नई दिल्ली, 17 अक्टूबर। लखनऊ, गोरखपुर या पटना की किसी बस्ती में किराये की कोठरी में रहने वाला परिवार अब अपने पक्के घर का सपना देख सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 की केंद्रीय मंजूरी और निगरानी समिति ने 11 राज्यों के लिए 1.93 लाख से ज्यादा घर मंजूर किए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश को 73,182 और बिहार को 52,866 घर मिले हैं। यह जानकारी आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने 16 अक्टूबर 2026 को दी।
ब्लिट्ज के हिसाब से दोनों राज्यों को कुल मिलाकर 1.26 लाख घर मिले। यह इस दौर का 65.1 फीसदी है। बाकी घर तेलंगाना (18,120), पश्चिम बंगाल (16,559), गुजरात (14,290), आंध्र प्रदेश (6,560), छत्तीसगढ़ (4,670), ओडिशा (3,126), कर्नाटक (3,116), मिजोरम (1,003) और सिक्किम (29) को मिले हैं।
घर किसके नाम होगा
सबसे बड़ी बात घर के कागज में है। योजना के दूसरे चरण में अब तक 20.80 लाख घर मंजूर हुए हैं। इनमें से 20.16 लाख घर, यानी 97 फीसदी, किसी महिला के नाम पर हैं — अकेले या पति के साथ। जिस घर की रजिस्ट्री महिला के नाम हो, उस पर वह कर्ज ले सकती है। वह घर उसकी अपनी पूंजी बनता है।
योजना में 1.81 लाख घर बुजुर्गों के लिए, 3.61 लाख अनुसूचित जाति, 1.06 लाख अनुसूचित जनजाति और 9.14 लाख अन्य पिछड़ा वर्ग के परिवारों के लिए मंजूर हुए हैं।
कौन ले सकता है फायदा
सालाना नौ लाख रुपये तक कमाने वाला शहरी परिवार इस योजना में आ सकता है। घर बनाने या खरीदने के लिए हर परिवार को ढाई लाख रुपये तक की मदद मिलती है। जो परिवार बैंक से 25 लाख रुपये तक का होम लोन लेता है, उसे ब्याज पर 1.80 लाख रुपये तक की छूट मिल सकती है।
नए मंजूर घर दो हिस्सों में हैं। एक में परिवार अपनी जमीन पर खुद घर बनाता है और सरकार पैसा देती है। दूसरे में सरकार और बिल्डर मिलकर सस्ते घर बनाते हैं। दोनों हिस्से सबसे कमजोर आय वाले परिवारों के लिए हैं।
सितंबर 2024 में शुरू हुए दूसरे चरण का लक्ष्य एक करोड़ परिवार हैं। दो साल में करीब पांचवां हिस्सा मंजूर हो चुका है। मंत्रालय के मुताबिक दोनों चरणों को मिलाकर 1.27 करोड़ से ज्यादा घर मंजूर हुए और 1.01 करोड़ बन चुके हैं।
एक नजर में
•दसवें दौर में मंजूर घर : 1,93,521 (11 राज्य)
•दूसरे चरण में कुल मंजूर घर : 20.80 लाख
•महिला के नाम घर : 20.16 लाख (97%)
तुलना
•उत्तर प्रदेश : 73,182 घर — सबसे ज्यादा, 100%
•बिहार : 52,866 घर — यूपी का 72%
•तेलंगाना : 18,120 घर — यूपी का 25%
•उत्तर प्रदेश को बिहार से 38 फीसदी ज्यादा घर मिले।
हमारा हिसाब
(73,182 + 52,866) ÷ 1,93,521 = 65.1%। हर तीन में से करीब दो घर यूपी और बिहार को।
भारत को क्या मिला
शहरों के गरीब परिवारों को पक्की छत, और ज्यादातर घर महिलाओं के नाम।
ब्लिट्ज की सराहना
हाउसिंग फॉर ऑल मिशन की टीम और 11 राज्यों के मिशन निदेशक।
आंकड़े आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की 16 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति (पीआईबी 2324617) से; pib.gov.in और ddnews.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज की सलाह
मंत्रालय राज्यवार यह भी बताए कि कितने घर बनकर परिवारों को सौंपे जा चुके हैं। इससे लोग देख पाएंगे कि कौन-सा राज्य मंजूरी को चाबी में बदल रहा है।
निजी शिपयार्ड का पहला बड़ा युद्धपोत नौसेना में
