जीएसटी में गिरफ्तारी खत्म, छोटे नोटिस बंद
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर। किसी कारोबारी पर 10,000 रुपये से कम का टैक्स बनता है, तो उसे अब कारण बताओ नोटिस नहीं मिलेगा। यह सीमा सीजीएसटी, एसजीएसटी , आईजीएसटी और सेस को जोड़कर गिनी जाएगी। इतने छोटे जो मामले पहले से चल रहे हैं, वे भी इसी नियम से निपटाए जाएंगे। यह सिफारिश वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई 57वीं जीएसटी काउंसिल की है। वित्त मंत्रालय ने इसे 8 अक्टूबर 2026 को शाम 7:03 बजे पीआईबी पर जारी किया। विज्ञप्ति साफ कहती है कि ये सिफारिशें अधिसूचना और कानून में बदलाव के बाद ही लागू होंगी।
सबसे बड़ी बात कानून की धारा 69 है। यही धारा जीएसटी अफसर को गिरफ्तारी का अधिकार देती है। काउंसिल ने इसे हटाने की सिफारिश की है। मुकदमा चलाने की सीमा 1 करोड़ रुपये के टैक्स से बढ़ाकर 5 करोड़ कर दी गई है, यानी पांच गुना। धारा 125 का आम जुर्माना 25,000 रुपये से घटकर 10,000 रुपये होगा। ब्लिट्ज के हिसाब से यह 60 फीसदी की कटौती है।

छोटे कारोबारी को क्या मिला
5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाला कारोबारी अगर रिटर्न देर से भरता है, तो लेट फीस नहीं लगेगी। शर्त एक है : रिटर्न को उसी महीने के आखिर तक भर दिया जाए जिसमें तारीख निकली थी। सिर्फ ग्राहकों को बेचने वाले 5 करोड़ तक के कारोबारी सालाना रिटर्न और तिमाही भुगतान का विकल्प चुन सकेंगे। इसे सैद्धांतिक मंजूरी मिली है, ढांचा अभी बनना है। ई-कॉमर्स पर बेचने वाला छोटा विक्रेता प्लेटफॉर्म के गोदाम को ही अपना मुख्य कारोबारी पता बताकर रजिस्ट्रेशन करा सकेगा। शर्त यह कि वह महीने में 2.5 लाख रुपये से ज्यादा का इनपुट टैक्स क्रेडिट आगे न दे।
बिना धोखाधड़ी के मामले में एक राहत और है। आदेश के 30 दिन के भीतर (धारा 73) या 60 दिन के भीतर (धारा 74ए) टैक्स और ब्याज चुका दें, तो जुर्माना सिर्फ 5 फीसदी लगेगा। उस जुर्माने की 10,000 रुपये की न्यूनतम सीमा भी हट जाएगी।
सड़क पर ट्रक रोकने के नियम
ई-वे बिल वाला माल अब सिर्फ पक्की खुफिया सूचना पर रोका जाएगा। उसके लिए ज्वाइंट कमिश्नर या उससे ऊपर के अफसर की मंजूरी चाहिए होगी। जिस राज्य से माल सिर्फ गुजर रहा है, वहां रोका ही नहीं जाएगा। रास्ते में चल रहे माल और गाड़ी की जब्ती (धारा 130) अब नहीं होगी। सिर्फ जुर्माने की अपील पर पहले जमा की जाने वाली रकम 40 करोड़ रुपये पर रोक दी गई है, 20 करोड़ केंद्र और 20 करोड़ राज्य के हिस्से।
रिफंड दस दिन में
निर्यातक के लिए असली खबर रिफंड की है। रिफंड की अर्जी की पावती 15 दिन की जगह 10 दिन में मिलेगी। 10 दिन में जवाब न आए, तो पावती मिली मानी जाएगी। निर्यात और उल्टे शुल्क ढांचे वाले रिफंड का 90 फीसदी हिस्सा सिस्टम अपने आप अस्थायी तौर पर मंजूर कर देगा। दो नए रिफंड भी बनाए गए हैं। इनपुट सेवाओं पर जमा क्रेडिट 1 नवंबर 2026 से रिफंड होगा। पूंजीगत माल पर क्रेडिट 1 अप्रैल 2027 से, 60 महीनों में, रिफंड होगा।
