नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेस नीति का समर्थन किया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ रक्षा करने के अधिकार का हवाला दिया। यूक्रेन युद्ध को वैश्विक संकट बताया और उल्लेख किया कि ब्रिक्स और यूएन को एक साथ चलाना चाहिए।
विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में संबोधन के दौरान आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से शांति को खतरा है। भारत की आतंकवाद पर जीरो टॉलरेस की नीति जारी रहेगी। पाकिस्तान पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद और वार्ता, दोनों एकसाथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अपना बचाव करने के अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा। विदेश मंत्री ने कड़े शब्दों में कहा, आतंकवाद का लगातार सहारा लेने वाले देश की ओर से आतंकवाद को सामान्य बताने और उसके परिणामों से बचने का दावा करने वाले तर्क स्वीकार नहीं किए जाएंगे। एक दिन पहले आतंक समर्थन देश ने महासभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। हालांकि उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं रह सकती है। आतंकवाद को अंजाम देने वाले के लिए जरूरी है कि वह अपना रास्ता बदले।
पश्चिमी एशिया में संघर्ष
पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि युद्ध से आपूर्ति शृंखला बाधित हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिए गए बयान को दोहराते हुए कहा कि अब अंतहीन युद्ध का अंत होना चाहिए। जयशंकर ने कहा कि जो देश वैश्विक संघर्षों से कोसों दूर हैं, उन्हें भी बिना किसी गलती के खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। जिन देशों पर युद्धों का सबसे बुरा प्रभाव पड़ता है, वैश्विक निर्णयों में उनकी बात सबसे कम सुनी जाती है।
ईरान और रूस के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर ईरान और रूस के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और निर्दोष नाविकों पर हो रहे हमलों की जयशंकर ने आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे हमले पूरी तरह से अस्वीकार्य और अक्षम्य है। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार और निर्दोष जिंदगियों को नुकसान पहुंचाने वाली ऐसी घटनाओं का कोई औचित्य नहीं हो सकता। ये हमले तुरंत बंद होने चाहिए।
यूक्रेन युद्ध दुनिया के लिए चिंता का विषय
रूस-यूक्रेन युद्ध पर अपनी बात रखते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले चार साल से अधिक समय से जारी युद्ध दुनिया के सामने बड़ा संकट है। यूक्रेन युद्ध के कारण निर्दोषों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। भारत हमेशा से दोनों पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने के मुद्दे पर सहमति जताता रहा है। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया को मैत्रीपूर्ण संबंधों और वैश्विक शांति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, तब संघर्ष और टकराव हमारी मुख्य चिंता बने हुए हैं। शांति बनाए रखने में नाकामी न केवल सुरक्षा को कमजोर कर रही है, बल्कि दुनिया के विकास की गति को भी रोक रही है।
यूएन का समर्थक है ब्रिक्स
विदेश मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) जैसे समूहों के बीच चुनाव करना सही नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि छोटे समूह वैश्विक संगठन का समर्थन करते हैं और उसमें सुधार देखना चाहते हैं। जयशंकर ने कहा, यूएन में कई कमियां हो सकती हैं, लेकिन इसकी कई उपलब्धियों को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। अगर आप इसमें सुधार करना चाहते हैं तो कमियों पर ध्यान देना स्वाभाविक है।
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन और रिलायंस फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक सत्र को संबोधित करते हुए जयशंकर ने यह बात कही। विदेश मंत्री ने कहा, अगर आज संयुक्त राष्ट्र नहीं होता, तो हम सभी यहां बैठकर एक नया संगठन बनाने की कोशिश कर रहे होते। ब्रिक्स का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में संयुक्त राष्ट्र ही केंद्रीय भूमिका में है। हाल ही में भारत द्वारा आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने यूएन में सुधार की मांग को और मजबूत किया है।














