मुंबई, 7 अक्टूबर। आपकी होम लोन की किस्त थोड़ी बढ़ सकती है। रिजर्व बैंक ने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया है। मौद्रिक नीति समिति ने 5 से 7 अक्टूबर की बैठक में यह फैसला एकमत से लिया, और अपना रुख भी बदलकर “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” यानी नाप-तौलकर सख्ती का कर दिया। यह जानकारी गवर्नर के 7 अक्टूबर के बयान (आरबीआई प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/1266) में है।
पर इसी बयान में एक अच्छी खबर भी है। गवर्नर ने इस साल की ग्रोथ का अनुमान 40 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया। मतलब साफ है, अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है कि थोड़ा महंगा कर्ज झेल सकती है। चिंता उत्पादन की नहीं, कीमतों की है।
कीमतें क्यों चुभ रही हैं
खुदरा महंगाई अगस्त में 4.8 फीसदी रही, जुलाई में 4.5 फीसदी थी। खाने-पीने की चीजें और ईंधन इसके पीछे हैं। खाना और ईंधन हटाकर देखें तो कोर महंगाई 4.2 फीसदी पर पहुंची, जो तीन महीने से 3.9 पर टिकी थी। समिति को अगले तीन तिमाहियों में महंगाई औसतन करीब 5.8 फीसदी रहने का अंदेशा है।
असली कहानी कच्चे तेल की है। भारतीय बास्केट का कच्चा तेल जुलाई में 82.0 डॉलर प्रति बैरल था, अगस्त में 90.2 और सितंबर में 116.1 डॉलर। बयान में पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल का यह आंकड़ा दर्ज है। दो महीने में 41.6 फीसदी की छलांग, यह हिसाब ब्लिट्ज ने बयान के आंकड़ों से लगाया है। वजह, सितंबर में पश्चिम एशिया का झगड़ा फिर भड़कना।
रसोई में भी असर दिखा
चीनी जुलाई की शुरुआत से अगस्त के आखिर तक करीब 34 फीसदी चढ़कर 64 रुपये किलो हुई, फिर सितंबर में नरम पड़ी। सरकार ने निर्यात पर रोक, स्टॉक की सीमा और 10 लाख टन कच्ची चीनी के बिना शुल्क आयात जैसे कदम उठाए। प्याज जून के आखिर से सितंबर के आखिर तक करीब 85 फीसदी महंगा हुआ। मानसून सामान्य से 13 फीसदी कम बरसा।
आगे क्या, कटौती नहीं
बयान साफ कहता है कि निकट भविष्य में दर घटाने की बात मेज से हट गई है। आगे या तो दर बढ़ेगी या ठहरेगी। कितनी बढ़ेगी, यह महंगाई के फैलाव, तेल के झटके के दूसरे असर और मांग पर टिका है।
अनुमान ये हैं। इस वित्त वर्ष खुदरा महंगाई 5.2 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.0 और चौथी में 5.7 फीसदी। ग्रोथ 7.1 फीसदी, दूसरी तिमाही 7.2, तीसरी 6.9 और चौथी 6.8 फीसदी। अप्रैल-जून में अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी बढ़ी थी।
जमीन पर क्या चल रहा
ग्रोथ बढ़ाने के पीछे आंकड़े हैं। जुलाई-अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन 8.6 फीसदी बढ़ा, पहली तिमाही में 6.9 था। बंदरगाहों पर माल 8.6 फीसदी, रेल माल ढुलाई 7.1 और डीजल की खपत 8.5 फीसदी बढ़ी। सीमेंट 12.6 फीसदी। निर्यात 22.8 फीसदी बढ़कर 88.1 अरब डॉलर, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात 71.6 फीसदी उछला।
बैंक कर्ज 15 सितंबर को सालाना 18.1 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा था, पिछले साल 10.4 थी। विदेशी निवेश अप्रैल-अगस्त में 13.8 अरब डॉलर आया, पिछले साल 9.6 अरब था। विदेशी मुद्रा भंडार 2 अक्टूबर को 734.6 अरब डॉलर, करीब 11 महीने के आयात के बराबर।