दरों में बदलाव कम और सीधे हैं-
•इसबगोल के बीज पर टैक्स शून्य।
•बैटरी चार्जिंग समेत इलेक्ट्रिक गाड़ी से सवारी ढोने पर 5 फीसदी का विकल्प।
•ई-कॉमर्स से मंगाई गई डिलीवरी सेवा पर 5 फीसदी, बिना क्रेडिट। •पूर्वोत्तर, सिक्किम और बागडोगरा के लिए सीट-शेयर हेलीकॉप्टर सेवा पर छूट।
•कॉफी क्योरिंग और बोने के बीज के भंडारण पर छूट।
• कबाड़ के कारोबार में कंपनी से कंपनी की बिक्री पर 2 फीसदी टीडीएस ।
भारत को क्या मिला
एक ऐसा टैक्स जो अब पुलिस की तरह नहीं, सिस्टम की तरह चलेगा। वाणिज्य मंत्रालय की 8 अक्टूबर की विज्ञप्ति देश में 6.3 करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम गिनाती है। 10,000 रुपये का नोटिस-फर्श, लेट फीस की माफी और 90 फीसदी का अपने-आप रिफंड इन्हीं के लिए लिखे गए हैं।
एक नजर में
•गिरफ्तारी का अधिकार : सीजीएसटी कानून की धारा 69 हटेगी
•मुकदमे की सीमा : 1 करोड़ रुपये से 5 करोड़ रुपये का टैक्स
•आम जुर्माना, धारा 125 : 25,000 रुपये से 10,000 रुपये
•नोटिस नहीं : 10,000 रुपये से कम टैक्स पर (सीजीएसटी, एसजीएसटी, आईजीएसटी और सेस मिलाकर)
•रिफंड की पावती : 15 दिन से 10 दिन; 90% रिफंड अपने आप, •अस्थायी मंजूरी
लेट फीस माफ : 5 करोड़ रुपये तक टर्नओवर, •महीने के अंत तक रिटर्न
तुलना
•मुकदमे की सीमा पहले : 1 करोड़ रुपये — 100%
मुकदमे की सीमा अब : 5 करोड़ रुपये — पहले का 500%
•आपराधिक मुकदमे की सीमा पांच गुना ऊपर गई।
हमारा हिसाब
5 ÷ 1 = 5 गुना। (25,000 − 10,000) ÷ 25,000 = 60% कम जुर्माना। (15 − 10) ÷ 15 = 33.3% कम इंतजार। तीनों ब्लिट्ज का हिसाब; विज्ञप्ति में आंकड़े हैं, अनुपात नहीं।
भारत को क्या मिला
ऐसा जीएसटी जो गिरफ्तार नहीं कर सकता, 5 करोड़ से ऊपर ही मुकदमा चलाता है, और निर्यातक का नौ-दसवां रिफंड बिना अफसर के दस्तखत लौटाता है।
ब्लिट्ज की सराहना
जीएसटी काउंसिल और उसकी अध्यक्ष, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण — विज्ञप्ति में इरादे नहीं, धाराएं, तारीखें और रुपये की सीमाएं लिखी गईं।
आंकड़े “57वीं GST काउंसिल की सिफारिशें”, वित्त मंत्रालय, पीआईबी, 8 अक्टूबर 2026 (Release ID 2320934) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीआईसी) इन सिफारिशों की अधिसूचनाओं का कैलेंडर एक जगह छापे, हर सिफारिश के आगे तारीख के साथ। तब कारोबारी को पता रहेगा कि 10,000 रुपये का फर्श और 10 दिन की रिफंड-घड़ी किस दिन से चलेगी।
रांची में ₹119 करोड़ की कृषि प्रयोगशाला
