470 = 98.9%। ब्लिट्ज का हिसाब।
भारत को क्या मिला
त्योहार के मौसम में बिजलीघरों का भंडार सितंबर की आधी रफ्तार से घट रहा है, और रेलगाड़ियां लक्ष्य पर हैं।
ब्लिट्ज की सराहना
कोयला और रेल मंत्रालय, और रोज 470 रेक लादने वाले कर्मचारी।
आंकड़े कोयला मंत्रालय की विज्ञप्ति, पीआईबी, 9 अक्टूबर (रिलीज आईडी 2321166) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज की सलाह
कोयला मंत्रालय अगली जानकारी में क्रिटिकल सूची के बिजलीघरों की गिनती और उनके औसत भंडार के दिन भी बताए, ताकि “पहले से चेतावनी” को आंकड़े के सामने पढ़ा जा सके।
खादी के पांच लाख कारीगर, 80 फीसदी महिलाएं
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर। चरखा चलाने और खादी बुनने वाले देश के करीब पांच लाख कारीगरों में लगभग 80 फीसदी महिलाएं हैं। यानी चार लाख महिलाएं, ब्लिट्ज के हिसाब से। यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के लेख में है, जो 9 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:02 बजे पीआईबी पर आया। कताई और बुनाई की मजदूरी अप्रैल 2025 से बढ़ाई गई है, पर लेख दर नहीं बताता। उद्यमिता विकास संस्थान , अहमदाबाद के मूल्यांकन में योजनाओं के 75 फीसदी से ज्यादा कारीगरों ने आमदनी में नापी जा सकने वाली बढ़त बताई।
डिजाइन के आंकड़े नए हैं। निफ्टट दिल्ली के खादी उत्कृष्टता केंद्र ने 2,129 डिजाइन संग्रह बनाए हैं। “नवयुग खादी” 710 उत्पादों के साथ शुरू हुई — हर बिकने वाले उत्पाद के पीछे तीन संग्रह। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूतावास के व्यापार पोर्टल पर निर्यात संवर्धन परिषद के तौर पर दर्ज है। कर्नाटक के चित्रदुर्ग का केंद्रीय स्लाइवर प्लांट अपनी 50 फीसदी बिजली सौर ऊर्जा से लेता है।

लेख में बिक्री, उत्पादन या निर्यात का कोई आंकड़ा नहीं है, और ब्लिट्ज ने जोड़ा नहीं।
भारत को क्या मिला
: चार लाख महिलाएं, जो चरखे और करघे से कमाती हैं, डेढ़ साल पहले बढ़ी मजदूरी पर। और एक डिजाइन-पाइपलाइन, जिसने खरीदार के सामने 710 नई चीजें रखीं।
एक नजर में
•खादी कारीगर : करीब 5 लाख; लगभग 80% महिलाएं
•डिजाइन संग्रह, निफ्ट दिल्ली का खादी उत्कृष्टता केंद्र : 2,129 · •नवयुग खादी उत्पाद : 710
•आमदनी बढ़ी अहमदाबाद मूल्यांकन : 75% से ज्यादा कारीगरों की
•कताई-बुनाई की मजदूरी : अप्रैल 2025 से बढ़ी (दर नहीं बताई) · •चित्रदुर्ग प्लांट : 50% सौर
तुलना
•डिजाइन संग्रह : 2,129 — 100%
•बाजार में आए उत्पाद : 710 — संग्रहों का 33%
•हर उत्पाद के पीछे तीन डिजाइन।
हमारा हिसाब
0.8 × 5,00,000 = 4,00,000 महिलाएं। 2,129 ÷ 710 = 3.0। ब्लिट्ज का हिसाब।
भारत को क्या मिला
चरखे पर कमाने वाली चार लाख महिलाएं, और एक खादी जिसके पीछे अब डिजाइन स्टूडियो है।
ब्लिट्ज की सराहना
निफ्ट दिल्ली का खादी उत्कृष्टता केंद्र — 2,129 संग्रह — और खादी और ग्रामोद्योग आयोग।
आंकड़े एमएसएमई मंत्रालय के लेख, पीआईबी, 9 अक्टूबर (रिलीज आईडी 2321195) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज की सलाह
खादी और ग्रामोद्योग आयोग अप्रैल 2025 की कताई-बुनाई की मजदूरी की दरें पुरानी दरों के बगल में छापे, ताकि “बढ़ी” को रुपये प्रति लच्छे में पढ़ा जा सके।
आसियान व्यापार समझौता : अगली बैठक भारत में
जकार्ता, 9 अक्टूबर। दस आसियान देशों के साथ भारत का माल व्यापार समझौता 2010 से लागू है, और भारत इसे नए सिरे से लिखवाना चाहता है। इसकी समीक्षा अब समय-सीमा पर आ गई है। संयुक्त समिति की 15वीं बैठक जकार्ता में आसियान सचिवालय में 6 से 9 अक्टूबर 2026 तक हुई। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने इसकी विज्ञप्ति 9 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे पीआईबी पर जारी की। समिति ने अपनी सभी उप-समितियों से कहा कि समीक्षा के बाकी अध्याय तय समय-सीमा के साथ जल्दी पूरे करें। 16वीं बैठक जनवरी 2027 में भारत में होगी।
