• Latest
  • Trending

तिब्बत के लिए क्यों खास है तवांग मठ

July 11, 2025
भारत की 7.8% जीडीपी ग्रोथ

‘झूठ की गूंज वाले निराशा फैलाने में लगे हैं’

September 7, 2026
पीएम मोदी पुतिन मुलाकात SCO शिखर सम्मेलन

पीएम मोदी का विदेश दौरा और एससीओ शिखर सम्मेलन का संदेश… भारत विश्व-मित्र महाशक्ति

September 7, 2026
भारत-उज्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी

भारत का बढ़ा रुतबा

September 7, 2026
तेजस एमके-2 समय सीमा

तेजस एमके-2 फाइटर जेट पर पूर्व वाइस चीफ की दो टूक ‘कब तक करेंगे इंतजार’

September 7, 2026
पीएम बोले- युवाओं ने देश का मान बढ़ाया

विकसित भारत के लिए युवाओं का नशामुक्त होना जरूरी

September 7, 2026
आईसीएमआर तकनीक हस्तांतरण

आईसीएमआर की तीन जांच तकनीकें उद्योग के लिए होंगी हस्तांतरित

September 7, 2026
यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026

सीएम योगी ने चला ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक

September 7, 2026
यूपी 50 हजार छात्राओं को स्कूटी

योगी सरकार का तोहफा, 50 हजार छात्राओं को देगी स्कूटी

September 7, 2026
दिल्ली चिड़ियाघर प्रवेश क्षेत्र पुनर्विकास

आधुनिक होगा दिल्ली चिड़ियाघर

September 7, 2026
हिमाचल स्कूल एडमिशन जाति कॉलम

हिमाचल में अगले सत्र से स्कूल एडमिशन फॉर्म में नहीं होगा जाति का कॉलम

September 7, 2026
ठाणे-पालघर बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का काम तेज, 135 किमी एलिवेटेड सेक्शन निर्माणाधीन

महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन के काम ने पकड़ी रफ्तार

September 7, 2026
गूगल गुजरात के युवाओं को कुशल बनाने में सहयोग देगा

गूगल गुजरात के युवाओं को कुशल बनाने में सहयोग देगा

September 7, 2026
Monday, September 7, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

