नई दिल्ली। भारत में पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय मीडिया ग्रुप ने देश के सामाजिक और आर्थिक हालात को गहराई से जानने का प्रयास किया है। इसके लिए दुनिया के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ब्लूमबर्ग ने नई दिल्ली में एक बड़ा आयोजन किया। यह कार्यक्रम था “ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम”। राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश और दुनिया के 500 से ज्यादा बड़े राजनेताओं, निवेशकों, बैंकर्स और कंपनी मालिकों, शीर्ष बिजनेस लीडर्स, डोमेन एक्सपर्ट्स पहली बार इस तरह के आयोजन में शामिल हुए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आयोजन में दुनिया को खुला संदेश दिया कि आज सवाल यह नहीं कि ताकत किसके पास है बल्कि असली सवाल यह है कि उसका इस्तेमाल किसके लिए होता है।
आज के बदले भारत में छोटे शहर का छात्र फोन पर पढ़ाई कर रहा है। सड़क किनारे ठेला लगाने वाला इस फोन से डिजिटल पेमेंट से पैसा ले रहा है और बड़ा कार शोरूम चलाने वाला भी इससे पेमेंट लेता है। देशवासियों को यह जानना भी जरूरी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में दुनिया के बड़े नेताओं के सामने भारत की कहानी यहीं से शुरू की। ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम की शुरुआत माइकल ब्लूमबर्ग ने 2018 में की थी। यह इसका आठवां साल है और भारत में यह पहली बार हो रहा है। 13 से 15 अक्टूबर तक चले फोरम का विषय था- दुनिया में ताकत के नए टूल्स कौन- कौन से हैं।
इसके लिए हमारे देश के प्रधानमंत्री का जवाब तीन शब्दों में था- ‘पावर टु एम्पावर’ यानी ताकत वह, जो दूसरों को भी ताकतवर बनाए।
भारत की मिसालें, भारत के आंकड़े
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर हिंदी में भाषण दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया भर के शीर्ष समीक्षाकारों को बताया कि 2014 से पहले देश में कुछ सौ स्टार्टअप थे। आज ढाई लाख से ज्यादा हैं। इनमें से करीब आधे छोटे शहरों और कस्बों से हैं। 45 फीसदी से ज्यादा स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार है।
यहां पर बिजली की बात भी हुई। पीएम मोदी ने बताया कि 2014 में देश में सौर और पवन जैसी अक्षय ऊर्जा की क्षमता करीब 75 गीगावाट थी जो अब करीब 300 गीगावाट है।
ब्लिट्ज के हिसाब से यह चार गुना है। बिजली क्षमता में 40 फीसदी हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों का करने का लक्ष्य 2030 तक का था। भारत ने यह नवंबर 2021 में ही, यानी नौ साल पहले पा लिया। प्रधानमंत्री ने दुनिया की शीर्ष हस्तियों को यह भी याद दिलाया कि भारत ने दुनिया को शून्य दिया, पर कभी उसकी रॉयल्टी नहीं मांगी। कोविड में 100 से ज्यादा देशों को टीके भेजे गए। और आज दुनिया की हर पांच में से एक जेनेरिक दवा भारत से जाती है।
भरोसे का सवाल
प्रधानमंत्री मोदी के इस अवसर पर दिए गए भाषण का सबसे अहम हिस्सा आज की दुनिया पर था। प्रधानमंत्री ने कहा कि सप्लाई चेन, ऊर्जा, खनिज, पेमेंट सिस्टम और तकनीक अब दबाव डालने के हथियार बन रहे हैं। ऐसे में दुनिया को सबसे ज्यादा भरोसे की जरूरत है। यहीं पर उन्होंने भारत की सोच और दृष्टि को भी रखा। उन्होंने कहा कि हम किसी की कीमत पर आगे नहीं बढ़ते। हम दुनिया के साथ और दुनिया के लिए आगे बढ़ते हैं।
इस भरोसे के पीछे पीएम मोदी ने अनेक आंकड़े भी रखे। उन्होंने बताया कि अप्रैल-जून तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी। 12-13 साल पहले चालू खाते का घाटा देश की जीडीपी के 4 फीसदी से ज्यादा था जो पिछले साल घटकर 0.61 फीसदी रह गया। विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से ज्यादा है।
आपकी जेब से जुड़ी बातें
इस मौके पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रुपये पर बात की। उन्होंने दुनिया भर के लोगों को बताया कि पिछले एक साल में रुपये की गिरावट ज्यादातर दुनिया के हालात की वजह से हुई है। रिजर्व बैंक रुपये को किसी तय स्तर पर नहीं रोक रहा। वह सिर्फ अचानक आने वाले बड़े उतार-चढ़ाव को थामेगा। उन्होंने यह भी बताया कि देश में अगले बजट की तैयारी शुरू हो गई है। शेयर बाजार से जुड़े दो टैक्स- पूंजीगत लाभ कर और प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) पर सरकार सुझाव ले रही है। उन्होंने बताया कि देश में हवाई सफर का कारोबार करीब 16 फीसदी सालाना की रफ्तार से बढ़ रहा है।
‘मिडिल पावर’ नहीं, ‘बीच की ताकत’
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस फोरम पर कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और करीब 4 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए ‘मिडिल पॉवर’ शब्द छोटा है। उनके शब्दों में, भारत आज एक ‘बीच की ताकत’ है। उन्होंने कहा कि भारत वह देश, जिसके पास दूसरों को ताकतवर बनाने की ताकत है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत अब कई सामानों के 100 फीसदी पुर्जे खुद बनाता है। अमेरिकी कंपनी सिस्को के प्रमुख चक रॉबिन्स ने इसी मंच पर ऐलान किया कि कंपनी अपनी ‘सॉवरेन’ नेटवर्क तकनीक कुछ महीनों में भारत लाएगी। इसमें देश का डेटा देश के भीतर ही रहेगा ।
इस कार्यक्रम की खास बात यह थी कि दुनिया की बड़ी पूंजी तय करने वाले लोगों के सामने भारत के जिम्मेदार नागरिकों ने अपनी कहानी खुद सुनाई, और बातचीत का विषय भी खुद तय किया। इस फोरम का समापन 15 अक्टूबर को इटली के पूर्व प्रधानमंत्री मारियो द्राघी ने किया।
फोरम की चर्चा पर एक नजर
फोरम : ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम का 8वां संस्करण, भारत में पहली बार, 13–15 अक्टूबर 2026
स्टार्टअप : 2014 से पहले कुछ सौ, अब 2.5 लाख से ज्यादा
अक्षय ऊर्जा : 2014 में करीब 75 गीगावाट, अब करीब 300 गीगावाट
चालू खाते का घाटा : पहले 4% से ज्यादा, पिछले साल 0.61%
अक्षय ऊर्जा अब : करीब 300 गीगावाट — 100%
अक्षय ऊर्जा 2014 में : करीब 75 गीगावाट आज का 25%, 2014 के बाद क्षमता करीब चार गुना हुई।














