नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर चल रही ‘सैटकॉम जंग’ के बीच राजधानी दिल्ली के ‘यशोभूमि’ कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आर्इएमसी) 2026 का 10वां संस्करण “स्केल विदाउट बाउंड्रीज” (सीमाओं से परे विस्तार) थीम के साथ शुरू होकर चार दिन तक चला और उसमें भारत के डिजिटल भविष्य का एक ऐतिहासिक और महत्वाकांक्षी खाका देश और दुनिया के सामने रखा गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया कि भारत अब केवल वैश्विक तकनीकों का उपभोक्ता नहीं रहेगा बल्कि 6जी, सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे भविष्य के क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाएगा। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब वैश्विक टेक जगत की नजरें स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क के उस हालिया बयान पर टिकी थीं जिसमें उन्होंने भारत में अपनी ‘स्टारलिंक’ को स्पेक्ट्रम और कमर्शियल मंजूरी न मिलने के पीछे कुछ ‘कुलीनपतियों’ को जिम्मेदार ठहराया था।
इस विवाद की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन और दूरसंचार मंत्रालय के स्पष्टीकरण ने भारत की संप्रभु डिजिटल नीतियों, सुरक्षा चिंताओं और एक निष्पक्ष, एकाधिकार-मुक्त बाजार की प्रतिबद्धता को मजबूती से रेखांकित किया और दुनिया को यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस क्षेत्र में भारत की सोच और उसका रोडमैप क्या हैः-
1.भारत का 6जी रोडमैप: अनुसंधान से लेकर वैश्विक मानकों तक
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने दुनिया में सबसे तेजी से 5जी नेटवर्क का विस्तार किया है। देश में करीब 55 करोड़ से अधिक 5जी उपभोक्ता हैं और 5.5 लाख से ज्यादा बेस स्टेशन काम कर रहे हैं। इस सफलता को आधार बनाकर भारत अब 6जी तकनीक के विकास में विकसित देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है।
पीएम के ब्लूप्रिंट के प्रमुख बिंदु
स्वदेशी पेटेंट और मानक निर्माण: भारत का लक्ष्य 6जी के वैश्विक मानकों (ग्लोबल स्टैंडर्ड्स) को तय करने में बड़ी भूमिका निभाना है। इसके लिए ‘भारत 6जी अलायंस’ के माध्यम से अकादमिक संस्थानों, स्टार्टअप्स और दूरसंचार कंपनियों को एक साथ लाया गया है ताकि स्वदेशी बौद्धिक संपदा का निर्माण किया जा सके।
6जी टेस्टबेड और इंफ्रास्ट्रक्चर: देश में 6जी के परीक्षणों के लिए अनुकूल इकोसिस्टम और एडवांस टेस्टबेड्स का निर्माण तेजी से जारी है। एरिक्सन जैसी वैश्विक कंपनियों ने भी भारत में दूरसंचार उपकरणों का उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की है जिससे भारत 6जी उपकरणों का एक बड़ा निर्यातक बन सके।
डिजिटल लोकतंत्रीकरण: पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि आगामी 6जी क्रांति केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि इसका उद्देश्य अंतिम छोर पर खड़े नागरिक के जीवन को आसान (ईज ऑफ डूइंग) बनाना है।
2. सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण: ‘मेक इन इंडिया’ से ‘डिजाइन इन इंडिया’ तक
सेमीकंडक्टर चिप्स को आधुनिक अर्थव्यवस्था का ‘नया तेल’ माना जाता है। आईएमसी 2026 में प्रधानमंत्री ने भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का एक विश्वसनीय और आत्मनिर्भर केंद्र बनाने का संकल्प दोहराया।
चिप डिजाइनिंग और फैब्रिकेशन: भारत सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजनाओं के तहत देश में केवल असेंबली ही नहीं बल्कि कमर्शियल चिप फैब्रिकेशन और घरेलू डिजाइनिंग क्षमताओं को मजबूत करने पर बल दिया जा रहा है।
सॉवरेन क्लाउड और क्वांटम संचार: अगली पीढ़ी के नेटवर्क के लिए हार्डवेयर के साथ सुरक्षित सॉफ्टवेयर अवसंरचना (सावरेन क्लाउड) और क्वांटम कम्युनिकेशन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ठोस रणनीतियां पेश कीं।