रांची, 9 अक्टूबर। रांची के गढ़खटंगा में आईसीएआर के भारतीय कृषि जैव-प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएबी) में 119 करोड़ रुपये की सुविधाओं का उद्घाटन हुआ। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो से यह उद्घाटन किया। कृषि मंत्रालय ने इसकी विज्ञप्ति 8 अक्टूबर 2026 को रात 8:37 बजे पीआईबी पर जारी की। नई सुविधाओं में प्रशासन-और-स्कूल भवन, बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय हॉल, जयपाल सिंह मुंडा खेल परिसर और अगली पीढ़ी की नस्ल-सुधार सुविधा है। नए अतिथि-गृह की नींव भी रखी गई। विज्ञप्ति 119 करोड़ का बंटवारा नहीं बताती।
किसानों के लिए दिन का असली हिस्सा बीज और खाद थे। रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ के करीब 1,500 किसानों को नैनो यूरिया और नैनो डीएपी दिए गए। साथ में गेहूं, मटर, सरसों और सब्जियों के बीज-किट मिले। मात्रा विज्ञप्ति में नहीं है। कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और आईसीएआर के महानिदेशक एम.एल. जाट मौजूद थे।
नकली बीज से बचाव
मंत्री ने वैज्ञानिकों से कहा कि तकनीक “प्रयोगशाला से खेत तक” पहुंचे। उन्होंने किसानों को नकली बीज, नकली खाद और घटिया कीटनाशक से बचाने की बात कही। देश भर में “खेत बचाओ अभियान” चलाने को कहा। आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डी.के. यादव ने कहा कि शोध किसान की जरूरत के हिसाब से हो, ताकि तकनीक आखिरी किसान तक पहुंचे। संस्थान के निदेशक सुजय रक्षित ने धन्यवाद दिया। संस्थान डेयरी फार्म, फसल अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र, एकीकृत खेती इकाई और पशुओं में भ्रूण-प्रत्यारोपण पर काम करता है।
भारत को क्या मिला
एक आदिवासी जिले में नस्ल-सुधार की सुविधा। यहां की फसलें — ऊपरी जमीन का धान, मोटे अनाज, दालें — देश के बीज-शोध के पैसे से सबसे दूर रही हैं।
एक नजर में
•नई सुविधाएं : 119 करोड़ रुपये (बंटवारा नहीं बताया गया)
•किसान : करीब 1,500 — रांची, खूंटी, गुमला, रामगढ़
•बांटा गया : नैनो यूरिया, नैनो डीएपी; गेहूं, मटर, सरसों, सब्जी के बीज-किट (मात्रा नहीं बताई गई)
•सुविधाएं : प्रशासन-स्कूल भवन, बिरसा मुंडा हॉल, जयपाल सिंह मुंडा खेल परिसर, नेक्स्टजेन नस्ल-सुधार सुविधा; अतिथि-गृह की नींव।
तुलना
•जिले जहां से किसान आए : 4 — 100%
किसान प्रति जिला, •औसतन : 375
हर जिले से औसतन 375 किसान, अगर चारों से बराबर आए हों — विज्ञप्ति जिलेवार गिनती नहीं देती।
हमारा हिसाब
1,500 ÷ 4 = 375 किसान प्रति जिला। 119 करोड़ ÷ 1,500 = 7.9 लाख रुपये प्रति किसान — यह हिसाब बेमानी है, क्योंकि इमारतें किसानों में नहीं बंटतीं; इसलिए कार्ड पर नहीं रखा गया।
भारत को क्या मिला
झारखंड के किसान के गांव के पास नस्ल-सुधार की प्रयोगशाला, और नकली बीज के खिलाफ मंत्री का खुला संकल्प।
ब्लिट्ज की सराहना
आईसीएआर-आईआईएबी रांची के निदेशक सुजय रक्षित और उनकी टीम — उद्घाटन के साथ 1,500 किसानों को बीज और खाद थमाए गए, सिर्फ फीता नहीं काटा गया।
आंकड़े कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की विज्ञप्ति, पीआईबी से pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
