ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।नेपाल के शीर्ष नेतृत्व ने हाल ही में देश में आई विनाशकारी बाढ़ और जल प्रलय के समय तुरंत मदद भेजने के लिए भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असाधारण रूप से उदार कहकर सराहना की है।
नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने संकट की घड़ी में भारत के त्वरित और प्रभावी सहयोग के लिए धन्यवाद दिया है। उल्लेखनीय है कि भारत ने संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए वायुसेना के जरिए 57 टन से अधिक की राहत सामग्री (दवाइयां, भोजन, कंबल और जरूरी उपकरण) भेजी है। नेपाल के अनुरोध पर भारत ने मेडिकल स्टाफ और टनल रेस्क्यू एक्सपर्ट्स की टीमों को भी राहत कार्यों में सहायता के लिए तैनात किया है। उल्लेखनीय है कि नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने व्यापक तबाही मचाई है। हिमनद के ढहने से शुरू हुई इस आपदा ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के जलस्तर को अचानक बढ़ा दिया, जिससे सीमावर्ती और नदी घाटी क्षेत्रों में बस्तियां, सड़कें, पुल तथा जलविद्युत परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं।
मीडिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, 1,204 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,216 लोग अब भी लापता हैं। करीब 11,993 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। हालांकि अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़े खोज एवं पहचान अभियान जारी रहने के कारण बदल रहे हैं।
नेपाल सरकार ने सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों को बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव कार्य में लगाया है। जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमें भी बचाव अभियान में सहयोग कर रही हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए स्वच्छ पेयजल, भोजन, दवाइयां, प्राथमिक चिकित्सा, अस्थायी आवास, कपड़े, सैनिटेशन सामग्री और बिजली-रोशनी की तत्काल जरूरत है। हजारों लोग विस्थापित हैं और कई स्थानों पर सड़क तथा संचार व्यवस्था क्षतिग्रस्त होने से राहत सामग्री पहुंचाना कठिन है। बच्चों के लिए पानी, स्वच्छता और अस्थायी शिक्षा केंद्रों की व्यवस्था भी जरूरी हो गई है।