कारवार, 17 अक्टूबर। अब तक देश के बड़े युद्धपोत सरकारी शिपयार्ड में ही बनते थे। आईएनएस समर्थक ने यह सिलसिला तोड़ा है। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर इसे नौसेना में शामिल किया। रक्षा मंत्रालय ने इसे किसी भारतीय निजी शिपयार्ड में बना पहला बड़ा युद्धपोत बताया है।
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जहाज को लार्सन एंड टुब्रो ने डिजाइन किया और बनाया। मंत्रालय के मुताबिक इसमें 75 फीसदी से ज्यादा सामान स्वदेशी है। समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन भी मौजूद थे। आकाशवाणी के मुताबिक जहाज तमिलनाडु के कट्टुपल्ली में बना और करीब 107 मीटर लंबा है।
समर्थक का खास काम है देश में बने हथियारों और सेंसर की जांच। हैदराबाद या बेंगलुरु की कोई कंपनी नया रडार या सोनार बनाए, तो उसे समुद्र में परखना पड़ता है। अब इसके लिए एक अलग जहाज होगा। इससे प्रयोगशाला से ऑर्डर तक का रास्ता छोटा होगा। जहाज समुद्री निगरानी, गश्त और आपदा में राहत का काम भी करेगा।
निजी शिपयार्ड का युद्धपोत बनाना नौसेना के लिए दूसरा रास्ता खोलता है। सरकारी शिपयार्ड पहले से भरे हैं। हर नया शिपयार्ड अपने साथ स्टील, पंप, केबल और इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली छोटी कंपनियों की पूरी कतार लाता है। यानी नौकरियां भी।
ब्लिट्ज की सलाह
रक्षा मंत्रालय इस श्रेणी के हर जहाज का ठेका, लॉन्च और डिलीवरी की तारीख सार्वजनिक करे। तब निजी शिपयार्ड को और जहाज देने का फैसला ठोस आंकड़ों पर टिकेगा।
25 आईटीआई बदलेंगे, उद्योग बनेंगे साझेदार
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर। पारादीप, जाजपुर या कठुआ का कोई नौजवान अब आईटीआई में दाखिला लेगा, उसकी मशीनें और कोर्स चुनने में एक बड़ी कंपनी का हाथ होगा। पीएम-सेतु योजना की राष्ट्रीय संचालन समिति ने पांच आईटीआई समूहों के लिए 1,194.92 करोड़ रुपये की योजनाएं मंजूर की हैं। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने 16 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी दी।

हर समूह में एक बड़ा आईटीआई केंद्र है और चार छोटे आईटीआई उससे जुड़े हैं। ओडिशा के कटक समूह में टाटा स्टील फाउंडेशन साझेदार है (240.50 करोड़ रुपये)। पुणे में बीवीजी इंडिया (241 करोड़), छत्रपति संभाजीनगर में बेलराइज इंडस्ट्रीज (238.01 करोड़), जम्मू में ईगल इन्फ्रा इंडिया (240 करोड़) और श्रीनगर में इंदरदीप इन्फ्रा इंडिया (235.41 करोड़) साझेदार हैं।
ब्लिट्ज के हिसाब से 25 आईटीआई के हिस्से में औसतन 47.8 करोड़ रुपये आते हैं। अकेले जम्मू-कश्मीर के दो समूहों को 475.41 करोड़ रुपये मिले हैं। योजना में अब तक कुल 3,687 करोड़ रुपये मंजूर हो चुके हैं। पुणे समूह में औंध का महिला आईटीआई भी शामिल है।
मंत्रालय की सचिव देबश्री मुखर्जी ने कहा कि मकसद प्रशिक्षण सुधारना और युवाओं को ऐसा हुनर देना है जिससे बेहतर रोजगार मिले। उन्होंने हर समूह से कम से कम एक ऐसा ट्रेड जोड़ने को कहा जो वर्ल्डस्किल्स के स्तर का हो। योजना के तहत अब तक 3,744 प्रशिक्षकों को भी नए सिरे से तैयार किया गया है।
ब्लिट्ज की सलाह
प्रशिक्षण महानिदेशालय हर समूह का प्लेसमेंट आंकड़ा पहले बैच के एक साल बाद जारी करे। तब पता चलेगा कि कंपनी की साझेदारी ने कितनी नौकरियां दीं।
