नई दिल्ली। सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए बड़े शहरों या महंगे स्कूलों की जरूरत नहीं होती, बल्कि मेहनत और दृढ़ संकल्प ही सफलता की असली कुंजी है। इस बात को बिहार के भोजपुर जिले में बड़हरा प्रखंड के शाहजहांपुर गांव के रहने वाले लवकुश प्रसाद ने साबित कर दिखाया है।
लवकुश ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में साइंटिस्ट के पद पर चयनित होकर पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। लवकुश ने इस कठिन राष्ट्रीय स्तर की भर्ती परीक्षा में पूरे भारत में 15वीं रैंक हासिल की है। जैसे ही उनके चयन की खबर परिजनों और गांव वालों को मिली, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई और बधाई देने वालों का तांता लग गया।
साधारण परिवार से असाधारण सफर
लवकुश की यह सफलता इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि उनका पालन-पोषण किसी बड़े शहर में नहीं, बल्कि एक साधारण ग्रामीण माहौल में हुआ है। उनके पिता नंदलाल प्रसाद एक शिक्षक हैं और मां शिवरानी देवी गृहिणी हैं। लवकुश ने अपनी शुरुआती पढ़ाई उत्क्रमित मध्य विद्यालय नूरपुर से प्राप्त की। उन्होंने 2015 में हाई स्कूल बलुआं से 10वीं और 2017 में एसबी कॉलेज, आरा से गणित विषय के साथ 12वीं (साइंस) की परीक्षा पास की। ग्रेजुएशन के लिए उन्होंने एनआईटी इलाहाबाद में दाखिला लिया और 2022 में बीटेक की डिग्री हासिल की।
बीटेक पूरी करने के बाद भी लवकुश अपने सपनों के लिए लगातार मेहनत करते रहे। 6 सितंबर 2023 को उनका चयन मौसम विभाग, गुवाहाटी में असिस्टेंट साइंटिस्ट के पद पर हुआ।
नौकरी में रहते हुए भी उन्होंने अपनी पढ़ाई और तैयारी जारी रखी। उनकी इसी निरंतर लगन और विषयों पर मजबूत पकड़ का नतीजा रहा कि उन्होंने इसरो की परीक्षा में 15वीं रैंक हासिल कर अपने गांव और राज्य का नाम रोशन कर दिया।
कड़ी मेहनत व निरंतरता सफलता की कुंजी
लवकुश प्रसाद का मानना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता पाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी सही मार्गदर्शन और निरंतरता होती है। परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने सेल्फ-स्टडी पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने कमजोर पहलुओं पर लगातार काम किया।
इसी अनुशासन का परिणाम है कि उन्होंने देश भर के लाखों अभ्यर्थियों को पीछे छोड़ते हुए टॉपर्स की सूची में स्थान हासिल किया।













