ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।बारह साल पहले पाइप वाली गैस 70 शहरों में थी, अब क़रीब 700 में है। और 50 लाख घर अपनी छत से अपनी बिजली बना रहे हैं। ये दोनों आँकड़े रसोई और बिजली के बिल की कहानी हैं।
प्रधानमंत्री ने लाल किले से बताया कि 2014 से पहले पाइप से रसोई गैस क़रीब 70 शहरों तक पहुँचती थी और अब यह लगभग 700 शहरों तक पहुँच चुकी है। घरेलू कनेक्शन 20–22 लाख से बढ़कर लगभग 1.75 करोड़ हो गए हैं। इसके साथ ही पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना के तहत क़रीब 50 लाख परिवार अपने घर की छत से बिजली बना रहे हैं।
यानी क्या बदला? पाइप वाली गैस का सबसे बड़ा फ़ायदा सिलिंडर का इंतज़ार ख़त्म होना है। न बुकिंग, न गाड़ी का इंतज़ार, न ख़त्म होने की चिंता — और बिल उतना ही जितनी गैस जली। छोटे शहरों और कस्बों में यह बदलाव सबसे ज़्यादा महसूस होता है, क्योंकि वहीं सिलिंडर की गाड़ी सबसे देर से आती थी। दरअसल यह बिजली या गैस बनाने की नहीं, उसे घर तक पहुँचाने के नेटवर्क की कहानी है।
अपनी छत, अपनी बिजली: पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना के तहत क़रीब 50 लाख घर अब अपनी बिजली ख़ुद बना रहे हैं।
सिलिंडर का इंतज़ार ख़त्म होना, किसी भी सब्सिडी से ज़्यादा बड़ी राहत है।
एक नज़र में
• पाइप गैस, 2014 से पहले: क़रीब 70 शहर
• अब: लगभग 700 शहर
• घरेलू कनेक्शन, पहले: 20–22 लाख
• अब: लगभग 1.75 करोड़
• छत पर सोलर: क़रीब 50 लाख घर
• योजना: पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना
• सौर क्षमता: 12 साल में क़रीब 2 गीगावाट से 160 गीगावाट
• 2047 का लक्ष्य: 100 गीगावाट परमाणु बिजली
• रेलवे: पिछले दस साल में सौ फ़ीसदी विद्युतीकरण
छत वाली सोलर योजना का हिसाब अलग है। इसमें घर की छत पर पैनल लगते हैं और जो बिजली बनती है वह पहले घर में इस्तेमाल होती है; बची हुई बिजली ग्रिड को जाती है और बिल में उसका समायोजन होता है। जिन परिवारों की महीने की खपत सीमित है, उनका बिल शून्य के आसपास आ सकता है। पर साफ़-साफ़ कहना ज़रूरी है — 50 लाख घर देश के कुल घरों के सामने अभी शुरुआत भर हैं, और इसका फ़ायदा उन्हीं को मिलता है जिनके पास अपनी छत हो। किराए के मकान और ऊँची इमारतों के फ़्लैट अभी इस दायरे से बाहर रह जाते हैं।
आगे का काम इसी कमी को भरने का है। सोसाइटी की साझा छत पर सामूहिक सोलर, किरायेदारों के लिए साझा मीटर, और आवेदन से लेकर मीटर लगने तक की तय समयसीमा — ये तीन चीज़ें इस योजना को कस्बों और मध्यम वर्ग के फ़्लैटों तक ले जाएँगी। इसी तरह पाइप गैस का नेटवर्क अब उन ज़िलों तक बढ़ाना है जहाँ अब भी सिलिंडर ही एकमात्र रास्ता है। रसोई और बिजली का बिल — घर के बजट में इन दोनों के बाद ही बाक़ी सब आता है।














