ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।इस हफ़्ते संसद से दो ऐसे विधेयक पास हुए जिनकी चर्चा किसी चैनल पर नहीं हुई, लेकिन जिनका असर गली-मोहल्ले की दुकान से लेकर बैंक की शाखा तक पहुँचेगा। पहला है सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026। इसमें देशभर के छोटे कारोबारियों के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल बनेगा, जहाँ रजिस्ट्रेशन मुफ़्त होगा और अपनी मर्ज़ी से होगा। साथ ही छोटे उद्यमों का पैसा फँसने यानी देर से भुगतान के झगड़े जल्दी निपटेंगे, और छोटी-मोटी चूक पर जेल की जगह चेतावनी और श्रेणीबद्ध जुर्माने का रास्ता रखा गया है। दूसरा है बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक, 2026, जो देखने में तकनीकी है पर असल में बड़ा है। अब बैंक की ‘बही’ में काग़ज़ी रजिस्टर ही नहीं, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड में रखा रिकॉर्ड भी गिना जाएगा — और अदालत में उसे उतना ही वज़न मिलेगा।
यह क्यों मायने रखता है, इसे एक उदाहरण से समझिए। मान लीजिए आपकी छोटी फ़ैक्टरी है और आप हर महीने का लेनदेन UPI से करते हैं। बैंक के पास आपके कारोबार का पूरा हिसाब मौजूद है, पर अगर कर्ज़ चुकाने पर कभी विवाद हो जाए, तो अदालत में वह डिजिटल रिकॉर्ड किस दर्जे का सबूत माना जाएगा — यह सवाल अब तक अधर में था। इसी अनिश्चितता की वजह से बैंक छोटे कारोबारियों को लेनदेन के आधार पर कर्ज़ देने से हिचकते रहे और ज़मीन-मकान गिरवी माँगते रहे। नया क़ानून उसी झिझक को हटाता है। यानी बात नए ऐप की नहीं, भरोसे की है।
सबसे नीचे वाली परत: एक आधार सेवा केंद्र। देश में क़रीब 134 करोड़ लोगों के पास चालू आधार है और जून 2025 तक 15,452 करोड़ से ज़्यादा बार आधार से पहचान की पुष्टि हो चुकी थी — यही वह नींव है जिस पर UPI, सीधा लाभ हस्तांतरण और बिना काग़ज़ वाली KYC खड़ी है। फ़ोटो: विकिमीडिया कॉमन्स (क्रिएटिव कॉमन्स)
पटरी बिछाना एक काम है, उस पर क़ानून की मुहर लगाना दूसरा। भारत ने पहला काम दस साल में कर दिखाया। दूसरा इसी हफ़्ते शुरू हुआ है।
एक नज़र में
• UPI, जुलाई 2026: 23.66 अरब लेनदेन, 29.88 लाख करोड़ रुपये — अब तक का सबसे बड़ा महीना
• हर दिन औसतन 76.3 करोड़ भुगतान और क़रीब 96,383 करोड़ रुपये का लेनदेन
• आधार: क़रीब 134 करोड़ चालू आधार; जून 2025 तक 15,452 करोड़ से ज़्यादा प्रमाणीकरण; अगस्त 2025 में अकेले 221 करोड़
• MSME संशोधन विधेयक: छोटे कारोबारियों के लिए मुफ़्त डिजिटल रजिस्ट्रेशन पोर्टल, देर से भुगतान के झगड़ों का तेज़ निपटारा
• बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक: क्लाउड और डिजिटल बैंक रिकॉर्ड अदालत में पूरा सबूत माने जाएँगे
• डिजिटल अर्थव्यवस्था: 2022-23 में राष्ट्रीय आय का 11.74%, यानी 31.64 लाख करोड़ रुपये; अब क़रीब 13%
• इंडियाAI मिशन: पाँच साल के लिए 10,371.92 करोड़ रुपये; फ़रवरी 2026 तक 38,000 से ज़्यादा हाई-एंड GPU जुड़े
पैमाना देखिए तो यह क़ानूनी बदलाव और भी अहम लगता है। जुलाई 2026 में UPI से 23.66 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल क़ीमत 29.88 लाख करोड़ रुपये रही — यह अब तक का सबसे बड़ा महीना है, मई के 23.20 अरब से भी ऊपर। जून के मुक़ाबले लेनदेन की संख्या 4.1 प्रतिशत और रक़म 3.3 प्रतिशत बढ़ी। रोज़ का हिसाब लगाएँ तो हर दिन क़रीब 76.3 करोड़ भुगतान और 96,383 करोड़ रुपये। इसके नीचे आधार की परत है — क़रीब 134 करोड़ चालू आधार, और जून 2025 तक 15,452 करोड़ से ज़्यादा बार पहचान की पुष्टि हो चुकी थी। अकेले अगस्त 2025 में 221 करोड़ बार आधार से पहचान जाँची गई, जो अगस्त 2024 से 10 प्रतिशत ज़्यादा था। दुनिया में किसी और देश के पास इस पैमाने की सार्वजनिक व्यवस्था नहीं है।