आईसीएआर -आईआईएबी 119 करोड़ रुपये का सुविधा-वार बंटवारा अपनी साइट पर छापे। नस्ल-सुधार सुविधा में पहली फसल का नाम भी। तब किसान जान सकेगा कि यह पैसा उसके खेत तक किस रास्ते आएगा।
ब्लिट्ज ब्यूरो
समुद्र में 3.23 लाख भारतीय, महिलाएं 7,033
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर। समुद्र पर नौकरी करने वाले भारतीय बारह साल में 1.27 लाख से बढ़कर 3.23 लाख हो गए हैं। 2015 में भारत नाविक देने वाले देशों में पांचवें नंबर पर था, अब दूसरे नंबर पर है। दुनिया के 12 फीसदी से ज्यादा नाविक भारतीय हैं। यह बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने नई दिल्ली में सागरमंथन संवाद में कहा। मंत्रालय ने विज्ञप्ति 8 अक्टूबर को शाम 7:58 बजे पीआईबी पर जारी की। ब्लिट्ज के हिसाब से यह 2.54 गुना बढ़त है — 1.96 लाख और भारतीय समुद्र पर कमा रहे हैं।
महिलाओं का आंकड़ा छोटा है, पर चढ़ाई तेज है। सक्रिय महिला नाविक 2021 में 1,599 थीं, 2025 में 7,033 — चार साल में 4.4 गुना। मंत्रालय का “मिशन 20%” 2030 तक पांचवां हिस्सा महिलाओं का चाहता है। 7,033 को 3.23 लाख से भाग दें, तो आज का हिस्सा 2.18 फीसदी है। लक्ष्य इसका 9.2 गुना है। विज्ञप्ति यह नहीं कहती; यही फासला मिशन की नाप है।

बंदरगाह माल से आगे बढ़े
बारह साल में बंदरगाहों की क्षमता 1,561 से बढ़कर 2,817 मिलियन टन सालाना हो गई, यानी 80.5 फीसदी ऊपर। माल 1,052 से 1,668 मिलियन टन हुआ, 58.6 फीसदी ऊपर। दोनों को भाग दें तो इस्तेमाल 67.4 फीसदी से घटकर 59.2 फीसदी रह गया है। मतलब, भारत ने माल आने से पहले घाट बना लिए। बढ़ते कारोबार वाला देश यही करता है। नदी-जलमार्ग पर माल 29 से 218 मिलियन टन हुआ, 7.5 गुना। कंटेनर जहाज के बंदरगाह पर रुकने का औसत समय 35 घंटे से 23 घंटे हो गया, 34.3 फीसदी कम। शिपिंग कंपनी किसी बंदरगाह को अपने रूट में जोड़ने से पहले यही आंकड़ा देखती है।
सात देशों के मंत्री
बेल्जियम के फ्लैंडर्स, भूटान, ग्रीस, लिथुआनिया, मोजाम्बिक और म्यांमार के मंत्री आए। सऊदी बंदरगाह प्राधिकरण (मवानी) का दल भी। विज्ञप्ति के मुताबिक 70 से ज्यादा देश, 10 मंत्री और 100 से ज्यादा प्रकाशन इस बार थे। 2024 में 61 देशों के 1,700 प्रतिनिधि थे। वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह ने एंटवर्प-ब्रुग्स बंदरगाह से करार किया। जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह ने क्लाइपेडा बंदरगाह के साथ काम की योजना आगे बढ़ाई। शिपयार्ड और आईटीआई के बीच 150 घंटे की ट्रेनिंग और रेटिंग-कैटरिंग प्रशिक्षुओं के लिए छह महीने का जहाज पर कार्यक्रम — समुद्र तक पहुंचने के ये रास्ते मंत्रालय ने गिनाए।
भारत को क्या मिला
पहले ही आंकड़े में है। 3.23 लाख भारतीय, जिनकी कमाई डॉलर में होती है और खर्च केरल, गोवा, ओडिशा और पूर्वोत्तर में।
एक नजर में
