नई दिल्ली। राजस्थान के जोधपुर की गलियों में सिलाई मशीन की खट-खट अब विजय गान में बदल चुकी है। जिस हाथ ने कल तक लेडीज सूट और कुर्तियों की सिलाई की, वही हाथ अब राजस्थान प्रशासनिक सेवा के जरिए शासन की कमान संभालेंगे। महेंद्र भाटी की सक्सेस स्टोरी उन करोड़ों युवाओं के लिए उम्मीद है, जो अभावों को अपनी किस्मत मान बैठते हैं। महेंद्र ने साबित कर दिया कि इरादे फौलादी हों तो सिलाई मशीन की मेज भी स्टडी टेबल बन सकती है।
उनका सफर फिल्मी कहानी से कम रोमांचक नहीं। पेट्रोलियम इंजीनियरिंग की पढ़ाई, फिर साधारण नौकरी और उसके बाद परिवार का हाथ बंटाने के लिए सिलाई का काम लेकिन उनकी आंखों में जो सपना पल रहा था, उसे हकीकत में बदलने का जुनून ऐसा था कि उन्होंने हार नहीं मानी। आरएएस 2023 में 1323वीं रैंक आने पर भी वे संतुष्ट नहीं हुए और दोबारा मेहनत की। नतीजा सबके सामने है- आरएएस 2024 में 72वीं रैंक के साथ महेंद्र भाटी पूरे प्रदेश का गौरव बन चुके हैं। उनका पूरा परिवार सिलाई के काम से जुड़ा है। महेंद्र भाटी खुद भी लड़कियों के कपड़े सिलने का काम करते थे। कैंची और धागों के बीच रहने वाले इस युवा ने रातों को किताबों से अपनी तकदीर लिखने का फैसला किया और कामयाबी पाई।