भारत की ओर से वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव नितिन कुमार यादव ने अगुवाई की। आसियान की ओर से मलेशिया के निवेश, व्यापार और उद्योग मंत्रालय की उप महासचिव (व्यापार) मस्तूरा अहमद मुस्तफा ने। दसों सदस्य देश मौजूद थे। आठ में से तीन उप-समितियां साथ में बैठीं : कानूनी और संस्थागत मामले, बाजार पहुंच और राष्ट्रीय व्यवहार, और उत्पत्ति के नियम। तीसरी सबसे अहम है। उत्पत्ति का नियम तय करता है कि किसी माल पर समझौते का कम शुल्क तभी लगेगा जब उसमें सदस्य देश का इतना मूल्य जुड़ा हो। विज्ञप्ति में व्यापार का कोई आंकड़ा नहीं है, और ब्लिट्ज ने जोड़ा नहीं।

भारत को क्या मिला
एक तारीख और एक जगह। जनवरी, भारत में, और हर उप-समिति से रिपोर्ट। आसियान के दस बाजारों में माल भेजने वाले निर्यातक के लिए उत्पत्ति का नियम कागज की छूट और बंदरगाह की छूट का फर्क है।
एक नजर में
•बैठक : एआईटीजीए संयुक्त समिति की 15वीं, 6–9 अक्टूबर 2026, आसियान सचिवालय, जकार्ता।
•दसों आसियान देश
•सह-अध्यक्ष : नितिन कुमार यादव (भारत) · •मस्तूरा अहमद मुस्तफा (मलेशिया, आसियान की ओर से)
•उप-समितियां बैठीं : 8 में से 3 · निर्देश : बाकी अध्याय समय-सीमा के साथ।
•अगली : 16वीं बैठक, जनवरी 2027, भारत
तुलना
•कुल उप-समितियां : 8 — 100%
•इस बार बैठीं : 3 — 37.5%
•पांच अध्याय जनवरी का इंतजार करेंगे।
हमारा हिसाब
3 ÷ 8 = 37.5%। इससे आगे नहीं — विज्ञप्ति में व्यापार का आंकड़ा नहीं।
भारत को क्या मिला
अपने सबसे बड़े क्षेत्रीय व्यापार समझौते को नए सिरे से लिखने की तारीख, और अगला दौर अपने घर में।
ब्लिट्ज की सराहना
अतिरिक्त सचिव नितिन कुमार यादव और वाणिज्य विभाग की जकार्ता टीम।
आंकड़े वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की विज्ञप्ति, पीआईबी, 9 अक्टूबर 2026 (रिलीज आईडी 2321209) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
वाणिज्य विभाग समीक्षा के अध्यायों की सूची और हर अध्याय की हालत जनवरी से पहले छापे, ताकि निर्यातक देख सकें कि आठ में से कौन-सी उप-समिति पीछे है।
सीटीआईएल : नौ साल में 4,000 कानूनी राय
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर। भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईटीएफ) के व्यापार और निवेश कानून केंद्र (सीटीआईएल) ने नौ साल में 4,000 से ज्यादा कानूनी राय दी हैं। करीब दस मुक्त व्यापार समझौतों की बातचीत में हिस्सा लिया है। यह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 9 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:33 बजे पीआईबी पर जारी विज्ञप्ति में बताया। केंद्र की नौवीं सालगिरह 7 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय में मनाई गई। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने वीडियो से कहा कि व्यापार के नियमों पर सवाल उठने और डिजिटल व्यापार के दौर में कानूनी पकड़ पहले से ज्यादा जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पी.एस. नरसिम्हा ने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कानून को सिर्फ मानना नहीं, बनाना चाहिए। संयुक्त सचिव कपिल चौधरी के मुताबिक केंद्र अब महत्वपूर्ण खनिज, सेमीकंडक्टर, एआई, आपूर्ति-शृंखला और जलवायु पर शोध करता है।
भारत को क्या मिला
व्यापार समझौते के बाद आने वाले विवादों के लिए अपना कानूनी दल — साल में करीब 444 राय, ब्लिट्ज के हिसाब से।