बड़ी तस्वीर भी इसी ओर इशारा करती है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपने आकलन के मुताबिक़ 2022-23 में डिजिटल अर्थव्यवस्था देश की राष्ट्रीय आय का 11.74 प्रतिशत थी — 31.64 लाख करोड़ रुपये, यानी क़रीब 402 अरब डॉलर — और 2024-25 तक इसके 13.42 प्रतिशत होने का अनुमान था। मंत्रालय के सचिव ने इस साल नैसकॉम के मंच पर बताया कि यह हिस्सा अब क़रीब 13 प्रतिशत है और डिजिटल क्षेत्र बाक़ी अर्थव्यवस्था से लगभग दोगुनी रफ़्तार से बढ़ रहा है। इसी रफ़्तार से चलता रहा तो 2030 तक जीडीपी का पाँचवाँ हिस्सा डिजिटल होगा — और यह अनुमान हवा में नहीं, गणित में है।
लाल क़िले वाली घोषणाओं को भी इसी कड़ी में देखिए। एक करोड़ नौजवानों को साल भर में AI की ट्रेनिंग देना बड़ा काम है, पर उसका ढाँचा पहले से मौजूद है — इंडियाAI मिशन में पाँच साल के लिए 10,371.92 करोड़ रुपये रखे गए हैं और फ़रवरी 2026 तक 38,000 से ज़्यादा हाई-एंड GPU जोड़े जा चुके थे। मुफ़्त ऑनलाइन कोचिंग की योजना उसी सोच को दूसरी क़तार पर लागू करती है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में परिवार का पैसा तीन जगह ख़र्च होता है — कोचिंग की फ़ीस, कोचिंग वाले शहर का किराया और आना-जाना। एक अच्छी सरकारी ऑनलाइन व्यवस्था तीनों पर एक साथ चोट करती है। यह ख़ासकर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान के उन लाखों परिवारों की बचत है, जिनके बच्चे हर साल कोटा, प्रयागराज, पटना और दिल्ली जाते हैं।
आगे का रास्ता सीधा है और उसमें कोई चमक-दमक नहीं। दोनों विधेयकों के नियम जल्दी अधिसूचित हों, ताकि पहला विवाद अदालत पहुँचने से पहले बैंक और कारोबारी जान लें कि सही डिजिटल रिकॉर्ड दिखता कैसा है। MSME पोर्टल के आँकड़े हर महीने सार्वजनिक हों — कितने रजिस्ट्रेशन हुए, कितने भुगतान विवाद आए, कितने निपटे और औसतन कितने दिन में — ठीक उसी तरह जैसे UPI के आँकड़े हर महीने आते हैं। जो व्यवस्था अपना हिसाब ख़ुद छापती है, वह तेज़ी से सुधरती भी है। और एक करोड़ AI ट्रेनिंग के लिए संस्थान, पाठ्यक्रम, सर्टिफ़िकेट और उसकी मान्यता का ब्योरा जल्दी सामने आए, ताकि जो नौजवान अक्टूबर में नाम लिखाए, वह जानता हो कि वह किसमें नाम लिखा रहा है। पटरी बिछाने का काम भारत कर चुका। अब उसे क़ानून की मज़बूती देने का काम शुरू हुआ है।
भारत और दुनिया
अमेरिका — अंतरिम समझौता हो चुका, बड़ा समझौता बाक़ी: इस साल फ़रवरी में भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापार समझौते का ढाँचा घोषित किया था। इसके तहत भारतीय सामान की एक तय सूची पर — कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, कुछ रसायन — 18 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क लगता है, जबकि जेनेरिक दवाओं, रत्न और हीरों पर शुल्क पूरी तरह हटा दिया गया। पूरा द्विपक्षीय व्यापार समझौता अभी बातचीत में है और खेती, डेयरी, डिजिटल व्यापार तथा ग़ैर-शुल्क शर्तों जैसे मुद्दे खुले हैं। दोनों देशों ने 2030 तक आपसी कारोबार दोगुने से ज़्यादा करके 500 अरब डॉलर पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। आपके लिए इसका मतलब यह है कि कपड़ा, चमड़ा, रत्न-आभूषण, दवा और इंजीनियरिंग के जिन कारख़ानों में लाखों लोग काम करते हैं, उनका ऑर्डर बुक इसी बातचीत से जुड़ा है।