दो और फैसले साथ आए। अकाउंट एग्रीगेटर आपस में जुड़ेंगे, ताकि एक ही जगह से सारी वित्तीय जानकारी मिले, और डिपॉजिटरी के खाते-विवरण में बैंक जमा भी दिखेगी, 31 दिसंबर 2026 तक। वित्तीय बाजारों के लिए एक तकनीकी सलाहकार समिति बनेगी।
भारत को क्या मिला
7 फीसदी की ग्रोथ के बीच दर बढ़ाने की हिम्मत रुपये की खरीद-शक्ति बचाने की हिम्मत है। तेल का झटका अगर मजदूरी और दामों में बैठ गया, तो वही रास्ता है जिसने 2010-13 के साल खराब किए थे। बयान का अपना आंकड़ा है कि 37 फीसदी चीजें 4 फीसदी से ऊपर महंगी हो रही हैं। यही जल्दी कदम उठाने की वजह है। और यही भरोसा भी कि यह दौर छोटा रह सकता है।
एक नजर में रेपो रेट :
• 5.50%, 25 बेसिस पॉइंट ऊपर ग्रोथ •2026-27 : 7.1%, 40 बेसिस पॉइंट ऊपर •खुदरा महंगाई 2026-27 : 5.2%; अगली तीन तिमाहियां करीब 5.8% भारतीय •कच्चा तेल : जुलाई 82.0 डॉलर, सितंबर 116.1 डॉलर
•बैंक कर्ज की रफ्तार : 18.1%, 15 सितंबर 2026
तुलना
•कच्चा तेल, जुलाई : 82.0 डॉलर प्रति बैरल, आधार, 100%
•कच्चा तेल, अगस्त : 90.2 डॉलर, जुलाई का 110%
•कच्चा तेल, सितंबर : 116.1 डॉलर, जुलाई का 142% सितंबर का दाम जुलाई से 41.6% ज्यादा है।
हमारा हिसाब
25 बेसिस पॉइंट पूरा का पूरा ग्राहक तक पहुंचे, तो 50 लाख रुपये के 20 साल के होम लोन की किस्त 8.50% पर 43,391 रुपये से बढ़कर 8.75% पर 44,186 रुपये होगी। यानी 794 रुपये महीना, पूरे लोन में करीब 1.9 लाख रुपये।
ब्लिट्ज का हिसाब
शुरुआती दर हमारी मान्यता है, किसी बैंक की नहीं।
भारत को क्या मिला
7% ग्रोथ के बीच जल्दी कदम, ताकि तेल का झटका मजदूरी-दाम के चक्र में न बदले।
ब्लिट्ज की सराहना
मौद्रिक नीति समिति की, अपनी सीमा खुद मानने के लिए, कि दूसरे दौर के असर “दिखने में वक्त लेते हैं और आंकड़ों से निकालना मुश्किल है”।
आंकड़े आरबीआई गवर्नर के बयान, 7 अक्टूबर 2026 से; rbi.org.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह।
बयान बताता है कि जुलाई-अगस्त में नए कर्ज की दरें 8 बेसिस पॉइंट चढ़ीं, पर नई जमा की दरें 28 गिरीं। बैंक आज की बढ़त जमाकर्ताओं तक उतनी ही ईमानदारी से पहुंचाएं जितनी कर्जदारों तक। आरबीआई यह अंतर हर महीने सार्वजनिक करे, तो काम तेज होगा।
ब्लिट्ज स्पेशल
मंझोली कंपनियों को 10,000 करोड़ की पूंजी
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर। छोटी फैक्ट्री को बड़ा बनाने के लिए अब बैंक के कर्ज के अलावा एक और रास्ता खुलेगा। केंद्रीय कैबिनेट ने 6 अक्टूबर को एसएमई ग्रोथ फंड के लिए सरकार की 10,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता को मंजूरी दी। यह फंड छोटे और मझोले उद्यमों में सीधे हिस्सेदारी खरीदेगा। जानकारी कैबिनेट के फैसले (पीआईबी रिलीज 2319532) में है, जिसका वादा बजट 2026-27 के पैरा 28 में था।

कमी कहां थी, यह फैसला खुद बताता है
मौजूदा सरकारी इक्विटी फंड ज्यादातर शुरुआती और सूक्ष्म उद्यमों पर हैं। अप्रैल 2025 से लागू परिभाषा में छोटा उद्यम वह है जिसमें 25 करोड़ तक निवेश और 100 करोड़ तक कारोबार हो; मझोला, 125 करोड़ निवेश और 500 करोड़ कारोबार तक। ऐसी कंपनी जो नया प्लांट लगाना या विदेश जाना चाहे, उसके पास अब तक कर्ज के सिवा कुछ नहीं था। फंड का बड़ा हिस्सा मैन्युफैक्चरिंग को जाएगा, और टियर-2, टियर-3 शहरों के औद्योगिक क्लस्टर नजर में हैं।
