नई दिल्ली। तपती भट्टी और पसीने से लथपथ हाथों में छाले, आम मजदूर की यही दिनचर्या है लेकिन जब इसी माहौल से निकलकर कोई देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी क्रैक कर ले तो वह चमत्कार से कम नहीं लगता। सुब्रमण्यम भारती के पिता मारियाप्पन ईंन्ट भट्ठे पर दिहाड़ी मजदूर हैं। सुब्रमण्यम ने पिता की फटी बिवाइयों और मां के त्याग को अपनी ताकत बनाया। 18 की उम्र में उन्होंने अफसर बनने का जो सपना देखा था, आखिरकार उसे हकीकत में बदल दिया।
तमिल मीडियम से स्कूली पढ़ाई और इतिहास में बीए करने वाले सुब्रमण्यम भारती के पास न तो महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस थी और न ही बड़े शहरों का माहौल। उनके पास था तो सिर्फ अनुशासन और अटूट संकल्प। यूपीएससी रिजल्ट 2025 में 778वीं रैंक हासिल कर उन्होंने साबित कर दिया कि सफलता किसी विरासत की मोहताज नहीं होती। यह एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि उन तमाम सरकारी योजनाओं की भी जीत है, जिन्होंने एक गरीब मेधावी छात्र को सही दिशा दिखाई।
18 की उम्र में शुरू किया सफर
सुब्रमण्यम भारती ने अपनी तैयारी तब शुरू की थी, जब उनके पास कोई खास मार्गदर्शन नहीं था। महज 18 साल की उम्र में उन्होंने यूपीएससी की किताबों से नाता जोड़ लिया था। शुरुआत में उनके पास कोई खास रोडमैप नहीं था, लेकिन उनके माता-पिता का संघर्ष उन्हें प्रेरित करता रहा। बिना किसी बड़ी कोचिंग के उन्होंने खुद को इस काबिल बनाया कि वे देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा का पैटर्न समझ सकें।
तमिल मीडियम और ‘नान मुधलवन’ योजना का साथ
भारती की सफलता उन उम्मीदवारों के लिए मिसाल है जो भाषा को अपनी कमजोरी मानते हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई तमिल मीडियम से की। इसके बाद उन्होंने इतिहास में स्नातक की डिग्री ली। उनकी इस यात्रा में तमिलनाडु सरकार की ‘नान मुधलवन’ योजना ने संजीवनी का काम किया। इस सरकारी पहल ने उन्हें न केवल जरूरी स्टडी मटीरियल उपलब्ध कराया, बल्कि सही कोचिंग और दिशा-निर्देश भी दिए, जिससे वे पहले ही प्रयास में सफल हो सके।
पिता की मजदूरी और बेटे का अनुशासन
भारती के पिता मारियाप्पन आज भी ईंन्ट भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। आर्थिक तंगी का आलम यह था कि घर की बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी बड़ी चुनौती थी। मारियाप्पन बताते हैं कि उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई के लिए जो संभव हो सका, वह किया, लेकिन असली मेहनत भारती की ही थी।
778वीं रैंक: अब जमीनी स्तर पर करेंगे सेवा
यूपीएससी 2025 की परीक्षा में सुब्रमण्यम भारती ने 778वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने सिविल सेवा को इसलिए चुना क्योंकि वे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की मदद करना चाहते हैं। उनका मानना है कि एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में वे उन समस्याओं का समाधान कर पाएंगे जिन्हें उन्होंने बचपन से देखा है।]
सफलता की स्ट्रैटेजी
अपनी स्ट्रैटेजी शेयर करते हुए सुब्रमण्यम भारती ने बताया कि यूपीएससी के लिए ‘स्टैटिक सब्जेक्ट्स’ पर पकड़ होना सबसे जरूरी है। पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रो का गहराई से विश्लेषण किया और परीक्षा के बदलते पैटर्न को समझा। अगर आपके पास सही मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत का जज्बा है तो हालात आपको रोक नहीं सकते।