यूरोपीय संघ — समझौते की क़ानूनी जाँच जारी: भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में तय हुआ था, और अभी उसकी धारा-दर-धारा क़ानूनी जाँच चल रही है। यह अभी लागू नहीं हुआ है — औपचारिक हस्ताक्षर के बाद यूरोपीय संघ की परिषद और यूरोपीय संसद की मंज़ूरी चाहिए, जिसमें आमतौर पर क़रीब एक साल लगता है। भारत में व्यापार समझौतों को संसद की मंज़ूरी नहीं चाहिए, इसलिए यहाँ प्रक्रिया तेज़ है। समझौता 2027 की शुरुआत तक लागू होने की उम्मीद है। दोनों पक्षों के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है। भारत के कपड़ा, दवा और इंजीनियरिंग निर्यातकों के लिए यह वक़्त इंतज़ार का नहीं, तैयारी का है।
विदेश में बसे भारतीयों का पैसा: इस हफ़्ते की सबसे दिलचस्प विदेशी ख़बर रिज़र्व बैंक से आई। 8 जून को शुरू की गई विशेष स्वैप सुविधा के ज़रिए 13 अगस्त तक कुल 56.85 अरब डॉलर आए, जिनमें 52.3 अरब डॉलर अकेले FCNR(B) जमा से हैं — यानी विदेश में रहने वाले भारतीयों ने भारतीय बैंकों में जो विदेशी मुद्रा जमा की। योजना इतनी सफल रही कि रिज़र्व बैंक ने शुक्रवार को इसे तय समय से पहले समेटने का फ़ैसला किया — अब 31 अगस्त तक जुटाई जमा ही इसके दायरे में आएगी, 30 सितंबर की जगह। विदेशी मुद्रा भंडार 7 अगस्त वाले हफ़्ते में 14.14 अरब डॉलर बढ़कर 707 अरब डॉलर हो गया। मज़बूत भंडार का सीधा मतलब है रुपये में कम उतार-चढ़ाव और आयातित तेल के झटके से कुछ बचाव।
इलेक्ट्रॉनिक्स की चमक: जुलाई में इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात 57.4 प्रतिशत बढ़कर 5.92 अरब डॉलर पहुँचा — व्यापार आँकड़ों में सबसे तेज़ बढ़ने वाली लाइनों में से एक। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली में लगे कारख़ाने अब देश के निर्यात का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। अगला क़दम चिप बनाने का है — इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत छह राज्यों में 12 परियोजनाएँ मंज़ूर हैं और क़रीब 1.64 लाख करोड़ रुपये का निवेश तय हो चुका है। इनमें से तीन इकाइयाँ इसी साल से व्यावसायिक उत्पादन में आ चुकी हैं।
आगे का हफ़्ता
• मौद्रिक नीति समिति की बैठक का ब्योरा (19 अगस्त के आसपास) — रिज़र्व बैंक क़ानून के मुताबिक़ बैठक के चौदहवें दिन ब्योरा छपता है। 5 अगस्त को रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरक़रार रखा गया था। देखना यह है कि सदस्यों ने 4.45 प्रतिशत खुदरा और 9.78 प्रतिशत थोक महंगाई के फ़र्क़ को कैसे पढ़ा।
• विदेशी मुद्रा भंडार के आँकड़े (शुक्रवार, 21 अगस्त) — 14 अगस्त वाले हफ़्ते का आँकड़ा। भंडार अभी 707 अरब डॉलर है, जो 30 जनवरी वाले हफ़्ते के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़ोतरी के बाद पहुँचा है। देखना यह है कि स्वैप सुविधा का कितना पैसा अब भी आ रहा है।
• FCNR(B) जमा की आख़िरी तारीख़ 31 अगस्त — विदेश में रहने वाले भारतीय परिवारों के लिए काम की बात। इस सुविधा के दायरे में अब 31 अगस्त तक जुटाई गई जमा ही आएगी, इसलिए अगले दो हफ़्तों में बैंक आकर्षक दरें दे सकते हैं। ब्याज दर और शर्तें अपने बैंक से ही पक्की करें।
• बारिश और बुवाई के साप्ताहिक आँकड़े — मौसम विभाग ने अगस्त में सामान्य से कम, 94 प्रतिशत से नीचे बारिश का अनुमान दिया है। खरीफ़ बुवाई पिछले साल से 2.9 प्रतिशत पीछे है और दलहन में कमी ज़्यादा है। अगले तीन हफ़्तों की बारिश दाल और तिलहन के दाम तय करेगी।
• नए क़ानूनों के नियम कब आएँगे — मॉनसून सत्र में पास 12 विधेयकों पर अब नियम बनने हैं। छोटे कारोबारियों के लिए सबसे काम का है MSME पोर्टल का नियम और देर से भुगतान के झगड़े निपटाने की प्रक्रिया। यही तय करेगा कि ज़मीन पर बदलाव कब दिखेगा।
• लाल क़िले की घोषणाओं का ब्योरा — मुफ़्त ऑनलाइन कोचिंग और एक करोड़ AI ट्रेनिंग — कब से, कहाँ रजिस्ट्रेशन, कौन पात्र और सर्टिफ़िकेट किस काम का। यही ब्योरा आने वाले दिनों में सबसे ज़्यादा पूछा जाएगा।













