नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने देश में कांग्रेस के शासन का जिक्र करते हुए कहा कि साल 2013 में देश निराशा के दलदल में धंसा हुआ था। विकास फर्श पर था और महंगाई अर्श पर थी। घोटाले चरम पर थे और भ्रष्टाचारी बेखौफ घूमते थे। अर्थव्यवस्था बेहाल थी, चारों तरफ पॉलिसी पैरालिसिस की चर्चा थी। दुनिया भारत को फ्रेजाइल-5 में गिन रही थी, आतंकी बेलगाम थे और पाकिस्तान बेकाबू था। यानी तब निराशा और हताशा के अलावा कुछ नहीं था।
पुराने संबोधन का जिक्र कर बोले पीएम मोदी
2013 में एसआरसीसी में दिए अपने संबोधन के बारे में जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘2013 में मैं मुख्यमंत्री तो था, लेकिन देश की मुख्य विपक्षी पार्टी का एक सदस्य भी था, लेकिन विपक्ष में होने के बाद भी, तत्कालीन सरकार का आलोचक होने के बावजूद मैंने इस मंच का वो इस्तेमाल नहीं किया था। मैंने एक विजन रखा, सकारात्मक बातें कहीं। मैंने तब जो कुछ कहा वो मेरा कनविक्शन था। उसको मैं जीता रहा और रास्ते पर चलता रहा।
उन्होंने कहा, ‘मैंने उस दिन पानी के ग्लास का उदाहरण दिया था। मैंने बताया कि पानी के आधे भरे ग्लास के देखने के तीन नजरिए क्या होते हैं- पहला आधा भरा दिखता है, दूसरा आधा खाली दिखता है और तीसरा जिनको पूरा भरा हुआ दिखता है, वो आधा पानी और आधा हवा से भरा हुआ। ये वो समय था जब देश निराशा के दलदल में धंसा हुआ था। मैंने तब भी कहा था कि मैं ग्लास को पूरा भरा हुआ देखता हूं।
पीएम मोदी ने छात्रों को कांग्रेस शासन की घटनाएं बताईं ं
उन्होंने कहा, ‘आप जब 2013 के आसपास की खबरें पढ़ेंगे और देखेंगे कि स्थिति क्या थी, उस समय जो हेडलाइन हुआ करती थी, मैं आज आपको उस समय के हेडलाइन दिखाता हूं – ‘एलओसी पर भारतीय सैनिकों की हत्या’, ‘वर्ल्ड बैंक ने भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान घटाया’, ‘करंट अकाउंट डेफिसिट ऑल टाइम हाई’, ‘हेलीकॉप्टर के सौदे में घूसखोरी का पर्दाफाश’, ‘महंगाई दर करीब 10 प्रतिशत की दर पर’, ‘इंडस्ट्रियल सेक्टर मंदी की चपेट में’, ‘हैदराबाद में बम ब्लास्ट’— ये सभी उस वक्त की हेड लाइन्स थी।
स्टारलिंक-जियो समेत कंपनियों के लिए सैटेलाइट इंटरनेट का रास्ता आसान
न ई दिल्ली। भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं की शुरुआत की दिशा में सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। स्टारलिंक, वनवेब और रिलायंस जियो जैसी कंपनियों को सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। सूत्रों के मुताबिक, सचिवों के समूह ने इस संबंध में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी जरूरी होगी। इससे पहले पिछले सप्ताह डिजिटल कम्युनिकेशन कमीशन की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। प्रस्ताव के तहत सैटेलाइट ब्रॉडबैंड कंपनियों को पांच साल की अवधि के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित किया जा सकता है। इसके बदले कंपनियों को अपने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) का 5 फीसदी स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज (एसयूसी) के तौर पर देना होगा।
सरकार सैटेलाइट इंटरनेट को ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने पर भी जोर दे रही है। ऐसे क्षेत्रों में सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज कम रखने का प्रावधान किया जा सकता है। इससे उन इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है, जहां पारंपरिक नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है।














