भोपाल। स्लीमनाबाद टनल कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों के लिए नई उम्मीद लेकर आ रही है। इससे विंध्य क्षेत्र में जल और सिंचाई की सुविधा बेहतर होगी। किसानों को फायदा मिलेगा, गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और क्षेत्र के विकास को भी रफ्तार मिलेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर और जल प्रबंधन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए कटनी जिले की बहुप्रतीक्षित स्लीमनाबाद टनल परियोजना में एक बड़ी सफलता दर्ज की गई है। बरणी डायवर्जन परियोजना के तहत बनाई जा रही करीब 12 किलोमीटर लंबी जल सुरंग की खुदाई अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीनों (टीबीएम) की मदद से पूरी की गई है। इसे देश की प्रमुख जल सुरंग परियोजनाओं में शामिल किया जा सकता है। करीब 1,600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली यह परियोजना जबलपुर स्थित बरुणी बांध से पानी को कटनी, रीवा, सतना, मेहर और फमा तक पहुंचने के लिए तैयार की गई है। टनल के पूरा होने से विंध्य क्षेत्र में सिंचाई के विस्तार के साथ पेयजल उपलब्धता और सामाजिक आर्थिक विकास को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
5 जिलों को मिलेगा नया जीवन
टनल के निर्माण से क्षेत्र में 5 जिलों को नया जीवन मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद विंध्य क्षेत्र लंबे समय से पानी की कमी से जूझता रहा है। इसका सीधा असर खेती और ग्रामीण आजीविका पर पड़ता रहा है। डॉ. यादव के मुताबिक , स्लीमनाबाद इस समस्या का स्थायी समाधान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
17 साल बाद मिली बड़ी सफलता
स्लीमनाबाद टनल को पूरा होने में करीब 17 साल का समय लगा है। इस दौरान सामने आई कई चुनौतियों का समाधान निकाला गया, उससे यह परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग का एक उल्लेखनीय उदाहरण बन गई।
कई हिस्सों में करीब 120 फीट जमीन के नीचे बनाई गई यह सुरंग राष्ट्रीय राजमार्गों, सक्रिय रेलों ट्रैक, भूमिगत यूटिलिटी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के नीचे से गुजरती है। इतनी जटिल परिस्थितियों के बावजूद ड्रिलिंग के दौरान महत्वपूर्ण बांधों को नुकसान से बचाया गया और पर्यावरणीय नुकसान रोका गया।
इसे अत्यधिक भूकंपीय गतिविधियों को झेलने में सक्षम बनाया गया है और इसका डिजाइन करीब 100 वर्षों की परिचालन अवधि को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे और स्थानांतरण की प्रक्रिया भी संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ पूरी की गई। अब यह परियोजना विंध्य क्षेत्र में दूध विकास और दीर्घकालिक समृद्धि की नई राह खोलने की ओर बढ़ रही है।
परियोजना के प्रमुख लाभ
सिंचाई क्षेत्र का विस्तार 2.5 लाख हेक्टेयर भूमि तक होने के बाद धरती पुत्रों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।
गांवों तक पानी
क्षेत्र के गांव में इतना पानी आएगा कि किसान वाह-वाह कर उठेंगे।
किसानों की आय को बढ़ावा
खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
बिजली उत्पादन की संभावना
विभिन्न स्थानों पर जलविद्युत उत्पादन की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
परियोजना की खासियतें
12 किमी लंबी स्लीमनाबाद टनल परियोजना
05 जिले करीब 2.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लाभ
1450 गांव स्थायी सिंचाई सुविधाओं से जुड़ेंगे














