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यूपी के उत्पादों का निर्यात बढ़ाने की नीति तैयार

4.40 लाख करोड़ का लक्ष्य तय करने पर नजर

by ब्लिट्ज़ इंडिया
September 20, 2025
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ब्लिट्ज ब्यूरो

लखनऊ। आगामी पांच वर्षों में उत्पाद एक्सपोर्ट को दोगुना से भी अधिक बढ़ाकर 4.40 लाख करोड़ रुपये करने पर उत्तर प्रदेश सरकार की नजर है। विश्व के बाजारों में इस समय यूपी 1.86 लाख करोड़ रुपये के उत्पाद निर्यात कर रहा है। इसके लिए जरूरी है कि नए बाजार, मांग और संभावनाओं को तलाशा जाए ताकि वहां यूपी अपने एक्सपोर्ट का विस्तार कर सके।
इन संभावनाओं का पता लगाने के लिए सरकार आईआईटी और आईआईएम जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर मार्केट रिसर्च पर काम करेगी। नई निर्यात नीति के तहत टॉप इंस्टिट्यूट में मार्केट रिसर्च चेयर्स स्थापित करने पर लगभग 5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इनकी रिसर्च से जो परिणाम निकलेंगे, उनको जमीन पर उतारा जाएगा।
अमेरिकी टैरिफ की चुनौतियों के बीच 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनने का लक्ष्य तय करने वाली योगी सरकार निर्यात के विस्तार को भी इसके अहम कंपोनेंट के तौर पर देख रही है। इसलिए नई निर्यात नीति में पहली बार सर्विस सेक्टर जैसे नए आयामों को स्थान दिया गया है। कैबिनेट से मुहर लगने के बाद शासन ने नई नीति की अधिसूचना जारी कर दी है। मार्केट रिसर्च चेयर के जरिए बाजार के अवसरों, डिमांड की स्टडी करने के साथ ही निर्यात परफॉर्मेंस की ट्रैकिंग कर इसकी वार्षिक रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी। इसके आधार पर संभावनाओं वाले क्षेत्रों पर फोकस और कमियों को दूर करने की दिशा में काम होगा। सरकार का लक्ष्य निर्यातकों की संख्या भी दोगुना तक बढ़ाने का है।
विदेशों में बनाई जाएंगी डेस्क
सरकार दुनिया के अलग-अलग बाजारों में यूपी की उपस्थिति बढ़ाने के लिए विदेशी व्यापार दूतावास संपर्क डेस्क भी बनाएगी जो निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो के तहत काम करेगी। यह विभिन्न देशों में डिप्लोमेटिक मिशन के दौरान कमर्शियल फर्मों से संपर्क बनाकर यूपी के मार्केटिंग को आगे बढ़ाएगी।
इसके अलावा ग्लोबल नेटवर्किंग को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में भी माइस (मीटिंग, इंसेंटिव, कॉन्फ्रेंस, एग्जिबिशन) को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए प्रति विदेशी मेहमान 7 हजार रुपये और अधिकतम 6 लाख रुपये तक कार्यक्रम के आयोजन के लिए भी सरकार सब्सिडी देगी। निर्यात आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए 100 करोड़ या उससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
जिलों के प्रोडक्ट पर फोकस
नई नीति में फोकस हर जिले को निर्यात हब के रूप में विकसित करने पर है। इसलिए, जिला निर्यात संवर्धन परिषद को और सशक्त बनाया जाएगा। हस्तशिल्प, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजिनियरिंग, गारमेंट, रेडीमेट गारमेंट, कारपेट, कृषि, फूड प्रॉसेसिंग, केमिकल, मेडिसिन, लेदर, स्पोर्ट्स, ग्लास, सिरेमिक प्रोडक्ट, वुड प्रोडक्ट, सर्विस सेक्टर: एजुकेशन, मेडिकल, ट्रैवल, ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक, टूरिजम, हॉस्पिटैलिटी, आईटी, आईटीईएस आदि में क्षेत्रवार विशिष्टताओं को चिह्नित कर उनके और विस्तार और वैश्विक बाजार मे पहुंच बढ़ाने पर भी फोकस होगा। नीति में दी जाने वाली रियायतों को भी महंगाई दर के साथ लिंक कर दिया गया है।

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