रेलवे की बेटियों ने कबड्डी में जिताया सोना
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर। एशियाई खेलों का फाइनल 26 सितंबर 2026 को जापान के आइची-नागोया में खेला गया। उसमें भारत की महिला कबड्डी टीम ने ईरान को 37–34 से हराकर सोना जीता। इस जीत में भारतीय रेलवे का बड़ा हाथ है। रेल मंत्रालय के मुताबिक टीम की मुख्य कोच नीता मोरेश्वर दडवे और पांच खिलाड़ी रेलवे में काम करती हैं।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल भवन में टीम से मुलाकात की। एक्स पर उन्होंने लिखा, “देश की बेटियों ने बढ़ाया तिरंगे का मान।” टीम की कप्तान पुष्पा राणा हैं।
रेलवे की खिलाड़ियों में दक्षिण मध्य रेलवे की रितु नेगी और पिंकी रॉय, उत्तर रेलवे की पूजा, और पश्चिम रेलवे की सोनाली विष्णु शिंगटे और राज रानी शामिल हैं। कोच नीता दडवे दक्षिण मध्य रेलवे से हैं।
रेलवे बरसों से खिलाड़ियों को पक्की नौकरी देता रहा है। गांव-कस्बे की लड़की के लिए यही नौकरी अक्सर खेल जारी रखने की सबसे बड़ी वजह बनती है।
ब्लिट्ज की सलाह
रेलवे खेल संवर्धन बोर्ड हर साल बताए कि उसने कितनी महिला खिलाड़ियों को खेल कोटे से नौकरी दी। इससे दूसरे सरकारी उपक्रमों को भी राह मिलेगी।
प्रवासियों ने बैंकों में रखे 83 अरब डॉलर
मुंबई, 17 अक्टूबर। दुबई में काम करने वाला बेटा या टोरंटो में बसी बेटी अपनी बचत भारत के बैंक में रखते हैं। इसका फायदा देश को भी होता है। अगस्त 2026 में विदेश में बसे भारतीयों ने भारतीय बैंकों में शुद्ध रूप से 83 अरब डॉलर जमा किए। पिछले साल अगस्त में यह रकम एक अरब डॉलर थी। यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक ने 15 अक्टूबर को जारी किया।
अप्रैल से अगस्त के पांच महीनों में प्रवासियों की जमा 119.2 अरब डॉलर रही, जबकि पिछले साल इन्हीं महीनों में 5.6 अरब डॉलर थी। इसी पैसे के दम पर अगस्त में देश के विदेशी लेन-देन में 45.4 अरब डॉलर की बचत रही।
अगस्त में देश ने 44.7 अरब डॉलर का सामान बेचा। यानी उस महीने प्रवासियों की जमा पूरे माल निर्यात से भी ज्यादा रही। रिजर्व बैंक ने यह नहीं बताया कि इतनी बड़ी रकम किस योजना में आई। यह ब्योरा आगे के आंकड़ों में देखना होगा।
एक बात और। 9 अक्टूबर को खत्म हफ्ते में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 8.58 अरब डॉलर घटकर 726.03 अरब डॉलर रह गया। फिर भी यह मार्च के आखिर से 34.92 अरब डॉलर ऊपर है।
एक नजर में
•प्रवासियों की जमा, अगस्त 2026 : 83.0 अरब डॉलर
•विदेशी लेन-देन में बचत, अगस्त 2026 : 45.4 अरब डॉलर
•विदेशी मुद्रा भंडार, 9 अक्टूबर 2026 : 726.03 अरब डॉलर
तुलना
•प्रवासियों की जमा, अगस्त 2026 : 83.0 अरब डॉलर — 100%
•माल निर्यात, अगस्त 2026 : 44.7 अरब डॉलर — जमा का 54%
•प्रवासियों की जमा माल निर्यात से 85.7 फीसदी ज्यादा रही।
हमारा हिसाब
अप्रैल–अगस्त : 119.2 ÷ 5.6 = करीब 21 गुना। पिछले साल से 21 गुना ज्यादा पैसा।
भारत को क्या मिला
मुश्किल दौर में देश के बैंकों में डॉलर का मजबूत सहारा।
ब्लिट्ज की सराहना
दुनिया भर में बसे भारतीय, जिनकी बचत देश के काम आई।
आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक की 15 और 16 अक्टूबर की विज्ञप्तियों से; rbi.org.in पर जांचे।
ब्लिट्ज की सलाह
रिजर्व बैंक प्रवासियों की जमा का योजना-वार ब्योरा भी जारी करे। तब पता चलेगा कि कितना पैसा लंबे समय तक टिकेगा।
