ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।मौसम विभाग की चेतावनी और खरीफ़ के कैलेंडर को एक साथ रखकर देखिए — तभी पता चलता है कि यह बारिश किसके लिए राहत है और किसके लिए ख़तरा।
मौसम विभाग के मुताबिक़ 20 और 21 अगस्त को पूर्वी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख इलाक़े में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश हो सकती है। झारखंड में 20-21 अगस्त और ओडिशा में 19-20 अगस्त के बीच छिटपुट से लेकर कई जगह बारिश का अनुमान है।
अब खेती का हिसाब। अगस्त का यह हफ़्ता वह वक़्त है जब पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में धान की रोपाई ख़त्म हो रही होती है और पौधा जड़ पकड़ रहा होता है। इस अवस्था में खेत में पानी चाहिए — पर ठहरा हुआ, नापा हुआ पानी। लगातार बहुत भारी बारिश से खेत में पानी का स्तर पौधे से ऊपर चला जाता है, और नई रोपाई डूबकर सड़ने लगती है। यानी वही बारिश, जो सामान्य मात्रा में फ़सल बनाती है, ज़्यादा होने पर उसी फ़सल को ले डूबती है।
वरदान भी, ख़तरा भी: मॉनसून की बारिश। मौसम विभाग ने 20 और 21 अगस्त को पूर्वी उत्तर प्रदेश, हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है।
वही बारिश, जो नापी हुई मात्रा में धान बनाती है, ज़्यादा होने पर नई रोपाई डुबो देती है। फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि खेत की निकासी नाली खुली है या नहीं।
एक नज़र में
• बहुत भारी बारिश की चेतावनी (20-21 अगस्त): पूर्वी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख
• बारिश का अनुमान: झारखंड (20-21 अगस्त), ओडिशा (19-20 अगस्त)
• फ़सल की अवस्था: धान की रोपाई पूरी होने और जड़ पकड़ने का समय
• मुख्य ख़तरा: खेत में पानी ठहरने से नई रोपाई का सड़ना
• पहाड़ों में: भूस्खलन, सड़क बंदी — सेब की तुड़ाई का मौसम
• तुरंत करने लायक़: निकासी नाली खोलें, यूरिया छिड़काव टालें, उपज ढककर रखें
• बीमा: नुक़सान की सूचना आम तौर पर 72 घंटे के भीतर देनी होती है
पहाड़ों की चिंता अलग है। हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बहुत भारी बारिश का मतलब भूस्खलन और सड़कें बंद होना है। सेब की तुड़ाई का मौसम भी यही है, और हिमाचल तथा उत्तराखंड से सेब मंडियों तक उन्हीं पहाड़ी सड़कों से पहुँचता है। एक दिन की सड़क बंदी बाग़वान की पूरी खेप का दाम गिरा देती है, क्योंकि सेब इंतज़ार नहीं करता।
किसान के स्तर पर कुछ काम अभी किए जा सकते हैं। धान के खेत में निकासी की नाली खुली रखें, ताकि ज़रूरत से ज़्यादा पानी बह जाए। भारी बारिश के तुरंत बाद यूरिया का छिड़काव न करें, वह बह जाएगा और पैसा बेकार जाएगा। कटी हुई या तैयार उपज को ऊँची और ढकी जगह रखें। और सबसे ज़रूरी — फ़सल बीमा की सूचना देने की समय-सीमा नुक़सान होने के 72 घंटे के भीतर होती है, इसलिए नुक़सान दिखते ही बीमा कंपनी या कृषि विभाग को ख़बर करें, फ़ोटो के साथ।
बड़ी तस्वीर में यह चेतावनी काम की चीज़ है, डर की नहीं। मौसम विभाग की ज़िलेवार चेतावनी अब मोबाइल पर पहुँचती है और दो दिन पहले मिलती है — दो दिन में नाली खोली जा सकती है, कटाई आगे-पीछे की जा सकती है और मंडी की गाड़ी बदली जा सकती है। पूर्वानुमान की असली क़ीमत यही है: वह मौसम नहीं बदलता, तैयारी का वक़्त देता है। जिन गाँवों में यह चेतावनी पंचायत तक पहुँचती है, वहाँ नुक़सान हर बार कम होता है।












