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आतंकवाद के खिलाफ सहयोग जरूरी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
March 28, 2025
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Cooperation is necessary against terrorism
दीपक द्विवेदी

हम भारत से सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में रिश्ते मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पैदा चुनौतियों का सामना किया जा सके।

न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन और अमेरिकी खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड पिछले दिनों भारत की यात्रा पर थे। यह एक सुखद संयोग रहा कि भारत ने न्यूजीलैंड और अमेरिका, दोनों से स्पष्ट तौर पर कहा कि वे अपने-अपने देशों में भारत विरोधी; विशेषकर खालिस्तानी आतंकी समूहों पर लगाम लगाएं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न्यूजीलैंड के अपने समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन से मुलाकात के बाद उनके देश में चलाई जा रही भारत विरोधी गतिविधियों से उन्हें अवगत कराया। दूसरी ओर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अमेरिकी खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड के साथ बातचीत के दौरान अमेरिका में सक्रिय खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (एसएफजे) की भारत विरोधी गतिविधियों का मुद्दा उठाया। हाल ही में अमेरिका में हिन्दू मंदिरों पर लगातार हमले हुए हैं जिनमें एसएफजे का हाथ होना बताया गया जा रहा है। रक्षा मंत्री ने हिन्दू मंदिरों को निशाना बनाए जाने पर अपनी चिंता प्रकट की और एसएफजे को आतंकी संगठन घोषित करने की मांग भी की। अभी कुछ दिनों पहले ही पंजाब के अमृतसर में भी ठाकुरद्वारा मंदिर पर ग्रेनेड से हमला किया गया था। पंजाब में नवम्बर, 2023 से अब तक यह 13वीं आतंकी घटना थी।
चिंता की बात यह है कि कुछ विदेशी ताकतें इन उग्रवादी समूहों को लॉजिस्टिक मदद मुहैया करा रही हैं। यह तथ्य जगजाहिर है कि कनाडा हो या अमेरिका अथवा ब्रिटेन, इन सभी देशों में सिख फॉर जस्टिस काफी समय से सक्रिय है और इन पर कोई अंकुश वहां नहीं लगाया जा रहा है। पंजाब में हाल ही के दिनों में जो आतंकी घटनाएं हुई हैं, उनकी जांच से यही तथ्य सामने आए हैं कि इनका संबंध प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स और बब्बर खालसा से निकला है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुलसी गबार्ड को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और बब्बर खालसा के साथ सिख फॉर जस्टिस के कनेक्शन की भी जानकारी दी। दरअसल तुलसी गबार्ड की भारत यात्रा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति के भारी शुल्क थोपने को लेकर भारत में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच सहयोगपूर्ण रिश्तों में दरार आने की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि गबार्ड ने प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से मुलाकात के दौरान और कई कार्यक्रमों में जिस तरह से आतंकवाद, रक्षा, सुरक्षा और सूचनाओं को साझा करने जैसे मुद्दों पर बेबाकी से ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताओं का जिक्र किया और भारत की चिंताओं पर सहयोग का भरोसा दिलाया; उससे स्पष्ट है कि अमेरिका के साथ भारत के रिश्तों में कड़वाहट की आशंकाओं में कोई दम नहीं है।
गबार्ड ने स्पष्ट कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप इस्लामिक आतंकवाद खत्म करने को लेकर पूर्ण रूप से गंभीर हैं क्योंकि आतंकवाद ने हमें चारों ओर से घेर रखा है। गबार्ड ने पाकिस्तान और बांग्लादेश का नाम लेकर आतंकवाद और सांप्रदायिक उन्माद से निपटने को लेकर जोर दिया। आज दोनों ही देश वैश्विक आतंकवाद की राजधानी बनते जा रहे हैं। यहां यह भी साफ करना जरूरी है कि भारत और अमेरिका के संबंध केवल व्यापारिक मुद्दों से ही नहीं जुड़े हैं बल्कि दोनों देशों के बीच आतंकवाद भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और इसके खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोनों देशों का साझा वादा भी है। गबार्ड ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका प्रथम’ की नीति को ‘अकेला अमेरिका’ के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। ऐसा समझना गलत होगा। ‘अमेरिका फर्स्ट’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘इंडिया फर्स्ट’ नीति के समान ही है। उन्होंने एक कार्यक्रम में संबोधन की शुरुआत ‘नमस्ते’ और ‘जय श्री कृष्ण’ से की और भारत-अमेरिकी रिश्तों पर मजबूती की उम्मीद जताते हुए कहा कि सहयोग को बढ़ाने के बहुत अवसर हैं। हम भारत से सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में रिश्ते मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पैदा चुनौतियों का सामना किया जा सके। सबसे खास बात यह रही कि पंजाब की आतंकी घटनाओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बड़े परिप्रेक्ष्य में देखा और गंभीरता से लिया। साथ ही दोनों देशों से स्पष्ट कहा कि वे अपने यहां ‘खालिस्तानी’ गतिविधियों पर अंकुश लगाएं।

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