ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।इसका आप पर क्या असर पड़ेगा? अगर आप पश्चिम बंगाल में हैं और आपने आयुष्मान भारत में नाम लिखवाया है, तो सिर्फ़ रजिस्ट्रेशन से काम नहीं चलेगा। अस्पताल में जो चीज़ चलती है वह है वेरिफ़ाई हुआ कार्ड — और अभी हर तीन में से सिर्फ़ एक के पास वह कार्ड है।
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, यानी पीएम-जय, 16 अगस्त 2026 से पश्चिम बंगाल में लागू हो गई है। इसके तहत हर परिवार को साल में 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। राज्य में क़रीब 1.5 करोड़ परिवार — यानी लगभग 6 करोड़ लोग — इसके दायरे में आएँगे। लॉन्च तक 3.4 करोड़ लोग रजिस्टर हो चुके थे, और जिनका वेरिफ़िकेशन पूरा हुआ, ऐसे 1.23 करोड़ लोगों को कार्ड मिल चुका है।
यहीं चलता है कार्ड: सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पताल। मरीज़ को काउंटर पर पैसे नहीं देने होते — अस्पताल सीधे योजना से पैसा लेता है।
रजिस्ट्रेशन एक एंट्री है। कार्ड एक भर्ती है। 3.4 करोड़ और 1.23 करोड़ के बीच का फ़ासला यही तय करता है।
एक नज़र में
• बंगाल में लागू: 16 अगस्त 2026 से
• कवर: हर परिवार को साल में 5 लाख रुपये तक, कैशलेस
• दायरा: क़रीब 1.5 करोड़ परिवार, लगभग 6 करोड़ लोग
• रजिस्ट्रेशन: लगभग 3.4 करोड़ लोग
• कार्ड बन चुके: 1.23 करोड़ — यानी रजिस्टर लोगों का 36.2 फ़ीसदी
• 70 साल से ऊपर: सब कवर, कमाई चाहे जितनी हो
• पुरानी बीमारी: पहले ही दिन से कवर, कोई वेटिंग पीरियड नहीं
• परिवार का आकार या उम्र: कोई सीमा नहीं
• स्वास्थ्य साथी: दो-तीन महीने साथ चलेगी, 60 दिन की समीक्षा के बाद चरणबद्ध विदाई
दो बातें ठीक से समझ लीजिए, क्योंकि इन्हीं पर सबसे ज़्यादा भ्रम रहता है। पहली — परिवार में कितने लोग हैं, इसकी कोई सीमा नहीं है। नौ लोगों के परिवार को वही कवर मिलेगा जो तीन लोगों के परिवार को। दूसरी — पुरानी बीमारी पहले दिन से कवर है। प्राइवेट हेल्थ इंश्योरेंस में जो वेटिंग पीरियड होता है, वह यहाँ नहीं है।
तीसरी बात घर के बजट की है। 5 लाख रुपये का कवर हर व्यक्ति के लिए नहीं, पूरे परिवार के लिए साल भर का है। और यह कैशलेस है — अस्पताल बिल योजना को भेजता है, मरीज़ को नहीं। इसके अलावा 70 साल से ऊपर के हर बुज़ुर्ग को कवर मिलेगा, चाहे परिवार की कमाई कुछ भी हो। यही एक श्रेणी है जिसमें आमदनी की कोई शर्त नहीं।
अब बंगाल के पाठकों के लिए सबसे काम की बात। स्वास्थ्य साथी योजना अभी दो से तीन महीने साथ-साथ चलती रहेगी। 60 दिन की समीक्षा के बाद ही उसे चरणबद्ध तरीक़े से हटाया जाएगा। यानी जिनके पास स्वास्थ्य साथी कार्ड है, वे बीच में अधर में नहीं छूटेंगे — उन्हें पीएम-जय का वेरिफ़िकेशन पूरा करने के लिए वक़्त मिलेगा।
बड़ी बात यह है कि अब जो काम बचा है वह पैसे का नहीं, दफ़्तरी है। बचे हुए 2.17 करोड़ रजिस्ट्रेशन को कार्ड में बदलना — बायोमेट्रिक, पता, परिवार की लिंकिंग — यही असली चुनौती है। बिहार और उत्तर प्रदेश यह काम कैंप लगाकर कर चुके हैं। सीधी बात यह है: कार्ड बनवा लीजिए, रजिस्ट्रेशन की पर्ची अस्पताल में नहीं चलेगी।













