ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।जुलाई में हर तरह की गाड़ी की रिकॉर्ड बिक्री हुई। सुर्ख़ी कारों को मिली, जो 34 फ़ीसदी बढ़ीं। पर जो आँकड़ा गाँव के बारे में सबसे ज़्यादा बताता है, वह 48.6 फ़ीसदी बढ़ा और उसकी क़ीमत क़रीब 60 हज़ार रुपये है।
सियाम के आँकड़ों के मुताबिक़ जुलाई 2026 में देश में कारों की बिक्री 4,57,810 रही, पिछले साल जुलाई के 3,40,772 के मुक़ाबले 34.34 फ़ीसदी ज़्यादा। दोपहिया वाहन 22.58 फ़ीसदी बढ़कर 19,23,483 हुए। इसके भीतर मोटरसाइकिल 20.7 फ़ीसदी बढ़कर 10,74,796, स्कूटर 23.7 फ़ीसदी बढ़कर 7,98,190 और मोपेड 48.6 फ़ीसदी बढ़कर 50,497 रहे। तिपहिया वाहन 33.37 फ़ीसदी बढ़कर 92,560 हुए।
अब मोपेड की बात। संख्या में यह छोटी है — क़रीब 11 लाख मोटरसाइकिलों के सामने सिर्फ़ 50 हज़ार। पर बाज़ार की सबसे सस्ती गाड़ी की बिक्री सबसे तेज़ी से बढ़ना एक ख़ास बात कहता है। मोपेड ज़्यादातर छोटे क़स्बों और गाँवों में बिकती है, और अक्सर घर की पहली गाड़ी होती है। और ज़्यादातर मामलों में वह शौक़ नहीं, काम का साधन होती है — दूध पहुँचाना, सामान की डिलीवरी, मरम्मत का काम। यानी यह ख़र्च नहीं, कमाई का औज़ार है।
असली मुक़ाबला क़ीमत का: इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन। जुलाई 2026 में दोपहिया बिक्री 22.58 फ़ीसदी बढ़कर 19,23,483 रही, और सबसे तेज़ बढ़त मोपेड में रही — 48.6 फ़ीसदी।
कारों की 34 फ़ीसदी बढ़त शहर के क़र्ज़ की कहानी है। मोपेड की 48.6 फ़ीसदी बढ़त गाँव की नक़दी की। छोटा आँकड़ा ज़्यादा बताता है।
एक नज़र में
• कारें: 4,57,810 — 34.34 फ़ीसदी ज़्यादा
• दोपहिया: 19,23,483 — 22.58 फ़ीसदी ज़्यादा
• — मोटरसाइकिल: 10,74,796 (+20.7%)
• — स्कूटर: 7,98,190 (+23.7%)
• — मोपेड: 50,497 (+48.6%)
• तिपहिया: 92,560 — 33.37 फ़ीसदी ज़्यादा
• ई-रिक्शा: 1,132 (+7.5%) · ई-कार्ट: 538 (+16.2%)
• कुल उत्पादन: 33,70,958 वाहन
तिपहिया के आँकड़े भी यही कहते हैं। तिपहिया वाहन शायद ही कभी निजी इस्तेमाल के लिए ख़रीदे जाते हैं; उन्हें चालक-मालिक ख़रीदते हैं, रोज़ी कमाने के लिए। एक-तिहाई ज़्यादा तिपहिया बिकने का मतलब है एक-तिहाई ज़्यादा लोगों ने अपनी कमाई का साधन ख़रीदा। ई-रिक्शा 7.5 फ़ीसदी बढ़कर 1,132 और ई-कार्ट 16.2 फ़ीसदी बढ़कर 538 रहे।
यह सब उस वक़्त हुआ है जब खाने की महंगाई 5.52 फ़ीसदी पर है — और वह बोझ ठीक उन्हीं घरों पर सबसे ज़्यादा है जो मोपेड ख़रीदते हैं। बढ़ती थाली के बीच रिकॉर्ड बिक्री गिरती क़ीमतों के बीच रिकॉर्ड बिक्री से कहीं मज़बूत नतीजा है। रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट 5.25 फ़ीसदी पर रखा है, इसलिए गाड़ी का क़र्ज़ फ़िलहाल महंगा नहीं हुआ।
आगे का सवाल बिजली की गाड़ी का है। भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ तिपहिया और स्कूटर में सबसे ज़्यादा चलीं, और सबसे कम वहाँ जहाँ अभी बिक्री सबसे तेज़ बढ़ रही है — सस्ती दोपहिया, जहाँ गाड़ी की क़ीमत का सबसे बड़ा हिस्सा बैटरी है। देश में बैटरी सेल बनाने की क्षमता जैसे-जैसे लगेगी, यह क़ीमत गिरेगी। सीधी बात यह है कि मोपेड ख़रीदने वाला उस दिन इलेक्ट्रिक लेगा जिस दिन वह उतने ही दाम में मिलेगी। तब तक हर बात सब्सिडी की है।