केरल का मसाला न्यूजीलैंड जाएगा, बिना टैक्स
कोच्चि, 17 अक्टूबर। केरल के मसालों से भरी पहली खेप न्यूजीलैंड के लिए रवाना हो गई है। यह भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के तहत केरल की पहली और देश की शुरुआती खेपों में से एक है। कोच्चि के विदेश व्यापार दफ्तर ने 16 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी दी। निर्यात सिंथाइट इंडस्ट्रीज ने किया है।
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समझौते पर 27 अप्रैल 2026 को दस्तखत हुए थे। दोनों देशों ने 21 सितंबर को इसे मंजूरी दी। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 21 सितंबर को कहा था कि भारत से न्यूजीलैंड जाने वाला हर सामान टैक्स से मुक्त होगा। आकाशवाणी के मुताबिक समझौते में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश की बात भी है।
अभी न्यूजीलैंड के बाजार में भारत का हिस्सा करीब 1.5 फीसदी है। यह बात सीमा शुल्क आयुक्त टी. तिजू ने कोच्चि में कही। मसाले, कपड़े, चमड़े का सामान, इंजीनियरिंग उत्पाद और दवाएं वहां सस्ती पहुंचेंगी। इसका सीधा फायदा केरल के किसान और देश के छोटे निर्यातक को मिल सकता है।
ब्लिट्ज की सलाह
विदेश व्यापार महानिदेशालय हर महीने बताए कि इस समझौते के तहत किस राज्य से कितना माल गया। इससे पीछे रह गए निर्यातकों तक मदद पहुंचाना आसान होगा।
आयुर्वेद के 56 लाख मरीज
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर। सरिता विहार के अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में 2020 में करीब 1.23 लाख मरीज आए थे। 2026 के पहले नौ महीनों में ही यह संख्या 5.40 लाख पार कर गई। यह जानकारी आयुष मंत्रालय ने 16 अक्टूबर 2026 को दी। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर (वैद्य) पी. के. प्रजापति के मुताबिक कोविड के दौरान और उसके बाद मरीज चार गुना से ज्यादा बढ़े।

दस साल में संस्थान और उससे जुड़े केंद्रों में 37.74 लाख मरीजों का इलाज हुआ। इनमें 30.37 लाख मुख्य परिसर में आए। सफदरजंग अस्पताल, झज्जर का राष्ट्रीय कैंसर संस्थान और मसूरी की प्रशासनिक अकादमी भी इसके केंद्रों में हैं। रोज करीब 3,000 मरीज ओपीडी में देखे जा सकते हैं और 200 बिस्तर हैं।
जामनगर का आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान (आईटीआरए) देश का पहला आयुर्वेद संस्थान है जिसे राष्ट्रीय महत्व का दर्जा मिला। छह साल में इसकी 22 ओपीडी में 18.48 लाख मरीज आए और 27,520 भर्ती हुए। इसके 300 बिस्तर वाले अस्पताल को एनएबीएच मान्यता है। स्थापना दिवस पर आयुर्वेद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर चर्चा हुई।
दोनों संस्थानों की ओपीडी में मिलाकर 56 लाख से ज्यादा मरीज आए — दिल्ली में दस साल और जामनगर में छह साल में। पर दोनों विज्ञप्तियों में यह नहीं है कि इनमें से कितने मरीज किसी क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा बने। भरा अस्पताल और पक्का वैज्ञानिक सबूत — इन दोनों के बीच की दूरी ही अगले दशक का काम है।
ब्लिट्ज की सलाह
आयुष मंत्रालय दोनों संस्थानों से हर साल ट्रायल, शोध-पत्र और पेटेंट की गिनती भी जारी करवाए। मरीजों की गिनती के साथ सबूत की गिनती भी दिखे।
एमपी के नलों का ऑडिट
