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गृहयुद्ध के 14 वर्षों में 5 लाख लोगों की मौत, आधी आबादी विस्थापित

by ब्लिट्ज़ इंडिया
December 13, 2024
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ब्लिट्ज ब्यूरो

दमिश्क। सीरियाई गृहयुद्ध के 14 वर्षों में लगभग पांच लाख लोग मारे गए। देश की आधी आबादी विस्थापित हो गई। वर्ष 2011 में भड़का विद्रोह जैसे-जैसे गृहयुद्ध में तब्दील होता गया, एक करोड़ से ज्यादा सीरियाई लोग जॉर्डन, तुर्की, इराक, लेबनान व यूरोप की ओर भाग गए।
34 वर्ष की उम्र में बशर अल- असद ने वर्ष 2000 में जब सीरिया की सत्ता संभाली थी, तब लोगों को उम्मीद थी कि वह अपने पिता के तीन दशक से अधिक समय के शासन के विपरीत एक युवा सुधारक की भूमिका निभाएंगे। तब पश्चिमी देशों से शिक्षा प्राप्त कर चुके नेत्र रोग विशेषज्ञ बशर ने सौम्य व्यवहार वाले कंप्यूटर व तकनीक प्रेमी की छवि बनाई लेकिन, मार्च 2011 में जब उनकी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, तब बशर पर असहमति को कुचलने के प्रयास में अपने पिता की क्रूर रणनीति अपनाने के आरोप लगे। विद्रोह जब गृहयुद्ध में बदल गया, तो उन्होंने ईरान व रूस जैसे सहयोगियों के समर्थन से विपक्ष के कब्जे वाले शहरों को नष्ट करने लिए अपनी सेना को तैनात कर दिया। अतंरराष्ट्रीय अधिकार समूहों व अभियोजकों ने सीरिया के सरकारी हिरासत केंद्रों में यातना व न्यायेतर हत्याओं के आरोप लगाए। गृहयुद्ध में लगभग पांच लाख लोगों के मारे जाने और युद्ध से पहले 2.3 करोड़ की आबादी में से आधे लोगों के विस्थापित होने का अंदेशा जताया गया।

तुर्किए में रहते हैं सबसे ज्यादा रिफ्यूजी
सीरिया के लगभग आधे पंजीकृत शरणार्थी, या 31 लाख तुर्किये में रहते हैं, जो दुनिया में सबसे बड़ी शरणार्थी आबादी की मेजबानी करता है। तुर्की तुर्की सरकार सीरियाई लोगों को टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस देता है जिससे उन्हें कानूनी रूप से रहने की इजाजत मिलती है। मगर इससे किसी को भी देश की नागरिकता नहीं मिलती। उसके बाद दूसरे नंबर पर आता है लेबनान जोकि लगभग 7 लाख 74 हजार पंजीकृत शरणार्थियों को शरण देता है। अगर इसमें अपंजीकृत व्यक्तियों को शामिल कर लिया जाए तो कुल संख्या करीब 15 लाख हो जाती है। लेबनान में हर पांच में से एक व्यक्ति सीरियाई शरणार्थी है। दोनों देशों के बीच आवाजाही आसान थी क्योंकि सीमा पार करने के लिए एक आईडी कार्ड ही काफी था। इसलिए शरणार्थियों ने बड़ी संख्या में और तेज़ी से लेबनान में शरण लेना शुरू कर दिया।

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तीसरा देश है जर्मनी. यूनाइटेड नेशन्स के मुताबिक जर्मनी में 7 लाख 16 हजार सीरियाई शरणार्थी रहते हैं। एंजेला मर्केल की सरकार ने सीरिया के गृहयुद्ध से भाग रहे शरणार्थियों के लिए जर्मनी की सीमाओं को बंद नहीं करने का निर्णय लिया था। उस समय माहौल यह था कि जर्मनी प्रबंधन कर लेगा हालांकि अब चीजें काफी बदल गई हैं।

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