•भारतीय नाविक : बारह साल में 1.27 लाख से 3.23 लाख; 5वां (2015) से 2रा स्थान; दुनिया के 12% से ज्यादा
•महिला नाविक : 1,599 (2021) से 7,033 (2025); मिशन 20%, 2030 तक
•बंदरगाह क्षमता : 1,561 से 2,817 एमटीपीए · माल : 1,052 से 1,668 मिलियन टन · •नदी-जलमार्ग : 29 से 218 मिलियन टन
•कंटेनर जहाज का औसत रुकाव : 35 घंटे से 23 घंटे
तुलना
•क्षमता में बढ़त : 80.5% — बड़ी बढ़त, 100%
•माल में बढ़त : 58.6% — क्षमता की बढ़त का 73%
क्षमता माल से 21.9 अंक तेज बढ़ी, इसलिए इस्तेमाल 67.4% से 59.2% पर आया।
हमारा हिसाब
3.23 ÷ 1.27 = 2.54। 7,033 ÷ 1,599 = 4.4। 7,033 ÷ 3,23,000 = 2.18%; 20 ÷ 2.18 = 9.2। 1,052 ÷ 1,561 = 67.4%; 1,668 ÷ 2,817 = 59.2%। (35 − 23) ÷ 35 = 34.3%। सब ब्लिट्ज का हिसाब।
भारत को क्या मिला
बारह साल में करीब दो लाख और भारतीय समुद्र पर रोजगार में, और बंदरगाह जिनमें बढ़ने की जगह है।
ब्लिट्ज की सराहना
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय — महिलाओं का आंकड़ा आधार-वर्ष के साथ दिया, बिना आधार के फीसदी नहीं।
आंकड़े बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की सागरमंथन 2026 विज्ञप्ति, पीआईबी,(8 अक्टूबर) से। pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
नौवहन महानिदेशालय हर साल महिला नाविकों की गिनती एक तारीख वाले पन्ने पर छापे, ताकि मिशन 20% को 2.18 फीसदी के सामने नापा जा सके, याद न रखना पड़े।
28,700 पंचायतें फाइबर पर, 35,771 गांव टावर पर
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर। गांव के मोबाइल टावर की गिनती यह है। डिजिटल भारत निधि से 31 अगस्त 2026 तक 25,367 टावर चालू हुए। ये 35,771 गांवों और बस्तियों को कवर करते हैं। यानी हर टावर पर औसतन 1.41 बस्तियां, ब्लिट्ज के हिसाब से। संशोधित भारतनेट कार्यक्रम में अगस्त 2026 तक 55,780 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाया गया और 28,700 ग्राम पंचायतें जोड़ी गईं। हर पंचायत पर 1.94 किलोमीटर केबल। कार्यक्रम का लक्ष्य 1.5 करोड़ फाइबर कनेक्शन है। ये आंकड़े दूरसंचार विभाग ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस में राज्यों के आईटी मंत्रियों और सचिवों की गोलमेज में रखे। संचार मंत्रालय ने विज्ञप्ति 8 अक्टूबर को शाम 5:40 बजे पीआईबी पर जारी की।
बैठक की अगुवाई संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने की। दूरसंचार सचिव अमित अग्रवाल ने आंकड़े रखे।

सड़सठ दिन या सात दिन
टावर कितनी जल्दी खड़ा होगा, यह “राइट ऑफ वे” यानी जमीन इस्तेमाल की इजाजत तय करती है। दूरसंचार (राइट ऑफ वे) नियम 2024 के तहत, जो 1 जनवरी 2025 से लागू हैं, आम आवेदन 67 दिन में निपटाना है। भारतनेट जैसी विशेष परियोजना का आवेदन 7 दिन में। यानी 89.6 फीसदी कम इंतजार। सभी 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश केंद्रीय आरओडब्ल्यू पोर्टल पर हैं। 34 ने अपनी नगरपालिकाओं और पंचायतों को इन नियमों पर चलने का आदेश दे दिया है। बाकी दो का नाम विज्ञप्ति में नहीं है। केंद्र ने 2026-27 के लिए राज्यों की पूंजी-निवेश सहायता योजना (एसएएससीआई) में इस काम के लिए 4,000 करोड़ रुपये रखे हैं।