उसी शाम के पीआईबी बैकग्राउंडर (रिलीज 2319775) में सेक्टर का आकार है। आर्थिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक एमएसएमई जीडीपी का 31.1 फीसदी, मैन्युफैक्चरिंग का 35.4 फीसदी और निर्यात का 48.58 फीसदी हैं। 6 अक्टूबर 2026 तक उद्यम और उद्यम असिस्ट पर करीब 9.78 करोड़ रजिस्ट्रेशन, जिनमें करीब 43.28 करोड़ रोजगार दर्ज हैं। यानी हर रजिस्टर्ड इकाई पर 4.4 नौकरियां, यह ब्लिट्ज का हिसाब है। 37.6 फीसदी उद्यम महिलाओं के हैं।
अभी यह नहीं बताया गया कि फंड कौन चलाएगा और कंपनी आवेदन कैसे करेगी।
भारत को क्या मिला
बैंक कर्ज और शेयर बाजार के बीच की जो सीढ़ी गायब थी, वह अब बनेगी। कुछ सौ कंपनियां भी इस पैसे से निर्यात लायक बन गईं, तो यह फंड अपना काम कर गया।
ब्लिट्ज की सलाह
फंड की निवेश नीति और मैनेजर का चुनाव इसी तिमाही में सार्वजनिक हो, ताकि पैसा अगले बजट से पहले फैक्ट्रियों तक पहुंचे।
सड़क, रेल, बंदरगाह की एक योजना
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर। देश की सड़कें, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे, जलमार्ग और शहरों का ट्रांसपोर्ट पहली बार एक राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनेंगे। कैबिनेट ने 6 अक्टूबर को इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी बनाने को मंजूरी दी, जो दस साल या उससे लंबा नेशनल ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान तैयार करेगी (पीआईबी रिलीज 2319529)।

अथॉरिटी के पास दो ताकतें होंगी
केंद्र सरकार की 500 करोड़ रुपये या उससे बड़ी हर बुनियादी ढांचा परियोजना की तकनीकी जांच यही करेगी, पैसे की जांच पुरानी व्यवस्था से होती रहेगी। और मंजूरी के बाद उन परियोजनाओं पर नजर रखेगी, बनने के बाद असर आंकेगी। जीएसटी के ई-वे बिल, फास्टैग, वाहन रजिस्टर, जीपीएस और शहरों के ट्रैफिक सिस्टम का डेटा एक जगह जमा होगा। तब माल कहां से कहां जा रहा है, यह अंदाजे से नहीं, आंकड़ों से पता चलेगा।
भारत को क्या मिला
हर मंत्रालय अपना नेटवर्क अलग बनाता रहा, और उनके बीच की दरारों में ही माल ढुलाई का खर्च बैठा है। एक ही जगह जांच से वह दरार पैसा खर्च होने से पहले दिखेगी।
कोरापुट में 2,000वां विमान इंजन तैयार
कोरापुट, 7 अक्टूबर। ओडिशा के कोरापुट में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की फैक्ट्री ने 6 अक्टूबर को अपना 2,000वां विमान इंजन सौंपा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसी मौके पर शक्ति हेलीकॉप्टर इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन की घोषणा की। जानकारी रक्षा मंत्रालय (पीआईबी रिलीज 2319668) की है। यह फैक्ट्री 1964 में बनी थी, यानी 62 साल में औसतन करीब 32 इंजन सालाना, यह ब्लिट्ज का हिसाब है।
आंकड़े ये हैं
सुखोई-30 के एएल-31एफपी इंजन की सालाना क्षमता 30 से बढ़कर 50 होगी, इस पर 335 करोड़ रुपये लगेंगे। शक्ति इंजन की दूसरी लाइन पर 218 करोड़ रुपये, जो ध्रुव और प्रचंड हेलीकॉप्टरों के लिए साल में 100 इंजन तक बनाएगी और 2028-29 तक पूरी तैयार होगी। 2024 के 240 इंजनों के ऑर्डर में दूसरे साल के आखिर तक 60 देने थे, एचएएल ने 63 दिए। फैक्ट्री अब तक 9,000 से ज्यादा इंजनों की ओवरहॉलिंग कर चुकी है।