तिब्बत के लिए क्यों खास है तवांग मठ

ड्रैगन आशंकित, तिब्बती विद्रोह को भड़काने के लिए किया जा सकता है इसका इस्तेमाल

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 11, 2025
in the blitz
0
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। तिब्बत को लेकर चीन की नीयत हमेशा क्रूर रही है। इसे लेकर चीन की रणनीतियां जब-तक विश्व की आलाेचनाओं के केंद्र में रही हैं। तिब्बत का तवांग मठ अपनी खूबसूरती के साथ-साथ रणनीतिक महत्व के लिए भी निरंतर सुर्खियों में रहा है। भारत के पूर्वोत्तर में स्थित राज्य अरुणाचल में एक छोटा सा मगर पहाड़ों, घाटियों और जंगलों से घिरा एक सुंदर जिला है तवांग। इसी तवांग में एक मठ है, जिसे तवांग मठ कहा जाता है। 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित तवांग मठ अरुणाचल प्रदेश के सबसे बड़े और सबसे प्रसिद्ध मठों में से एक है। चारों ओर हिमालय के खूबसूरत नजारे अपने भीतर समेटे हुए अरुणाचल प्रदेश उगते सूरज को सबसे पहले सलाम करता है। भूटान, तिब्बत और म्यांमार की सीमाओं को छूता अरुणाचल ऐसा है कि इससे किसी को भी प्यार हो जाए। मगर, इसी अरुणाचल और उसके दिल तवांग पर चीन की गंदी नजर है। उसे तवांग से बेहद डर भी लगता है।
तवांग में ही 17वीं सदी में छठे दलाई लामा का जन्म हुआ था। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन तवांग जैसे बौद्ध धर्म के पवित्र स्थानों पर कब्जा करना चाहता है। वो ऐसा करके तिब्बत पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। 1959 में जब दलाई लामा भागकर भारत आए तो वे सबसे पहले तवांग पहुंचे थे। उन्होंने पहाड़ों को पैदल पार किया था। 1962 की लड़ाई में चीन ने तवांग पर कब्जा कर लिया था, मगर युद्धविराम के तहत समझौते में उसे अपना कब्जा छोड़ना पड़ा था। तवांग का तिब्बत के साथ गहरा जातीय और सांस्कृतिक संबंध है।
तवांग भारत का चिकननेक, स्ट्रैटेजिक पॉइंट
चीन के लिए तवांग अरुणाचल प्रदेश में घुसने का एकमात्र रास्ता है। एक तरह से यह भारत का चीन की सीमा के पास का चिकननेक है। यह भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्से में जाने का भी रास्ता है। मतलब, चीन तवांग के जरिये अरुणाचल प्रदेश और बाकी नॉर्थ-ईस्ट इंडिया में आसानी से पहुंच सकता है। ‘ता’ का मतलब है-घोड़ा और ‘वांग’ का अर्थ है-आशीर्वाद दिया हुआ। चूंकि इस स्थान को दिव्य घोड़े ने अपना आशीर्वाद दिया था, इसलिए इसका नाम तवांग पड़ा।
तवांग मठ का तिब्बत से गहरा नाता
तवांग मठ भारत का सबसे बड़ा बौद्ध मठ है। यह तिब्बत की राजधानी ल्हासा के पोताला महल के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मठ है। यह तवांग नदी की घाटी में तवांग कस्बे के निकट स्थित तवांग चू घाटी में है। यह तिब्बत और भूटान की सीमा के पास है। इस मठ को तिब्बती भाषा में गादेन नामग्याल ल्हात्से कहते हैं। इसका मतलब है-पूर्ण विजय का दिव्य स्वर्ग। इसकी स्थापना 1680-1681 में मेराक लामा लोद्रे ग्यात्सो ने की थी। यह 5वें दलाई लामा नगावांग लोबसांग ग्यात्सो की इच्छा के अनुसार हुआ था। यह वज्रयान बौद्ध धर्म के गेलुग स्कूल से जुड़ा है। इसका ल्हासा के ड्रेपुंग मठ से धार्मिक संबंध था। यह संबंध ब्रिटिश शासन के दौरान भी जारी रहा। यह मठ वास्तुकला और आध्यात्मिकता का एक उत्कृष्ट नमूना है।
चीन का डर
कुछ चीनी जानकार लोगों को यह आशंका है कि सीमा के दोनों तरफ रहने वाले लोगों के बीच जातीय संबंध है। ऐसे में तवांग का इस्तेमाल भविष्य में तिब्बती विद्रोह को भड़काने के लिए किया जा सकता है। मतलब, अगर कभी तिब्बत में कोई आंदोलन होता है, तो तवांग के लोगों को उकसाया जा सकता है, चीन को इसी बात का डर है। दरअसल, तिब्बत की राजधानी ल्हासा और तवांग के बौद्ध मठों के बीच गहरा संबंध है।
तवांग मठ: दूर से देखने में किसी किले जैसा
तवांग मठ दूर से दुर्ग या किले जैसा दिखाई देता है। इसके प्रवेश द्वार का नाम ‘काकालिंग’ है जो देखने में झोपड़ी जैसा लगता है और इसकी दो दीवारों के निर्माण में पत्थरों का प्रयोग किया गया है। इन दीवारों पर खूबसूरत चित्रकारी की गई है जो पर्यटकों को बहुत पसंद आती है। तवांग मठ तीन मंजिला है। इसके चारों ओर 925 फीट (282 मीटर) लंबी दीवार है। इस परिसर में 65 रिहायशी इमारतें हैं। मठ की लाइब्रेरी में पुरानी और कीमती धार्मिक पुस्तकें हैं। इनमें मुख्य रूप से कंग्यूर और तेंग्यूर शामिल हैं। कंग्यूर और तेंग्यूर बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण ग्रंथ हैं।
चीन बार-बार अरुणाचल पर जताता है दावा
इसी साल मई में चीन ने अरुणाचल प्रदेश में कुछ जगहों के नाम बदल दिए थे, जिसके बाद भारत और चीन के बीच विवाद बढ़ गया था। इससे पहले बीते साल अक्टूबर में दोनों देश हिमालय में अपनी चार साल पुरानी सैन्य तनातनी को कम करने के लिए सहमत हुए थे। इससे सैनिकों को पीछे हटाने में मदद मिली। लेकिन, अब चीन ने फिर से अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा जताया है। चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ कहता है और इसे दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है।

