नई दिल्ली। भारत को समंदर में गैस का बड़ा भंडार हाथ लगा है। महानदी बेसिन में ओएनजीसी को गहरे समुद्र में ये कामयाबी मिली है, एक ऐसे वक्त में जब भारत समेत दुनिया के कई देश तेल और गैस के सप्लाई संकट से जूझ रहे हैं, गैस का भंडार मिलना बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। सरकारी तेल और गैस कंपनी ओएनजीसी को गहरे समुद्र में हाइड्रोकार्बन की तलाश के दौरान बड़ी कामयाबी मिली है। कंपनी ने डीपवॉटर इलाके में गैस की खोज की है।
ओएनजीसी के डीपवॉटर कैंपेन का पहला कुआं
ये ओएनजीसी के मौजूदा डीपवॉटर कैंपेन का पहला कुआं है। कंपनी के मुताबिक, इस खोज से महानदी बेसिन में डीपवॉटर संसाधनों के विकास की संभावनाएं बढ़ी हैं। ओएनजीसी के मुताबिक, एमपीडब्ल्यू -28 कुएं से फिलहाल अच्छी दर से गैस का फ्लो हो रहा है और रिजर्वायर प्रेशर भी मजबूत बना हुआ है।
अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते हॉर्मूज स्ट्रेट में तनाव और सऊदी अरब पर हमलों के बीच गैस की सप्लाई की चुनौती बड़ी हो रही है और इससे पैदा होने वाले गैस-संकट के बीच गैस का ये भंडार मिलना बहुत बड़ी राहत है।
कहां मिली गैस?
ओएनजीसी ने बताया कि एमडीडब्ल्यू-28 कुएं को महानदी बेसिन के डीप ऑफशोर इलाके में ड्रिल किया गया है।
इस कुएं की ड्रिलिंग के साथ ओएनजीसी ने अपने मौजूदा डीपवॉटर अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान को 25 जुलाई 2026 को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लॉन्च किया था। ये अभियान सरकार की समुद्र मंथन पहल के अनुरूप चलाया जा रहा है। इसका फोकस भारत के समुद्री और गहरे समुद्री इलाकों में तेल एवं गैस संसाधनों की खोज को बढ़ावा देना है।
18 सितंबर को कुएं से शुरू हुआ गैस फ्लो
ओएनजीसी के मुताबिक, सब-सर्फेस डेटा के मूल्यांकन के बाद 18 सितंबर 2026 को एमडीडब्ल्यू -28 कुएं का भेदन किया गया।
इसके बाद कुएं से गैस का फ्लो शुरू हुआ। कंपनी ने बताया कि फिलहाल कुएं से अच्छी गैस दर मिल रही है और रिजर्वायर प्रेशर भी स्वस्थ स्तर पर है। ये शुरुआती नतीजे महानदी बेसिन के इस डीपवॉटर इलाके में हाइड्रोकार्बन संसाधनों की संभावनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
ओएनजीसी के अधिकारियों ने किया दौरा
ऑपरेशन के दौरान ओएनजीसी के चेयरमैन अरुण कुमार सिंह, डायरेक्टर, विक्रम सिंह और डायरेक्टर ओपी सिन्हा ने ड्रिलशिप का दौरा किया। उन्होंने वहां मौजूद क्रू से मुलाकात की और ऑपरेशन में शामिल टीम का उत्साह बढ़ाया।
दूसरी खोजों के साथ मिलकर हो सकता है विकास
ओएनजीसी के मुताबिक, एमडीडब्ल्यू -28 की ये खोज इस इलाके में हुई दूसरी खोजों के साथ मिलकर विकास के लिए एक संभावित उम्मीदवार हो सकती है।
कंपनी ने कहा कि पीएनजी रुल्स , 2025 के तहत साझा सुविधाओं यानी शेयर्ड फैसिलिटीज का इस्तेमाल कर इन डीपवॉटर संसाधनों को उत्पादन में लाने की संभावना बन सकती है। इससे अलग-अलग खोजों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का साझा इस्तेमाल किया जा सकेगा और संसाधनों को उत्पादन में लाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है।
भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए क्यों अहम?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में देश के समुद्री और डीपवॉटर इलाकों में घरेलू तेल एवं गैस संसाधनों की खोज को ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
ओएनजीसी ने कहा है कि कंपनी डीपवाटर और अल्ट्रा-डीपवाट फ्रंटियर्स में हाइड्रोकार्बन की तलाश जारी रखेगी। कंपनी का लक्ष्य देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में घरेलू उत्पादन की भूमिका बढ़ाना है।