इनके पीछे एक बड़ा आंकड़ा है। स्वदेशी हाई-थ्रस्ट इंजन कार्यक्रम पर करीब 5,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव, जो एएमसीए लड़ाकू विमान के लिए है। कच्चा माल मिश्र धातु निगम देगा, और देश की पहली स्वदेशी हाई-थ्रस्ट इंजन टेस्ट सुविधा बनेगी।
भारत को क्या मिला
जिस विमान का इंजन अपना नहीं, वह विमान लाइसेंस पर है। दो लाइनों पर साल में 150 इंजन, और अपने इंजन का टेस्ट बेड, यही फर्क है हवाई ताकत जोड़ने और उसका मालिक होने में।
विशाखापत्तनम में पहला स्वदेशी सप्लाई जहाज
विशाखापत्तनम, 7 अक्टूबर। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने 6 अक्टूबर को ‘सूर्य’ को पानी में उतारा। यह देश में डिजाइन और निर्मित पहला फ्लीट सपोर्ट शिप है, जो समुद्र में युद्धपोतों तक ईंधन, पानी, राशन और गोला-बारूद पहुंचाता है। उसी दिन इस श्रेणी के पांचवें जहाज की नींव रखी गई। जानकारी रक्षा मंत्रालय (पीआईबी रिलीज 2319481) की है।

शिपयार्ड को नया स्लिपवे भी मिला, जिस पर 45,000 टन तक के जहाज बन सकेंगे, और 300 टन की गोलियथ क्रेन, जो एल एंड टी जियोस्ट्रक्चर ने कोनक्रेन्स के साथ बनाई। रक्षा मंत्री ने याद दिलाया कि आजाद भारत का पहला जहाज ‘जल ऊषा’ 1948 में यहीं बना था। उन्होंने कहा कि अब कसौटी आत्मनिर्भरता नहीं है। कसौटी दुनिया के बेहतरीन शिपयार्डों से लागत और समय पर मुकाबला है।
उसी दिन मंत्रालय ने ब्रह्मोस एयरोस्पेस से 661.50 करोड़ रुपये का करार किया। यह नौसेना के जहाजों के फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर के लिए है, और इसमें कम से कम 68 फीसदी सामान देसी होगा (रिलीज 2319502)।
भारत को क्या मिला
जो नौसेना समुद्र में अपने जहाजों से ही रसद पा सके, वह हिंद महासागर में किसी से पूछे बिना टिक सकती है।
ई-संजीवनी पर 50 करोड़ मरीज
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर। गांव से शहर के अस्पताल तक की दौड़ अब फोन पर सिमट रही है। सरकारी टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी ने 15 सितंबर 2026 को 50 करोड़ परामर्श पूरे कर लिए, ठीक-ठीक 50,00,92,730, और यह सभी 36 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही है। जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय (पीआईबी रिलीज 2319427) की है।

कौन इस्तेमाल कर रहा है, यह कुल से ज्यादा बताता है। 57.14 फीसदी परामर्श महिलाओं के हैं। 40.15 फीसदी 46 साल से ऊपर के लोगों के, जिनमें 16.25 फीसदी 60 पार के बुजुर्ग। सेवा 1.42 लाख से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, 19,473 हब और 901 ऑनलाइन ओपीडी से चलती है, 2,41,923 डॉक्टर-स्वास्थ्यकर्मी जुड़े हैं, 15 भाषाओं में। रोज करीब 2.5 से 3 लाख परामर्श होते हैं; सबसे व्यस्त दिन 6,30,315, यानी औसत का दो से ढाई गुना, यह ब्लिट्ज का हिसाब है। अब डॉक्टर की मदद के लिए एआई आधारित सिस्टम जुड़ा है, जिसे ई-गवर्नेंस के राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 में स्वर्ण मिला, और बड़े सरकारी संस्थानों के विशेषज्ञों की ओपीडी भी।
