ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।सोमवार को तीन राज्यों की तीन विधानसभा सीटों के उपचुनाव नतीजे आए, और तीनों नतीजे अलग-अलग दिशा में गए। बिहार की बांकीपुर सीट जन सुराज के प्रशांत किशोर ने 19,419 वोट के अंतर से जीती। मध्य प्रदेश की दतिया सीट कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने 6,056 वोट से जीती। गुजरात की मांजलपुर सीट भाजपा ने अपने पास बनाए रखी। तीन सीटों से किसी विधानसभा का गणित नहीं बदलता — पर तीनों को साथ पढ़ने पर एक बात साफ़ दिखती है।
वह बात यह है कि तीनों जगह मुक़ाबला असली था। बांकीपुर पटना शहर की सीट है और वहां एक नई पार्टी का बीस हज़ार के क़रीब अंतर से जीतना बताता है कि शहरी मतदाता विकल्प देखने को तैयार है। दतिया में छह हज़ार का अंतर बताता है कि वहां लड़ाई आख़िरी दौर तक चली। मांजलपुर में भाजपा ने अपनी परंपरागत सीट बचाई, यानी वहां संगठन ने काम किया। तीन अलग राज्यों की तीन अलग राजनीतिक व्यवस्थाओं में तीन अलग नतीजे आना अपने-आप में लोकतंत्र की सेहत का अच्छा संकेत है।
तीन सीटें, तीन नतीजे: उपचुनाव विधानसभा का गणित नहीं बदलते, पर वे बताते हैं कि ज़मीन पर मुक़ाबला कितना कड़ा है।
उपचुनाव सरकार नहीं बदलते। वे यह बताते हैं कि अगली बार जब पूरा चुनाव होगा, तब मुक़ाबला कैसा होगा।
एक नज़र में
• बांकीपुर (बिहार): जन सुराज के प्रशांत किशोर 19,419 वोट से जीते; भाजपा के नीरज कुमार दूसरे स्थान पर
• दतिया (मध्य प्रदेश): कांग्रेस के घनश्याम सिंह 6,056 वोट से जीते; भाजपा के आशुतोष तिवारी दूसरे स्थान पर
• मांजलपुर (गुजरात): भाजपा ने अपनी परंपरागत सीट बरक़रार रखी
• गिनती: सोमवार, 3 अगस्त को सुबह 8 बजे से, कड़ी सुरक्षा के बीच
• असर: तीन सीटों से किसी विधानसभा का बहुमत नहीं बदलता
उपचुनाव को पढ़ने का सही तरीक़ा यह है कि इन्हें पूरे चुनाव का पूर्वानुमान न माना जाए। उपचुनाव में मतदान कम होता है, स्थानीय मुद्दे भारी पड़ते हैं और उम्मीदवार की अपनी पकड़ का असर बहुत ज़्यादा होता है। इसलिए इनसे यह नहीं निकलता कि अगले आम चुनाव में क्या होगा। जो निकलता है वह यह है कि संगठन कहां ज़िंदा है, कार्यकर्ता कहां सक्रिय है और मतदाता किस मुद्दे पर हिल रहा है — और यह जानकारी हर पार्टी के लिए क़ीमती है।
तीनों जीतने वाले विधायकों के सामने अब एक ही तरह का काम है। उपचुनाव में जीता हुआ विधायक पूरे कार्यकाल का नहीं, बचे हुए समय का प्रतिनिधि होता है — इसलिए उसके पास दिखाने के लिए वक़्त कम होता है। ऐसे में सबसे अच्छा रास्ता वही है जो हर अच्छे स्थानीय जनप्रतिनिधि ने अपनाया है: सड़क, पानी, स्कूल और अस्पताल जैसे छोटे-छोटे काम, जो जल्दी पूरे होते हैं और सीधे दिखते हैं। मतदाता ने तीनों जगह भरोसा जताया है। अब उस भरोसे को काम में बदलने का समय है।