3. एलन मस्क का ‘ओलिगार्क’ बयान और भारत की नीतिगत स्थिति
आईएमसी 2026 की शुरुआत से ठीक पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एलन मस्क ने एक पोस्ट के जवाब में आरोप लगाया कि भारत में “कुछ कुलीनपति” (इशारा रिलायंस जियो के मुकेश अंबानी और एयरटेल के सुनील भारती मित्तल की ओर था) अपने एकाधिकार को बनाए रखने के लिए स्टारलिंक की सेवाओं को ब्लॉक कर रहे हैं। इस विवाद ने आईएमसी में सैटेलाइट कम्युनिकेशन (सैटकॉम) नीति को सबसे चर्चित मुद्दा बना दिया।
भारत सरकार का करारा जवाब: ‘कोई एकाधिकार नहीं’
इस तीखे संदर्भ पर केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आईएमसी 2026 के मंच से स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार (मोनोपोली) की अनुमति नहीं देता है। उन्होंने साफ किया कि स्टारलिंक समेत तीन प्रमुख कंपनियों- स्टारलिंक, जियो सैटकॉम और भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब को प्रारंभिक लाइसेंस और प्रोविजनल स्पेक्ट्रम जारी किए जा चुके हैं।
सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं
दूरसंचार राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने स्पष्ट किया कि स्टारलिंक या किसी अन्य कंपनी के कमर्शियल लॉन्च में देरी का कारण कोई कॉर्पोरेट प्रतिद्वंद्विता नहीं बल्कि गृह मंत्रालय की सुरक्षा जांच है और इस विषय पर भारत सरकार की नीति बिल्कुल साफ है:-
समान अवसर: सभी घरेलू और विदेशी कंपनियों को एक ही प्रक्रिया से गुजरना होगा।
डेटा संप्रभुता: हालांकि स्टारलिंक की वाइस प्रेसिडेंट लॉरेन ड्रेयर ने आईएमसी में बताया कि कंपनी ने भारत के भीतर 20 गेटवे साइट्स बनाई हैं और भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा देश के अंदर रखने के लिए विशेष सुरक्षा नियंत्रण विकसित किए हैं लेकिन सरकार पूरी सुरक्षा जांच के बाद ही अंतिम मंजूरी देगी।
स्पेक्ट्रम आवंटन: भारतीय दूरसंचार कंपनियां लंबे समय से मांग कर रही हैं कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के लिए नीलामी का रास्ता चुना जाए जबकि स्टारलिंक प्रशासनिक आवंटन के जरिए एक तय फीस पर स्पेक्ट्रम चाहती है।
4. सुरक्षा, एआई और साइबर अपराधों के खिलाफ वैश्विक ढांचा
प्रधानमंत्री ने अपने ब्लूप्रिंट में कनेक्टिविटी और इनोवेशन के साथ-साथ ‘डिजिटल ट्रस्ट’ (सुरक्षा और विश्वास) को सबसे ऊपर रखा। जीएसएमए के बोर्ड सदस्यों के साथ उन्होंने साइबर धोखाधड़ी से नागरिकों की रक्षा के लिए एक सतत अलर्ट प्रणाली बनाने, डीपफेक तथा एआई-जनित भ्रामक सामग्री के मूल स्रोत का पता करने वाली तकनीक विकसित करने को कहा एवं उभरती तकनीकों के नियमन के लिए एक समान वैश्विक नियामक ढांचा बनाने का आह्वान किया।
‘स्केल विदाउट बाउंड्रीज’ का संदेश
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का 10वां संस्करण इस बात का प्रमाण है कि भारत तकनीक के मामले में अब दुनिया के पीछे चलने वाला देश नहीं है। एलन मस्क के बयानों और दबावों के बावजूद, भारत सरकार ने यह साफ कर दिया है कि उसकी नीतियां किसी एक व्यक्ति या कंपनी के हिसाब से नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और भारत के 140 करोड़ नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं।
6जी और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में पेश किया गया भारत का भविष्य का ब्लूप्रिंट पूरी तरह से आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और लोकतांत्रिक तकनीक पर आधारित है जो भारत को आगामी दशक में एक अग्रणी डिजिटल महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगा।














