ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।सिलेंडर बुक कराना, इंतज़ार करना, बीच खाना बनाते हुए गैस ख़त्म हो जाना — सरकार की नई योजना सीधे इसी झंझट पर निशाना लगाती है। पर पैसा कंपनी को नक़द नहीं, गैस के रूप में मिलेगा।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घरेलू पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने के लिए एक प्रोत्साहन योजना मंज़ूर की है। यह अगले महीने की पहली तारीख़, यानी 1 सितंबर से लागू होगी। मक़सद साफ़ है — घरों तक पाइप से आने वाली रसोई गैस जल्दी पहुँचे, और जो कनेक्शन लग तो गए हैं पर चालू नहीं हैं, वे चालू हों।
अभी देश में 1 करोड़ 74 लाख घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं। मंत्रालय का कहना है कि योजना सीधे सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन यानी सीजीडी कंपनियों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करती है कि वे बिना बिल वाले कनेक्शनों को चालू कनेक्शन में बदलें और नए इलाक़ों तक नेटवर्क फैलाएँ।
बात यहीं आकर ख़त्म होती है: घर का चूल्हा। पीएनजी मीटर से होकर रसोई तक आती है और खपत के हिसाब से बिल बनता है — इसीलिए मंत्रालय ने प्रोत्साहन बिल वाले कनेक्शन पर रखा है, सिर्फ़ लगे हुए कनेक्शन पर नहीं।
सीधी बात यह है कि सरकार कंपनी को पैसा नहीं, सस्ती गैस दे रही है। अगर देश का नेटवर्क दस फ़ीसदी बढ़े — यानी 17 लाख 40 हज़ार नए बिल वाले कनेक्शन — तो क़रीब 34.8 करोड़ घन मीटर सस्ती घरेलू गैस कंपनियों को मिलेगी।
एक नज़र में
• योजना: घरेलू पीएनजी कनेक्शन प्रोत्साहन योजना
• कब से: 1 सितंबर 2026
• अभी कितने कनेक्शन: 1.74 करोड़
• क्या मिलेगा: हर नए बिल वाले कनेक्शन पर 200 घन मीटर सस्ती घरेलू गैस
• कितने समय के लिए: दो चरणों में, कुल छह महीने
• पैसा कहाँ से: महँगी आयातित एलएनजी की जगह सस्ती घरेलू गैस देकर
• मंत्रालय: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस
अब समझिए कि गैस आती कहाँ से है। सीजीडी कंपनियाँ गाड़ियों के लिए सीएनजी भी बेचती हैं, और उसके लिए वे महँगी आयातित एलएनजी ख़रीदती हैं। नई योजना के तहत मिलने वाली सस्ती घरेलू गैस उसी महँगी एलएनजी की जगह ले लेगी। इससे कंपनी की कुल गैस ख़रीद सस्ती पड़ेगी। यानी सरकारी ख़ज़ाने से चेक नहीं जाएगा — कंपनी को सस्ता कच्चा माल मिलेगा, और वह भी तभी जब वह एक नया चालू कनेक्शन देकर दिखाए।
घर वालों के लिए फ़ायदा क्या है? मंत्रालय के मुताबिक़ पाइप वाली गैस एलपीजी सिलेंडर और पुराने चूल्हों के मुक़ाबले ज़्यादा सुरक्षित, साफ़ और सुविधाजनक है। रोज़मर्रा की भाषा में — न बुकिंग, न डिलीवरी का इंतज़ार, न सिलेंडर उठाना, न खाना बनाते-बनाते गैस ख़त्म होने का डर। और बिल उतना ही आता है जितनी गैस जली, पहले से पूरा पैसा नहीं देना पड़ता।
एक बात साफ़ रखनी चाहिए। पीएनजी वहीं मिल सकती है जहाँ पाइप बिछी हो। इसलिए शुरुआत में फ़ायदा उन बड़े शहरों को मिलेगा जहाँ नेटवर्क पहले से है, और छोटे क़स्बों का नंबर बाद में आएगा। यह योजना की कमी नहीं, क्रम है। आगे का सही क़दम यह होगा कि हर चरण के बाद सरकार बताए — किस कंपनी ने, किस शहर में, कितने नए बिल वाले कनेक्शन दिए। छह महीने कम वक़्त है, और साफ़ हिसाब सामने आ जाए तो अगले क़स्बे के लोगों को भी पता रहेगा कि पाइप कब तक पहुँचेगी।













