• Latest
  • Trending
vegetable

थाली महंगी, छत सस्ती — महंगाई की असली तस्वीर

August 20, 2026
gale cricket stedium

गॉल में 165 रन से जीत, और एक स्पिनर के दस विकेट

August 20, 2026
ev-scooter

मोपेड की बिक्री 48.6 फ़ीसदी बढ़ी — यही असली ख़बर है

August 20, 2026
monsoon

जिन ज़िलों में रोपाई चल रही है, वहीं भारी बारिश

August 20, 2026
dialy-news

भारत की खबरें: महंगाई, निर्यात, मॉनसून और बाज़ार

August 20, 2026
Makhana

मखाना का दाम ढाई गुना, पैदावार सिर्फ़ चार फ़ीसदी बढ़ी

August 20, 2026
nirmala sitharaman

ग्रामीण बैंकों का कर्ज़ 5.78 लाख करोड़ के पार

August 19, 2026
shivraj singh chauhan

राजस्थान को 2.89 लाख पक्के घर, 3,473 करोड़ के

August 19, 2026
एनटीए परीक्षा सुधार: 600 विशेषज्ञ बदले, 4 स्तर की जाँच

एनटीए का प्रश्नपत्र अब चार जाँचों से गुज़रेगा

August 19, 2026
Makhana

दुनिया का 80 फ़ीसदी मखाना, बिहार के नौ ज़िलों से

August 19, 2026
dialy-news

India News: Weather, Exams, Economy and Sports

August 19, 2026
PNG Connection Scheme

पाइप वाली रसोई गैस पर नई योजना, 1 सितंबर से

August 19, 2026
divya deshmukh

17 अर्जुन पुरस्कार, तीन पैरा और मूक-बधिर खिलाड़ियों को

August 19, 2026
Thursday, August 20, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

थाली महंगी, छत सस्ती — महंगाई की असली तस्वीर

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 20, 2026
in the blitz
0
vegetable

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।जुलाई की महंगाई दर 4.45 फ़ीसदी है, जो 19 महीने में सबसे ज़्यादा है। पर इस एक आँकड़े के भीतर दो अलग-अलग कहानियाँ हैं, और आपके घर पर असर इसी से तय होता है।

सांख्यिकी मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक़ जुलाई 2026 में खुदरा महंगाई दर 4.45 फ़ीसदी रही, जून के 4.38 फ़ीसदी से 0.07 अंक ऊपर। यह जनवरी 2025 के बाद का सबसे ऊँचा स्तर है। अब भीतर देखिए। खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई 5.52 फ़ीसदी रही — कुल महंगाई से पूरे 1.07 अंक ज़्यादा। और मकान किराये की महंगाई सिर्फ़ 2.22 फ़ीसदी, कुल से आधे से भी कम।

YOU MAY ALSO LIKE

गॉल में 165 रन से जीत, और एक स्पिनर के दस विकेट

मोपेड की बिक्री 48.6 फ़ीसदी बढ़ी — यही असली ख़बर है

इसका सीधा मतलब यह है कि दबाव थाली पर है। जिस परिवार की कमाई का बड़ा हिस्सा राशन, सब्ज़ी, दाल और तेल में जाता है, उसे यह महंगाई 4.45 फ़ीसदी नहीं, 5.5 फ़ीसदी से ऊपर महसूस होगी। और यह हिस्सा गाँव और छोटे क़स्बे के घरों में सबसे बड़ा होता है। इसी वजह से एक ही महंगाई दर अलग-अलग घरों में अलग-अलग चुभती है।

यहीं सबसे पहले दिखती है: सब्ज़ी बाज़ार। जुलाई 2026 में खाने-पीने की महंगाई 5.52 फ़ीसदी रही, जबकि कुल खुदरा महंगाई 4.45 फ़ीसदी थी।

खाने की महंगाई 5.52 और मकान की 2.22 फ़ीसदी। जिस घर की कमाई का बड़ा हिस्सा राशन में जाता है, उसके लिए महंगाई 4.45 नहीं है — कहीं ज़्यादा है।

एक नज़र में

• खुदरा महंगाई, जुलाई: 4.45 फ़ीसदी (जून में 4.38)
• खाने-पीने की महंगाई: 5.52 फ़ीसदी
• मकान किराया महंगाई: 2.22 फ़ीसदी
• सबसे ऊपर: तेलंगाना 6.32%, आंध्र प्रदेश 5.7%, तमिलनाडु 5.4%
• रेपो रेट: 5.25 फ़ीसदी, कोई बदलाव नहीं (5 अगस्त)
• रुख़: तटस्थ
• 2026-27 का महंगाई अनुमान: 5.0 फ़ीसदी, तीसरी तिमाही में चरम
• विकास दर अनुमान: बढ़ाकर 6.7 फ़ीसदी

राज्यों के बीच फ़र्क़ और साफ़ है। तेलंगाना में महंगाई सबसे ज़्यादा 6.32 फ़ीसदी रही, फिर आंध्र प्रदेश 5.7, तमिलनाडु 5.4, मध्य प्रदेश 4.9 और कर्नाटक 4.9 फ़ीसदी। यानी दक्षिण के राज्यों पर बोझ ज़्यादा पड़ा है। राष्ट्रीय औसत एक हिसाब है, आपका बिल आपके राज्य और आपकी थाली से बनता है।

अब सबसे ज़रूरी सवाल — ब्याज दर बढ़ेगी क्या? रिज़र्व बैंक ने 5 अगस्त को रेपो रेट 5.25 फ़ीसदी पर बिना बदलाव रखा और रुख़ तटस्थ रखा। बैंक का कहना है कि यह महंगाई खाने और ईंधन की वजह से है, माँग की वजह से नहीं। जब महंगाई सप्लाई की दिक़्क़त से आती है, तो ब्याज दर बढ़ाने का ख़ास फ़ायदा नहीं होता — इससे क़र्ज़ महंगा हो जाता है और सब्ज़ी सस्ती नहीं होती। इसलिए फ़िलहाल आपकी ईएमआई जहाँ है, वहीं रहेगी।

रिज़र्व बैंक का अनुमान है कि 2026-27 में महंगाई औसतन 5.0 फ़ीसदी रहेगी और तीसरी तिमाही में सबसे ऊपर जाकर उसके बाद नीचे आएगी। इसी बैठक में बैंक ने विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7 फ़ीसदी किया है। जोखिम भी बैंक ने ख़ुद गिनाए हैं — अल नीनो, असमान मॉनसून, कच्चे तेल की चाल, और लागत बढ़ने का दूसरे दौर का असर।

घर के स्तर पर करने लायक़ काम सीधा है। दालें और तेल जैसी टिकाऊ चीज़ें त्योहारों से पहले लेना सस्ता पड़ता है, क्योंकि सितंबर-अक्टूबर में माँग बढ़ने पर दाम चढ़ते हैं। और सरकारी योजनाओं का सहारा इसी वक़्त सबसे काम आता है — राशन कार्ड पर मिलने वाला अनाज, उज्ज्वला का सिलेंडर, और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की क़िस्त। महंगाई के दौर में ये तीनों घर के बजट में सीधा फ़र्क़ डालते हैं। अच्छी बात यह है कि इस बार दबाव आयातित है, घरेलू माँग का नहीं — और अगर मॉनसून ठीक रहा तो खरीफ़ की फ़सल आते ही थाली का हिसाब सुधरने लगेगा।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation