नई दिल्ली। बहुत से छात्रों को लगता है कि मेडिकल क्षेत्र में करियर सिर्फ नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) से ही बन सकता है लेकिन ऐसा नहीं है। एडमिशन के लिए सीटों और कैंडिडेट्स के आंकड़ों को देखा जाए तो हर नीट कैंडिडेट को एमबीबीएस या बीडीएस की सीट नहीं मिल पाती है। ऐसे में कई हेल्थकेयर और उससे जुड़े मेडिकल कोर्स भी हैं, जिनके लिए नीट की बिल्कुल जरूरी नहीं है। इन प्रोग्राम में एडमिशन आम तौर पर 12वीं कक्षा के मार्क्स, यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम या मेरिट-बेस्ड सिलेक्शन के आधार पर होता है।
ये कोर्स छात्रों को अस्पतालों, डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी, फार्मास्युटिकल कंपनियों, रिहैबिलिटेशन सेंटर्स, रिसर्च ऑर्गनाइजेशन और हेल्थकेयर मैनेजमेंट में करियर के बेहतरीन मौके देते हैं। जैसे-जैसे हेल्थकेयर सेक्टर बढ़ रहा है, इन क्षेत्रों में ट्रेंड प्रोफेशनल्स की भारत और विदेशों में बहुत ज्यादा मांग है।
दाखिला कैसे होता है?
बिना नीट वाले हेल्थकेयर और मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए कई ऐसे एकेडमिक और प्रोफेशनल प्रोग्राम हैं जिनके लिए छात्रों को नीट परीक्षा पास करने की जरूरत नहीं होती। इसलिए कहा जा सकता है कि कॉलेज इस आधार पर एडमिशन दे सकते हैं-
12वीं क्लास (पीसीबी/पीसीएम) के मार्क्स
यूनिवर्सिटी-लेवल की एंट्रेंस परीक्षाएं। मेरिट-बेस्ड एडमिशन स्टेट-लेवल की एडमिशन प्रक्रियाएं।
करियर एक्सपर्ट और शारदा यूनिवर्सिटी के पीआर डायरेक्टर डॉ. अजीत कुमार ने बताया कि बीफार्मा, बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (बीपीटी), बीएससी मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलाॅजी, बीएससी रेडियोलाॅजी एंड इमेजिंग टेक्नोलाॅजी और बीएससी ऑप्टोमेट्री जैसे कोर्सेस विकल्प हो सकते हैं। इनमें दाखिला आमतौर पर 12वीं के अंकों, मेरिट या संस्थान की प्रवेश प्रक्रिया के आधार पर होता है। हालांकि, हर काॅलेज और राज्य में पात्रता और एडमिशन नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए आवेदन से पहले पूरी डिटेल देखें।
कई ऐसे डिमांडिंग कोर्सेस हैं जिन्हें नीट के बिना भी कर सकते हैं। यहां 5 कोर्सेस के नाम और भविष्य में फायदा और करियर के अवसर भी जान लें-
बैचलर ऑफ फाॅर्मेसी (बीफार्म)- यह 4 साल का कोर्स है। इसमें दवाओं की संरचना, निर्माण, फार्मास्यूटिकल टेक्नोलॉजी और मरीजों की दवा संबंधित देखभाल की पढ़ाई होती है। यह नीट के बिना हेल्थकेयर सेक्टर में करियर बनाने का प्रमुख विकल्प है। कोर्स पूरा करने के बाद छात्र फार्मासिस्ट, ड्रग सेफ्टी एसोसिएट, क्लिनिकल रिसर्च एसोसिएट, फार्मास्युटिकल प्रोडक्शन ऑफिसर और क्वालिटी कंट्रोल एनालिस्ट जैसी फील्ड में करियर बना सकते हैं।
बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (बीपीटी)- यह कोर्स लगभग 4 से 4.5 साल का है। इसमें एक्सरसाइज, मूवमेंट, फिजिकल थेरेपी और रिहैबिलिटेशन के जरिए मरीजों की रिकवरी में मदद करने की ट्रेनिंग दी जाती है। यह कोर्स करने के बाद छात्र फिजियोथेरेपिस्ट, स्पोर्ट्स थेरेपिस्ट, रिहैबिलिटेशन स्पेशलिस्ट, ऑर्थोपेडिक फिजियोथेरेपिस्ट और न्यूरोलॉजिकल फिजियोथेरेपिस्ट के तौर पर काम कर सकते हैं। कोर्स की अवधि और इंटर्नशिप की संरचना संस्थान के अनुसार अलग हो सकती है।
बीएससी मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी (एमएलटी)- यह आमतौर पर 3 से 4 साल का कोर्स है। इसमें ब्लड, यूरिन, टिश्यू और अन्य क्लिनिकल सैंपल की लैब जांच के जरिए बीमारी की पहचान में सहायता करना सिखाया जाता है। यह कोर्स पूरा करने के बाद छात्र मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट, पैथोलॉजी लैब एग्जीक्यूटिव, डायग्नोस्टिक लैब सुपरवाइज़र और रिसर्च लेबोरेटरी असिस्टेंट जैसे पदों पर काम कर सकते हैं।
रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी- यह लगभग 3 से 4 साल का एलाइड हेल्थ कोर्स है। इसमें एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई और अन्य मेडिकल इमेजिंग तकनीकों से जुड़े उपकरणों के संचालन और मरीजों की जांच में सहायता की ट्रेनिंग दी जाती है। छात्र रेडियोलॉजी टेक्नोलॉजिस्ट, एमआरआई टेक्नीशियन, सीटी स्कैन टेक्नीशियन और इमेजिंग स्पेशलिस्ट जैसे क्षेत्रों में काम कर सकते हैं।
बीएससी ऑप्टोमेट्री- यह 3 से 4 साल का कोर्स है। इसमें आंखों की जांच, विजन टेस्टिंग, आई केयर और करेक्टिव लेंस से जुड़े विषय पढ़ाए जाते हैं। इस कोर्स के बाद छात्र ऑप्टोमेट्रिस्ट, विन कंसल्टेंट, आई केयर स्पेशलिस्ट और कॉन्टैक्ट लेंस प्रैक्टिशनर के रूप में करियर बना सकते हैं। हालांकि, कोर्स की अवधि और एडमिशन की पात्रता अलग-अलग संस्थानों में अलग हो सकती है।
नीट के अलावा मेडिकल/हेल्थकेयर कोर्स करने वाले ग्रेजुएट आमतौर पर सालाना 2.5 लाख से 10 लाख रुपये तक कमा सकते हैं। यह कमाई कोर्स, एम्प्लॉयर, लोकेशन और स्किल्स पर निर्भर करती है। अनुभव, सर्टिफिकेशन और स्पेशलाइजेशन के साथ प्रोफेशनल्स को देश और विदेश में अच्छा फायदा मिलता है। छात्र स्किल्स के आधार पर कोर्स सेलेक्ट करें और कॉलेजों की योग्यता की शर्तों को ध्यान से देखें।