math

YOU MAY ALSO LIKE

‘झूठ की गूंज वाले निराशा फैलाने में लगे हैं’

पीएम मोदी का विदेश दौरा और एससीओ शिखर सम्मेलन का संदेश… भारत विश्व-मित्र महाशक्ति

अरुणाचल हमारा अभिन्न हिस्सा
भारत ने हमेशा से चीन के इस दावे को खारिज किया है। उस समय भी भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि कोई भी रचनात्मक नामकरण इस सच्चाई को नहीं बदल सकता कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। इससे पहले बीते साल अप्रैल में भी चीन ने अरुणाचल प्रदेश में लगभग 30 जगहों के नाम बदल दिए थे। भारत ने इसे बेतुका करार देते हुए कहा था कि यह क्षेत्र देश का अभिन्न अंग है।
भारत-चीन के बीच 3800 किमी
की लंबी सीमा
भारत और चीन के बीच 3,800 किलोमीटर (2,360 मील) लंबी सीमा है, जो ठीक से तय नहीं है। 1962 में दोनों देशों के बीच एक छोटी लेकिन भयानक लड़ाई हुई थी। इसके अलावा, दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़पें होती रही हैं। 2020 में गलवां घाटी में हुई ऐसी लड़ाई में 20 भारतीय और चार चीनी सैनिक मारे गए थे। इस तरह की घटनाओं से दोनों देशों के बीच तनाव बना रहता है।
जब अंग्रेजों ने अक्साई चिन
को भारत के हिस्से में रखा
1865 की बात है, जब ब्रिटिश सर्वेयर डब्ल्यू एच जॉनसन ने भारत-तिब्बत के बीच एक सीमारेखा खींच दी। इसके बाद 1893 में एक सीमा रेखा खींची गई, जिसे मैकार्टनी-मैकडोनाल्ड लाइन कहा जाता है, जिसमें अक्साई चिन के ज्यादातर हिस्से को चीन के क्षेत्र में दिखाया गया। 1897 में एक और बॉर्डर लाइन खींची गई, जिसमें अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाया गया। इसे जॉनसन-आर्डाच लाइन कहा जाता है।
शिमला समझौता चीन के साथ भी
1914 में सीमा विवाद को लेकर शिमला में एक समझौता हुआ था। उस वक्त ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव हेनरी मैकमोहन ने भारत और तिब्बत के बीच 890 किलोमीटर लंबी सीमा खींच दी। इसे मैकमोहन लाइन कहा गया। भारत तो इसे अब तक मानता आया। मगर, चीन ने 1950 में तिब्बत पर कब्जा कर लिया। वह अरुणाचल को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा मानता है।
चीन जताता है दावा
1947 में आजाद होने पर भारत ने जॉनसन-आर्डाघ लाइन को सीमा माना, मगर 1949 में नए-नए बने चीनी गणतंत्र ने इसे नहीं माना और अक्साई चिन को अचिन्हित करार दिया। 1962 की लड़ाई के दौरान चीन ने अक्साई चिन पर अवैध कब्जा कर लिया। वह अरुणाचल के 90 हजार वर्ग किमी के इलाके पर दावा करता है।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation