ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।2036 ओलंपिक की बात हर साल होती है। इस बार लाल किले से जो नई बात निकली, वह उम्र थी — पाँच से पंद्रह साल।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को 2036 ओलंपिक के हर खेल में उतरना चाहिए, और इसके लिए देश भर में प्रतिभा खोज अभियान चलाया जाएगा। यह तलाश पाँच से पंद्रह साल के बच्चों में होगी, ख़ास तौर पर उन खेलों में जहाँ भारत की मौजूदगी अब तक न के बराबर रही है। 2036 खेलों के लिए अहमदाबाद प्रस्तावित मेज़बान शहर है। उन्होंने अब तक के सुधार का श्रेय खेलो इंडिया और टॉप्स योजना को दिया।
उम्र वाली बात ही इस ऐलान का असली मतलब है। इस साल पाँच साल का बच्चा 2036 में पंद्रह का होगा, और पंद्रह का बच्चा पच्चीस का। इन्हीं दोनों उम्रों के बीच ओलंपिक के ज़्यादातर खेलों की पूरी प्रतिस्पर्धी उम्र आती है। जिमनास्टिक, तैराकी, डाइविंग जैसे खेलों में ऊँचे दर्जे का प्रदर्शन आठ से बारह साल की लगातार तकनीकी ट्रेनिंग से बनता है। यानी इन खेलों की 2036 वाली टीम या तो अभी चुनी जाएगी, या फिर बनेगी ही नहीं। भारत परंपरागत रूप से सत्रह-अठारह की उम्र में खिलाड़ी चुनता रहा है — जो कुश्ती, मुक्केबाज़ी और निशानेबाज़ी के लिए ठीक है, बाक़ी के लिए बहुत देर।
दस साल, एक पीढ़ी: पाँच से पंद्रह साल के बच्चों में तलाश उन्हीं खेलों को ध्यान में रखकर है, जहाँ ऊँचा प्रदर्शन एक दशक की लगातार ट्रेनिंग से बनता है।
मेज़बानी कमेटी के कमरे में तय होती है। पदक दस साल पहले, स्कूल के मैदान में तय होता है।
एक नज़र में
• ऐलान: लाल किला, 15 अगस्त 2026
• लक्ष्य: 2036 ओलंपिक के हर खेल में भारत की भागीदारी
• प्रस्तावित मेज़बान शहर: अहमदाबाद
• प्रतिभा खोज की उम्र: 5 से 15 साल
• ज़ोर: उन खेलों पर जहाँ भारत की मौजूदगी कम है
• मौजूदा योजनाएँ: खेलो इंडिया, टॉप्स
• तैयारी का समय: खेलों तक दस साल
• इसी महीने: महिला एशिया कप, दुबई, 28 अगस्त से 13 सितंबर
• भारत का पहला मैच: थाईलैंड से, 30 अगस्त
नज़दीक का कैलेंडर भी भरा हुआ है। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में 15 सदस्यीय भारतीय टीम 28 अगस्त से 13 सितंबर तक दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में महिला एशिया कप खेलेगी। भारत 30 अगस्त को थाईलैंड, 3 सितंबर को हांगकांग चीन और 5 सितंबर को पाकिस्तान से भिड़ेगा। जेमिमा रोड्रिग्स हैमस्ट्रिंग की गंभीर चोट के कारण बाहर हो गई हैं और उनकी जगह प्रतिका रावल को टीम में लिया गया है।
दोनों ख़बरों को साथ पढ़िए तो एक ही बात निकलती है। क्रिकेट में भारत के पास बच्चों को जल्दी खोजने और फिर सालों तक ट्रेनिंग में बनाए रखने का पूरा ढाँचा है — अकादमी, आयु-वर्ग टूर्नामेंट, कोच। बाक़ी किसी खेल में उतना गहरा ढाँचा नहीं है। आज का ऐलान असल में यही कोशिश है कि जो एक खेल ने तीस साल में अपने लिए बनाया, वह तीस खेलों के लिए बनाया जाए। इसकी कामयाबी ऐलान से नहीं, उसके बाद आने वाली चीज़ों से नापी जाएगी — प्रशिक्षित कोच, चलने लायक़ मैदान, और अंडर-15 के लिए ज़िला स्तर पर नियमित प्रतियोगिताएँ। महानगरों में नहीं, ज़िलों में।