भारत को क्या मिला
जिस परामर्श पर बस का किराया और एक दिन की मजदूरी जाती थी, अब दोनों बचते हैं। महिलाएं और बुजुर्ग ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, यही असली बात है, क्योंकि अस्पताल तक का सफर इन्हीं के लिए सबसे भारी था।
रोजगार योजना में अब 375 काम
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर। गांव में मजदूरी के बदले अब कोल्ड स्टोरेज, मंडी, डेयरी शेड और पॉली-हाउस भी बन सकेंगे। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) कानून, 2025 के तहत 375 मान्य कामों की सूची अधिसूचित की है। पहले 266 काम थे, यानी 41 फीसदी की बढ़ोतरी। जानकारी मंत्रालय (पीआईबी रिलीज 2319426) की है।

सूची चार हिस्सों में है। जल सुरक्षा के 128 काम, गांव के बुनियादी ढांचे के 111, आजीविका के 98 और आपदा से बचाव के 38। बदलाव तीसरे हिस्से में है। आजीविका के काम, जैसे ग्रेडिंग-पैकिंग यूनिट, मिनी आटा चक्की, स्वयं सहायता समूहों के वर्कशेड, अब सूची का 26 फीसदी हैं, पहले 1.1 फीसदी थे। हर काम ग्राम सभा से मंजूर विकसित ग्राम पंचायत योजना से शुरू होगा। ऊंचे पहाड़ों के लिए बर्फ के स्तूप और कृत्रिम ग्लेशियर भी सूची में हैं।
भारत को क्या मिला
जो मजदूरी पीछे एक कोल्ड स्टोर या मंडी छोड़ जाए, वह मस्टर रोल बंद होने के बाद भी कमाती रहती है।
स्टील खपत बढ़ी, सरिया 21% महंगा
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर। घर बनाने वालों के लिए सरिया एक साल में 21 फीसदी महंगा हो गया है। इस्पात मंत्रालय की 6 अक्टूबर की छमाही समीक्षा (पीआईबी रिलीज 2319469) के मुताबिक 10 मिमी टीएमटी सरिया सितंबर में चार महानगरों में औसतन 65,298 रुपये टन था। यह अगस्त से 12.6 फीसदी और पिछले साल से 21.0 फीसदी ऊपर है। हॉट रोल्ड कॉइल 76,085 रुपये टन, सालाना 26.8 फीसदी ऊपर।
खपत भी तेज है
अप्रैल-सितंबर में देश ने 84.9 मिलियन टन तैयार स्टील इस्तेमाल किया, पिछले साल से 7.5 फीसदी ज्यादा, जबकि कच्चे स्टील का उत्पादन 2.9 फीसदी बढ़कर 85.1 मिलियन टन रहा। तैयार स्टील का उत्पादन 81.8 मिलियन टन था, यानी खपत उत्पादन से 3.1 मिलियन टन ज्यादा, यह ब्लिट्ज का हिसाब है। कमी आयात से पूरी हुई, भारत मात्रा में शुद्ध आयातक रहा। मंत्रालय स्टील उद्योग सुरक्षा परिषद बनाएगा।
भारत को क्या मिला
छह महीने में स्टील की खपत 7.5 फीसदी बढ़ना देश में निर्माण और कारखानों का सबसे सच्चा पैमाना है। दाम उसी मांग की कीमत हैं।
स्विस रिसर्च साझेदारी को 4.5 करोड़ फ्रैंक
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर। स्विट्जरलैंड ने भारत के साथ साझा रिसर्च के लिए 4.5 करोड़ स्विस फ्रैंक अलग रखे हैं। स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन ने 6 अक्टूबर को नई दिल्ली में विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह से मुलाकात में यह बताया। जानकारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (पीआईबी रिलीज 2319563) की है।