भारत को क्या मिला
35,771 बस्तियों में से किसी एक का आदमी अब ब्लॉक तक पैदल नहीं जाएगा। वह घर बैठे जीएसटी रिटर्न भरेगा, पीएम-किसान की किस्त देखेगा, या दीक्षा पर पाठ पढ़ेगा।
एक नजर में
•संशोधित भारतनेट, अगस्त 2026 : •55,780 किमी फाइबर; 28,700 ग्राम पंचायतें; लक्ष्य 1.5 करोड़ कनेक्शन
•डिजिटल भारत निधि, 31 अगस्त 2026 : 25,367 टावर; 35,771 गांव और बस्तियां
•आरओडब्ल्यू नियम 2024 (1 जनवरी 2025 से) : आम आवेदन 67 दिन; विशेष परियोजना 7 दिन; 36 राज्य/यूटी पोर्टल पर; •34 के आदेश
एसएएससीआई 2026-27 : 4,000 करोड़ रुपये
तुलना
•आम आरओडब्ल्यू आवेदन : 67 दिन — 100%
•भारतनेट आवेदन : 7 दिन — आम घड़ी का 10.4%
भारतनेट की इजाजत आम इजाजत से 89.6% कम समय लेती है।
हमारा हिसाब
55,780 ÷ 28,700 = 1.94 किमी प्रति पंचायत। 35,771 ÷ 25,367 = 1.41 बस्तियां प्रति टावर। (67 − 7) ÷ 67 = 89.6%। ब्लिट्ज का हिसाब।
भारत को क्या मिला
अट्ठाईस हजार पंचायतें फाइबर पर, पैंतीस हजार गांव टावर के नीचे, और बाकी के लिए सात दिन की घड़ी।
ब्लिट्ज की सराहना
दूरसंचार सचिव अमित अग्रवाल — हर गिनती के साथ “किस तारीख तक” लिखा।
आंकड़े संचार मंत्रालय की डीओटी–राज्य गोलमेज विज्ञप्ति, पीआईबी , 8 अक्टूबर 2026 (रिलीज आईडी2320855) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
दूरसंचार विभाग उन दो राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों का नाम बताए, जिनकी स्थानीय निकायों को आरओडब्ल्यू नियमों का आदेश अभी नहीं मिला। तब अगली गोलमेज से पहले यह कमी भर सकेगी।
बीज कंपनियों से ₹9.68 करोड़ गांवों के हिस्से
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर। जिस गांव ने कोई देसी बीज बचाकर रखा, उसके बीज से कमाने वाली कंपनी को अब उसे पैसा देना होता है। जैव विविधता कानून 2002 (2023 में संशोधित) का यही “पहुंच और लाभ-साझा” ढांचा है। इसके तहत राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) को 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच 9.68 करोड़ रुपये मिले। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने यह विज्ञप्ति 8 अक्टूबर 2026 को रात 8:18 बजे पीआईबी पर जारी की। इसमें 9.56 करोड़ रुपये जैविक संसाधनों तक पहुंच के लिए थे और 11.24 लाख रुपये पेटेंट जैसे बौद्धिक संपदा आवेदनों के साथ आए।
