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‘सॉफ्टवेयर, कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई छोड़ो, ट्रेड स्किल्स सीखो’

देश के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर की यूथ को सलाह

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 4, 2026
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'सॉफ्टवेयर, कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई छोड़ो, ट्रेड स्किल्स सीखो'

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि दुनिया तेजी से बदल रही है और इसका सीधा असर रोजगार के अवसरों पर पड़ रहा है। लंबे समय तक सॉफ्टवेयर, कंप्यूटर साइंस और एमबीए जैसी डिग्रियों को बेहतर करियर की कुंजी माना जाता रहा है लेकिन अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई कई पारंपरिक कार्यों को अपने हाथ में ले रही है। ऐसे में रोजगार का स्वरूप बदल रहा है और नई तरह की क्षमताओं की मांग बढ़ रही है। उनका मानना है कि युवाओं को भविष्य की जरूरतों को समझते हुए अपने कौशल को नए क्षेत्रों के अनुसार विकसित करना होगा।

समय की जरूरत

नागेश्वरन ने इस बात पर चिंता जताई कि भारत में ट्रेड स्किल्स वाले पेशों को वह सम्मान नहीं मिलता, जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने कहा कि वेल्डर, प्लंबर, इलेक्टि्रशियन, बढ़ई और अन्य तकनीकी काम करने वाले लोग किसी भी अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव होते हैं। स्विट्जरलैंड, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इन देशों में व्यावसायिक कौशल रखने वाले लोगों को काफी सम्मान दिया जाता है। भारत में भी इस सोच को बदलने की जरूरत है ताकि युवा इन क्षेत्रों को करियर विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित हों.

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पेशे जिन्हें एआई नहीं बदल सकता

मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां मानवीय संवेदनाएं और व्यक्तिगत संपर्क सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बुजुर्गों की देखभाल, विशेष जरूरतों वाले बच्चों की काउंसलिंग, अस्पतालों में सहायक सेवाएं, खेल शिक्षा, खाना बनाने की कला और अन्य सेवा क्षेत्र ऐसे उदाहरण हैं जहां इंसानी उपस्थिति की जरूरत बनी रहेगी। उनका कहना है कि एआई भले ही कई तकनीकी कार्यों को आसान बना दे, लेकिन इन पेशों में मानवीय स्पर्श की जगह लेना उसके लिए आसान नहीं होगा। यही कारण है कि इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित और योग्य लोगों की मांग भविष्य में बढ़ सकती है

रोजगार व योग्यता दोनों पर देना होगा ध्यान

नागेश्वरन ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश के सामने केवल बेरोजगारी की चुनौती नहीं है, बल्कि रोजगार योग्यता यानी लोगों को काम के लिए तैयार करने की चुनौती भी उतनी ही बड़ी है। उनके अनुसार केवल नौकरियां पैदा करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि युवाओं को उन नौकरियों के लिए जरूरी कौशल भी सिखाने होंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था अधिक पूंजी-आधारित होती जा रही है, जहां कई उद्योग कम लोगों को रोजगार दे पाते हैं। इसलिए श्रम-प्रधान उद्योगों और सेवाओं के विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र में हैं अवसर

उन्होंने भारत को अपनी विनिर्माण क्षमता मजबूत करने की सलाह भी दी। उनका मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब पहले की तरह खुली नहीं रह गई है और कई देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारत को भी कई उत्पाद खुद बनाने होंगे। हालांकि इसके साथ-साथ श्रम-प्रधान उद्योगों और सेवा क्षेत्रों में भी बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। यदि इन क्षेत्रों में सही प्रशिक्षण और कौशल विकास पर ध्यान दिया जाए, तो लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। इससे न केवल रोजगार बढ़ेगा बल्कि देश की आर्थिक प्रगति को भी गति मिलेगी। नागेश्वरन का संदेश साफ है कि आने वाले वर्षों में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। युवाओं को व्यावहारिक कौशल, संवाद क्षमता, समस्या समाधान और मानवीय समझ जैसे गुणों पर भी काम करना होगा।

उनका मानना है कि वैश्वीकरण के दौर में सॉफ्टवेयर और एमबीए शिक्षा ने भारत को बड़ा लाभ दिया था, लेकिन अब समय बदल रहा है। एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच वही लोग अधिक अवसर हासिल कर पाएंगे, जिनके पास ऐसे कौशल होंगे जिन्हें मशीनें आसानी से नहीं दोहरा सकतीं। इसलिए ट्रेड स्किल्स व सॉफ्ट स्किल्स को अपनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत बनती जा रही है।

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