लखनऊ। एक समय था जब उत्तर प्रदेश को देश के विकास में एक ‘बाधा’ और ‘बीमारू’ राज्य के रूप में देखा जाता था, जहां कानून-व्यवस्था की बदहाली के कारण उद्यमी और निवेशक आने से कतराते थे लेकिन पिछले नौ वर्षों में इस बीमारू दंश को पूरी तरह मिटाकर, उत्तर प्रदेश आज देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और भारत के विकास का असली ‘ग्रोथ इंजन’ बनकर उभरा है। इसका सबसे प्रत्यक्ष प्रमाण नई दिल्ली में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026′ में देखने को मिला। यह आयोजन केवल एक साधारण बिजनेस मीट नहीं था, बल्कि वैश्विक मंच पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आर्थिक और औद्योगिक विजन के मास्टरस्ट्रोक का सजीव प्रदर्शन था।
इस बिजनेस मीट में जहां एक ओर केंद्रीय मंत्रियों और जापानी प्रतिनिधियों ने यूपी की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक सक्रियता और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का लोहा माना। वहीं, दूसरी ओर ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के जरिए जमीन पर हजारों करोड़ रुपये का जापानी निवेश उतारा गया। यह ऐतिहासिक साझेदारी सिद्ध करती है कि कैसे योगी सरकार की प्रगतिशील नीतियां यूपी को ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब’ बनाकर पीएम मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को समय से पहले सिद्ध करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
इस ऐतिहासिक इन्वेस्टमेंट मीट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी और जापान के बीच के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और औद्योगिक जुड़ाव को बेहद गहरे और स्पष्ट अंदाज में परिभाषित किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, जहां जापान ‘लैंड ऑफ द राइजिंग सन’ है तो वहीं उत्तर प्रदेश ‘लैंड ऑफ सूर्यवंश’ होने के साथ-साथ भगवान श्री राम, श्री कृष्ण और बुद्ध की पावन धरती है, जो अनंत संभावनाओं से भरी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जापान के पास जहां दशकों का बेहतरीन औद्योगिक अनुभव, सटीकता, गुणवत्ता, अनुसंधान क्षमता और मैन्युफैक्चरिंग उत्कृष्टता की ‘काइजेन’ फिलॉसफी है, वहीं उत्तर प्रदेश के पास विशाल युवा शक्ति, कौशल, बड़ा उपभोक्ता बाजार, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और पारदर्शी नीतिगत ढांचा उपलब्ध है।
जापानी कंपनियां यूपी को अपना ‘सेकेंड इंडस्टि्रयल होम’ बनाएं
बसेगी जापानी सिटी, 500 एकड़ में होगा हाईटेक विकास
पार्टनरशिप से होगी रोजगार की बरसात
उत्तर प्रदेश बना भारत की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
सीएम योगी ने जापानी कंपनियों को उत्तर प्रदेश को अपना ‘सेकेंड इंडस्टि्रयल होम’ बनाने का खुला न्योता दिया है। उन्होंने जापानी बिजनेस लीडर्स से आह्वान किया कि वे उत्तर प्रदेश में केवल फैक्ट्रियां लगाने तक सीमित न रहें, बल्कि यहां विश्वस्तरीय टेक्नोलॉजी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर्स, अत्याधुनिक स्किल डेवलपमेंट संस्थान और ग्लोबल सप्लाई चेन का भी निर्माण करें। उल्लेखनीय है कि यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 का आयोजन 18 से 23 अगस्त तक उत्तर प्रदेश और दिल्ली में किया गया। इसमें 200 से अधिक जापानी उद्योगपतियों सीईओ, कारोबारी प्रतिनिधियों और नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया। यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 में जापानी कंपनियों के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल डेवलपमेंट और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसर प्रस्तुत किए गए।
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यीडा में रोजगार सृजन
इस इन्वेस्टमेंट मीट का सबसे बड़ा व्यावहारिक ‘मास्टरस्ट्रोक’ ₹3,195 करोड़ का प्रत्यक्ष निवेश रहा, जिसके तहत यीडा क्षेत्र में दो बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं की वर्चुअल ग्राउंड ब्रेकिंग की गई। इन परियोजनाओं के स्थापित होने से उत्तर प्रदेश के कुशल युवाओं के लिए 10 हजार से अधिक रोजगार पैदा होंगे। ट्रैक्टर और निर्माण उपकरण बनाने वाली वैश्विक जापानी दिग्गज कंपनी एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड यीडा के सेक्टर-10 में ₹2,029 करोड़ का निवेश कर रही है। यहां प्रतिवर्ष 60 हजार ट्रैक्टर और 15 हजार कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट का उत्पादन किया जाएगा जिससे 3,800 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।