भोपाल, 17 अक्टूबर। टीकमगढ़ जिले के धरमपुरा गांव को “हर घर जल” का प्रमाणपत्र मिल चुका था। यानी कागज पर हर घर में नल से पानी था। पर जब ऑडिट टीम और अफसर मौके पर पहुंचे, तो योजना छह महीने से बंद मिली। यह बात भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट नंबर 5, 2026 में दर्ज है।
यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के 2019-20 से 2023-24 तक के काम की जांच है। इसे 22 जुलाई 2026 को विधानसभा में रखा गया।
कागज पर नल, जमीन पर क्या
राज्य में 1.11 करोड़ ग्रामीण घर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2024 तक 60.90 लाख घरों में नल पहुंचा, और 13.53 लाख में पहले से था। राज्य का कवरेज 69 फीसदी रहा, जबकि देश का करीब 80 फीसदी।
ऑडिट में पाया गया कि 11.94 लाख ऐसे कनेक्शन भी पोर्टल पर मिशन के खाते में गिने गए, जो लोगों ने खुद लगवाए थे। जांचे गए 28 में से 7 स्थलों पर योजना बंद मिली।
गिलास के पानी की जांच
मिशन में पानी की जांच के लिए दो फीसदी तक पैसा रखा जा सकता है। मध्य प्रदेश ने इस पर सिर्फ 0.38 फीसदी खर्च किया। जल निगम के ट्रीटमेंट प्लांट की लैब ने तय जांचों में से सिर्फ 11 से 19 फीसदी जांचें कीं। डिंडोरी में फ्लोराइड वाले 33 में से 18 गांवों तक ही फ्लोराइड हटाने की मशीन पहुंची।
पानी के स्रोत भी कमजोर पड़े। विदिशा की सभी 522 और झाबुआ की 716 में से 664 एक-गांव योजनाओं को भूजल की कमी के कारण बड़ी योजनाओं में बदलना पड़ रहा है। ऑडिट के मुताबिक ऐसे गांवों में बोरवेल पर खर्च हुए 19.23 करोड़ रुपये बेकार गए। गांवों में 50,000 प्लंबर-मिस्त्री तैयार करने थे, 11,271 ही तैयार हुए।
सरकार ने क्या कहा
रिपोर्ट के मुताबिक लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव ने धरमपुरा मामले की जांच के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि लगातार पानी देने के लिए रखरखाव नीति तैयार है और जल्द लागू होगी। कई बिंदुओं पर राज्य सरकार का जवाब रिपोर्ट बनने तक आना बाकी था।
सीएजी की छह सलाहें सीधी हैं। योजना गांव से ऊपर की ओर बने और उसमें पानी के स्रोत का ध्यान रहे। गांव वालों को जोड़ा जाए। मदद करने वाली एजेंसियां समय पर लगें। नलों की ऑनलाइन निगरानी हो। स्कूल और आंगनबाड़ी में पहले नल लगें। और हर लैब को हर जांच की पूरी मान्यता मिले।
एक नजर में
•ग्रामीण घर : 1.11 करोड़
•राज्य का नल कवरेज : 69% (देश करीब 80%)
•पोर्टल पर गिने गए निजी कनेक्शन : 11,94,063
•जांचे गए स्थलों में बंद : 28 में से 7
तुलना
•पानी की जांच के लिए तय पैसा : 2% तक — 100%
•असल में खर्च : 0.38% — तय रकम का 19%
•जांच के लिए रखे पैसे का करीब पांचवां हिस्सा ही खर्च हुआ।
हमारा हिसाब
11,271 ÷ 50,000 = 22.5%। गांव के मिस्त्री तैयार करने का लक्ष्य करीब एक चौथाई भी पूरा नहीं।
भारत को क्या मिला
गांव के हर नल में साफ पानी पहुंचाने का साफ, सार्वजनिक नक्शा।
ब्लिट्ज की सराहना
मध्य प्रदेश में सीएजी की ऑडिट टीम, जिसने 32 गांवों के 629 घरों का सर्वे भी किया।
आंकड़े सीएजी की रिपोर्ट नंबर 5, 2026 (जल जीवन मिशन, मध्य प्रदेश) से; cag.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज की सलाह
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग हर जिले के चालू नलों की संख्या और पानी की जांच के नतीजे सार्वजनिक करे। साथ ही पोर्टल पर गिने गए निजी कनेक्शन हटाए। तभी ऑडिट चालू नल में बदलेगा।