बैठक में भारत-स्विस रिसर्च फ्रेमवर्क और साझा वैज्ञानिक बोर्ड आगे बढ़े। स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन और डीएसटी के बीच आशय-पत्र, और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ अप्लाइड साइंसेज के साथ अमल का समझौता हुआ। दोनों देशों में विज्ञान समझौता 2003 से है। भारत ने एआई, क्वांटम, बायोटेक, अंतरिक्ष और गहरे समुद्र की रिसर्च को साझा काम के क्षेत्र बताया। स्विस राष्ट्रपति ने भारत को “तेजी से उभरती वैश्विक रिसर्च और विकास शक्ति” कहा।
भारत को क्या मिला
स्विस पैसा और स्विस प्रयोगशालाएं, पक्के ढांचे में, ठीक उन क्षेत्रों में जहां भारत के मिशनों को साझेदार चाहिए।
एशियाड में भारत के 85 पदक
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर। जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक चले 20वें एशियाई खेलों में भारत ने 85 पदक जीते, 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य। जानकारी पीआईबी के 6 अक्टूबर के बैकग्राउंडर (रिलीज 2319703) में है। 36 खेलों में 501 खिलाड़ी गए, जिनमें 300 से ज्यादा पहली बार एशियाई खेलों में उतरे।

•तीरंदाजी में पांच स्वर्ण, निशानेबाजी और मुक्केबाजी में तीन-तीन। •क्रिकेट, हॉकी और कबड्डी में दो-दो स्वर्ण। •पुरुष क्रिकेट टीम ने फाइनल में पाकिस्तान को 19 रन से हराया
•हॉकी टीम ने मलेशिया को 5-1 से हराकर खिताब बचाया। •एथलेटिक्स में सबसे ज्यादा 24 पदक आए, पर स्वर्ण सिर्फ एक। कुल पदकों में स्वर्ण का हिस्सा 24.7 फीसदी, यह ब्लिट्ज का हिसाब है। •बजट 2026-27 में खेलों को 4,479.88 करोड़ रुपये मिले •2013-14 में 1,219 करोड़ थे।
•खेलो इंडिया की नई योजना 2030-31 तक महासंघों समेत 36,441 करोड़ रुपये की है। एशियाई पैरा खेल इसी शहर में 18 से 24 अक्टूबर तक होंगे।
भारत को क्या मिला
नए खिलाड़ियों से भरी टीम के 85 पदक आने वाले सालों का इशारा है। एथलेटिक्स का एक स्वर्ण बताता है कि अगले चार साल का पैसा कहां जाना चाहिए।
दो ब्लैक होल पर दस साल की नजर
नैनीताल, 7 अक्टूबर। नैनीताल की आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) की अगुआई में दुनिया भर की दो दर्जन दूरबीनों ने दस साल तक एक अनोखी आकाशगंगा ओजे 287 पर नजर रखी। यह धरती से चार अरब प्रकाश वर्ष दूर है और इसके केंद्र में दो विशाल ब्लैक होल हर बारह साल में एक-दूसरे का चक्कर लगाते हैं। जानकारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (पीआईबी रिलीज 2319522) की है। अध्ययन का नेतृत्व एरीज
के डॉ. आलोक सी. गुप्ता ने किया, और यह द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल सप्लीमेंट सीरीज, खंड 286, 2026 में छपा है (डीओआई 10.3847/1538-4365/एई8795)।
ओजे 287 एक ब्लेजर है, यानी ऐसी आकाशगंगा जिसकी प्लाज्मा की धारा सीधे धरती की ओर है। हर चक्कर में इसकी चमक दो बार उछलती है, यह पैटर्न 1988 में फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने 1880 तक के रिकॉर्ड से पहचाना था। 2015 से 2025 के इस अभियान ने चमक और रंग का अब तक का सबसे घना रिकॉर्ड बनाया। इससे दोनों ब्लैक होल की आपसी स्थिति अलग-अलग समय पर तय हो सकी। विभाग की विज्ञप्ति 18 देशों के 106 वैज्ञानिक गिनाती है, जर्नल में 138 लेखक हैं; दोनों गिनतियां अलग हैं और दोनों यहां दर्ज हैं।
भारत को क्या मिला
खगोल विज्ञान की 150 साल पुरानी पहेली पर दुनिया के काम का केंद्र नैनीताल में है। यह पैसा नहीं, हैसियत है।