तीन-चौथाई पैसा बीज से आया। कृषि क्षेत्र ने 7.16 करोड़ रुपये दिए — पहुंच की रकम का 74.9 फीसदी, ब्लिट्ज के हिसाब से। खाद्य और पेय से 1.59 करोड़, पशुपालन से 62.01 लाख, आयुष से 21 लाख, लाल चंदन से 6 लाख और सौंदर्य प्रसाधन से 4 लाख रुपये आए। सबसे ज्यादा ईस्ट-वेस्ट सीड इंडिया ने दिए, कई किस्तों में करीब 2.01 करोड़ रुपये। एक बार में सबसे बड़ी रकम सिनर्जिया लाइफ साइंसेज की 1.17 करोड़ रुपये थी। नुनहेम्स इंडिया ने करीब 1.64 करोड़ रुपये अग्रिम दिए। टाटा केमिकल्स ने 52.06 लाख, इंडेना इंडिया ने 45.89 लाख, ग्रो इंडिगो ने 45.79 लाख, नोवोजाइम्स साउथ एशिया ने 44.11 लाख और नोंगवू सीड इंडिया ने 40.53 लाख रुपये दिए। देने वाले भारत के अलावा श्रीलंका, जर्मनी, फ्रांस, कोरिया और भूटान से हैं।
278 करोड़ आए, 200 करोड़ बंटे
2008 से अब तक इस ढांचे से करीब 278 करोड़ रुपये आए हैं। उनमें से 200 करोड़ से ज्यादा — 71.9 फीसदी — राज्य जैव विविधता बोर्डों के रास्ते बंटे हैं। यह पैसा संरक्षण, गांव के “जन जैव विविधता रजिस्टर”, जैव विविधता प्रबंधन समितियों, शोध और स्थानीय समुदायों के लाभ पर खर्च होता है। समुदाय का हिस्सा कितना, इसका कोई फॉर्मूला विज्ञप्ति में नहीं है। छह महीने को इतिहास के सामने रखें तो रफ्तार बढ़ी है। 18 साल में 278 करोड़ का मतलब 15.4 करोड़ रुपये सालाना। छह महीने के 9.68 करोड़ का मतलब 19.4 करोड़ सालाना, यानी एक चौथाई ज्यादा।
भारत को क्या मिला
सिद्धांत रुपये में बदला। जर्मनी या कोरिया की बीज कंपनी भारतीय देसी किस्म से नई किस्म बनाती है, तो उस गांव को पैसा देती है जिसने किस्म बचाई — और बही-खाता सबके सामने है।
एक नजर में
एबीएस वसूली, 1 अप्रैल–30 सितंबर 2026 : 9.68 करोड़ रुपये; संसाधनों तक पहुंच 9.56 करोड़; आईपीआर आवेदन 11.24 लाख
क्षेत्रवार : कृषि 7.16 करोड़; खाद्य-पेय 1.59 करोड़; पशुपालन 62.01 लाख; आयुष 21 लाख; लाल चंदन 6 लाख; सौंदर्य प्रसाधन 4 लाख
2008 से : करीब 278 करोड़ रुपये आए; 200 करोड़ से ज्यादा बंटे
तुलना
•कृषि : 7.16 करोड़ रुपये — सबसे बड़ा क्षेत्र, 100%
•खाद्य-पेय : 1.59 करोड़ रुपये — सबसे बड़े का 22%
•पशुपालन : 62.01 लाख रुपये — सबसे बड़े का 8.7%
•बीज और फसल वाले, खाद्य-पेय उद्योग से 4.5 गुना ज्यादा देते हैं।
हमारा हिसाब
7.16 ÷ 9.56 = 74.9%। 200 ÷ 278 = 71.9%। 278 ÷ 18 = 15.4 करोड़ रुपये सालाना; 9.68 × 2 = 19.4 करोड़; 19.4 ÷ 15.4 = 1.26। ब्लिट्ज का हिसाब।
भारत को क्या मिला
अपने आनुवंशिक संसाधनों की कीमत, जो पांच देशों की कंपनियां चुकाती हैं, और जिसका सात-दसवां हिस्सा आगे पहुंच चुका है।
ब्लिट्ज की सराहना
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण — पैसा देने वालों के नाम और रकम छापी।
आंकड़े पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एनबीए वसूली विज्ञप्ति, पीआईबी , 8 अक्टूबर 2026 (रिलीज आईडी 2320995) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण अगली छमाही की वसूली के साथ एक अलग पंक्ति छापे : जैव विविधता प्रबंधन समितियों तक कितना पहुंचा। तब “200 करोड़ से ज्यादा बंटे” गांव के खाते की रकम की तरह पढ़ा जा सकेगा।














