नई दिल्ली। टाटा ट्रस्ट नहीं चाहता कि टाटा संस का आईपीओ आए। टाटा संस टाटा समूह की कंपनियों का प्रमोटर है। टाटा ट्रस्ट की इसमें 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। रिजर्व बैंक ने टाटा संस को एनबीएफसी माना है क्योंकि उसके पास इन्वेस्टमेंट के अलावा कोई बिज़नेस नहीं है। उसकी कमाई टाटा कंपनियों के शेयरों पर मिलने वाले डिवीडेंड से होती है। रिजर्व बैंक ने बड़ी फाइनेंस कंपनी होने के कारण टाटा संस को आईपीओ निकालने का आदेश दिया है।
टाटा संस का बोर्ड इसके पक्ष में है जबकि नोएल टाटा विरोध में। उनका कहना है कि आईपीओ लाने से टाटा का चैरिटी का मॉडल गड़बड़ा जाएगा। टाटा संस से मिलने वाले डिवीडेंड से वो शिक्षा, स्वास्थ्य में चैरिटी कर पाते हैं।
17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड में नोएल अकेले पड़ गए थे। अब उन्होंने जुगाड़ पेश किया है कि दो कंपनियों, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और टाटा कन्सल्टिंग इंजीनियर्स को टाटा संस में मर्जर कर दिया जाए। इससे टाटा संस सिर्फ फाइनेंस कंपनी नहीं रह जाएगी और रिज़र्व बैंक के आदेश से बच जाएगी। अब देखना है कि टाटा संस का बोर्ड इस पर क्या कहता है ?
शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 12.12 लाख करोड़ रुपए के पार
नई दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के अनुसार शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह चालू वित्त वर्ष में 17 सितंबर तक 13 फीसद बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा। इसकी वजह अग्रिम कर संग्रह में बढ़ोतरी है। वहीं शुद्ध कारपोरेट कर संग्रह में 19.48 फीसद की बढ़ोतरी हुई, जबकि गैर-कारपोरेट कर संग्रह में छह फीसद की वृद्धि दर्ज की गई।
अग्रिम कर संग्रह 16.18 फीसद बढ़कर करीब 5.22 लाख करोड़ रुपए रहा। इसमें कारपोरेट क्षेत्र से अग्रिम कर भुगतान 18 फीसद बढ़कर 4.16 लाख करोड़ रुपए से अधिक और गैर-कारपोरेट क्षेत्र (व्यक्तिगत तथा हिंदू अविभाजित परिवार) से अग्रिम कर संग्रह 9.24 फीसद बढ़कर 1.06 लाख करोड़ रुपए रहा। 17 सितंबर तक कर रिफंड 29.19 फीसद बढ़कर 2.20 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया।
दशहरे के दिन लागू होगा भारत-न्यूजीलैंड एफटीए
नई दिल्ली। भारत न्यूजीलैंड व्यापार समझौता दशहरे के दिन यानी 20 अक्तूबर से लागू होने जा रहा है। इसके जरिये भारतीय निर्यात के 100 फीसदी हिस्से को न्यूजीलैंड के बाजारों में शुल्क मुक्त पहुंच मिल जाएगी। इससे वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद समेत तमाम उत्पाद शामिल हैं। इसके साथ ही न्यूजीलैंड की लकड़ी, ऊन, भेड़ का मांस और कच्चे चमड़े सहित तमाम उत्पादों को भारतीय बाजार में तरजीह मिलेगी।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसकी घोषणा प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। इस मौके पर उन्होंने न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले से वर्चुअली बात भी की। गोयल ने कहा कि यह समझौता दशहरा के शुभ अवसर पर लागू होगा। दोनों देशों का लक्ष्य अगले चार से पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है।
डेयरी उत्पादों को संरक्षण : भारत ने कई संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा है। इनमें दूध, क्रीम, पनीर, दही जैसे डेयरी उत्पादों के साथ-साथ प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर शामिल हैं। समझौते के तहत न्यूजीलैंड की कंपनियां 15 साल में भारत में 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगी।
सीईपीए वार्ता 5 अक्तूबर से
उधर, भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है और वार्ता का अगला दौर पांच अक्तूबर से शुरू होगा और लगभग पांच दिनों तक चलेगा।













