ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।लाल किले से दो ऐलान सीधे उस घर के लिए हुए, जहाँ बच्चा तैयारी कर रहा है और माँ-बाप हिसाब लगा रहे हैं। एक — मुफ़्त ऑनलाइन कोचिंग। दूसरा — एक करोड़ युवाओं को एआई की ट्रेनिंग।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को मुफ़्त ऑनलाइन कोचिंग दी जाएगी। दूसरा ऐलान यह रहा कि अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्होंने कहा कि देश को तीन चीज़ों पर ध्यान देना है — लागत, गुणवत्ता और हुनर।
सीधी बात यह है कि कोचिंग का असली खर्च फ़ीस नहीं है। कोटा, दिल्ली, प्रयागराज या पटना — जो बच्चा तैयारी के लिए कस्बे से इन शहरों में जाता है, उसके घर पर साल-दो साल तक कमरे का किराया, खाना और आना-जाना चढ़ता है। कई परिवार यह पैसा उधार लेकर जुटाते हैं। सिर्फ़ फ़ीस माफ़ करने से यह खर्च नहीं हटता। पढ़ाई ऑनलाइन कर देने से हटता है — क्योंकि तब बच्चे को घर छोड़ना ही नहीं पड़ता। यही इस ऐलान की असली ताक़त है।
घर से ही तैयारी: मुफ़्त ऑनलाइन कोचिंग का असली फ़ायदा फ़ीस बचने से ज़्यादा इस बात में है कि बच्चे को कोचिंग वाले शहर में जाकर रहना नहीं पड़ेगा।
फ़ीस माफ़ होने से एक खर्च बचता है। पढ़ाई घर पहुँच जाने से तीन बचते हैं — कमरा, खाना और किराया।
एक नज़र में
• कहाँ से ऐलान: लाल किला, 15 अगस्त 2026
• पहला ऐलान: प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ़्त ऑनलाइन कोचिंग
• दूसरा ऐलान: एक साल में एक करोड़ युवाओं को एआई ट्रेनिंग
• एक करोड़ यानी: हर दिन क़रीब 27,400 युवा, बिना नागा
• औसतन हर राज्य/केंद्रशासित प्रदेश: लगभग 2.8 लाख
• प्रधानमंत्री ने कहा: लागत, गुणवत्ता और हुनर — तीन प्राथमिकताएँ
• देश की आबादी: 65 फ़ीसदी लोग 35 साल से कम उम्र के
• अभी तय होना बाक़ी: शुरू होने की तारीख़, कोर्स, संस्थान, पात्रता और सर्टिफिकेट
अब एआई वाले ऐलान का गणित। एक करोड़ यानी सौ लाख। इसे 365 दिन में बाँटें तो हर दिन लगभग 27,400 युवाओं की ट्रेनिंग शुरू होनी चाहिए — रविवार और त्योहार मिलाकर। देश के 28 राज्यों और आठ केंद्रशासित प्रदेशों में बाँटें तो औसतन 2.8 लाख प्रति राज्य। बड़ी बात यह है कि इतनी रफ़्तार से कोई पारंपरिक क्लासरूम नेटवर्क नहीं चल सकता। यानी यह पूरी तरह ऑनलाइन डिलीवरी का वादा है, और यह उसी इंटरनेट ढाँचे पर टिका है जिस पर मुफ़्त कोचिंग भी चलेगी।
अभी सरकार ने कोर्स, संस्थान, पात्रता और सर्टिफिकेट का ब्यौरा जारी नहीं किया है। यही ब्यौरा तय करेगा कि एक करोड़ का मतलब ‘ट्रेनिंग पूरी करने वाले’ हैं या सिर्फ़ ‘रजिस्ट्रेशन कराने वाले’। यह फ़र्क़ मायने रखता है, क्योंकि जिस सर्टिफिकेट को कंपनियाँ नहीं पहचानतीं, वह किसी के काम नहीं आता। आगे का रास्ता साफ़ है — कोर्स और परीक्षा का पैमाना पहले छापा जाए, कंपनियों से उसकी जाँच कराई जाए, और गिनती रजिस्ट्रेशन की नहीं, कोर्स पूरा करने की बताई जाए। देश ने डिजिटल तरीक़े से बड़े पैमाने पर काम पहले भी किया है। इस बार सवाल पैमाने का नहीं, गुणवत्ता का है।














