ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।जुलाई में देश भर में 31,788 इलेक्ट्रिक कारें रजिस्टर हुईं। पर आपके लिए ज़्यादा काम का आँकड़ा दूसरा है — जुलाई में बिकी हर 100 नई कार में से क़रीब 8 बिजली वाली थीं।
सरकार के वाहन पोर्टल के आँकड़ों के मुताबिक़ जुलाई 2026 में कुल 3,27,557 इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर हुए, जून में यह संख्या 3,10,107 थी। इनमें इलेक्ट्रिक कारें 31,788 रहीं, जबकि जुलाई 2025 में 17,509 थीं — यानी एक साल में क़रीब 82 प्रतिशत की बढ़त, और नई कारों में 7.8 प्रतिशत हिस्सेदारी। इलेक्ट्रिक दोपहिया 204,201 रहे। इस कैलेंडर साल में ई-दोपहिया ने सिर्फ़ सात महीनों में दस लाख का आँकड़ा पार कर लिया और 31 जुलाई तक 11.1 लाख तक पहुँच गया।
अब शौक़ नहीं, हिसाब: जुलाई 2026 में 31,788 इलेक्ट्रिक कारें रजिस्टर हुईं। टाटा मोटर्स के पास इस बाज़ार का 42.5 प्रतिशत हिस्सा है।
स्कूटर ख़रीदने वाला पर्यावरण पर बयान नहीं दे रहा। वह पेट्रोल का हिसाब लगा रहा है।
एक नज़र में
• कुल ईवी रजिस्ट्रेशन, जुलाई 2026: 3,27,557 (जून: 3,10,107)
• इलेक्ट्रिक कारें: 31,788 (जुलाई 2025: 17,509)
• सालाना बढ़त: क़रीब 82 प्रतिशत
• नई कारों में हिस्सेदारी: 7.8 प्रतिशत
• इलेक्ट्रिक दोपहिया: 204,201 (जून: 194,951)
• ई-रिक्शा: 34,716 · ई-ऑटो (यात्री): 40,198
• दोपहिया का रिकॉर्ड: सात महीने में दस लाख, 31 जुलाई तक 11.1 लाख
• सबसे बड़ी कंपनी: टाटा मोटर्स, 42.5 प्रतिशत
• सबसे तेज़ बढ़त: महिंद्रा, 125.7 प्रतिशत
• दिल्ली: जुलाई में 10,000 से ज़्यादा ईवी रजिस्ट्रेशन, साल का सबसे ऊँचा
आँकड़े को तोड़कर देखिए तो असली कहानी दिखती है। जुलाई में रजिस्टर हुए हर 100 इलेक्ट्रिक वाहनों में से क़रीब 62 दोपहिया थे और 24 तिपहिया — ई-रिक्शा, ई-ऑटो और माल ढोने वाले। यानी सात में से छह इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ वे हैं जिनसे कोई कमाता है: डिलीवरी करने वाला लड़का, ऑटो चलाने वाला, स्टेशन के बाहर ई-रिक्शा लगाने वाला। इनके लिए पेट्रोल घर के बजट की एक लाइन नहीं, कमाई की सबसे बड़ी लागत है। जब तेल महंगा होता है, तो इलेक्ट्रिक विकल्प शौक़ नहीं रह जाता — वह बचत बन जाता है।
तो क्या अब ईवी लेना समझदारी है? ईमानदार जवाब यह है कि यह इस पर टिका है कि आप रोज़ कितना चलते हैं और चार्जिंग कहाँ करेंगे। रोज़ 40-50 किलोमीटर चलाने वाले के लिए पेट्रोल और बिजली का फ़र्क़ दो-तीन साल में गाड़ी की ऊँची क़ीमत की भरपाई कर देता है। कम चलाने वाले के लिए यह हिसाब लंबा खिंचता है। दिल्ली का जुलाई महीना — 10,000 से ज़्यादा रजिस्ट्रेशन, साल का सबसे ऊँचा — यही बताता है कि जहाँ राज्य की नीति और चार्जिंग की सुविधा साथ आती है, वहाँ लोग तुरंत फ़ैसला कर लेते हैं। छोटे शहरों और क़स्बों में यही सुविधा पहुँचाना अगला काम है।














