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पीएम-किसान अब 2031 तक, ₹3.15 लाख करोड़ मंज़ूर

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 14, 2026
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।पैसा वही है — साल के ₹6,000, तीन किस्तों में। बदली एक ही चीज़ है, और वही सबसे बड़ी है: अब किसान को पता है कि यह पैसा अगले पाँच साल तक आता रहेगा।

केंद्रीय कैबिनेट ने 31 जुलाई को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि यानी पीएम-किसान को पाँच साल और चलाने की मंज़ूरी दी है। यह मंज़ूरी वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए है और इसके पीछे क़रीब ₹3.15 लाख करोड़ रखे गए हैं। योजना के तहत पात्र ज़मीनधारक किसान परिवार को साल में ₹6,000 मिलते हैं — ₹2,000 की तीन बराबर किस्तों में, सीधे बैंक खाते में, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के ज़रिए।

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दरअसल इस ख़बर में रक़म से ज़्यादा मायने तारीख़ की है। जो योजना साल-दर-साल बढ़ती है, उसे किसान भी और उसे उधार देने वाला भी एक ‘शायद’ मानकर चलता है। जो योजना पाँच साल के लिए, पैसे के साथ, तय हो जाए — वह एक पक्की आमदनी बन जाती है। छोटी ज़रूर, मगर तारीख़ वाली और भरोसे वाली। सीधी बात यह है कि ₹500 किस्त बढ़ाने से ज़्यादा फ़ायदा इस बात का है कि किस्त आएगी, यह पक्का हो गया।

साल में तीन तारीख़ें, अब पाँच साल के लिए: पीएम-किसान 2030-31 तक बढ़ा दी गई है। ₹2,000 की किस्त सीधे बैंक खाते में जाती है।

₹6,000 से खेती नहीं बदलती। पर तय तारीख़ पर आने वाले ₹6,000 से यह बदल जाता है कि किसान किसके सामने हाथ फैलाएगा।

एक नज़र में

• योजना: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि
• कैबिनेट की मंज़ूरी: 31 जुलाई 2026
• अवधि: वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31
• कुल रक़म: क़रीब ₹3.15 लाख करोड़
• सालाना मदद: ₹6,000 प्रति पात्र किसान परिवार
• किस्तें: ₹2,000 की तीन किस्तें
• तरीक़ा: सीधे बैंक खाते में (डीबीटी)
• राज्य की मदद, उदाहरण: एमपी की मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, साल के ₹6,000
• आज: एमपी में दूसरी किस्त बँटी, धार कलेक्ट्रेट सभागार में कार्यक्रम

कई राज्य इसी रास्ते पर अपनी अलग मदद भी जोड़ते हैं। मध्य प्रदेश ने आज ही मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की दूसरी किस्त बाँटी, और धार में कलेक्ट्रेट सभागार में इसका कार्यक्रम हुआ। इस राज्य योजना में भी साल के ₹6,000 तीन बराबर किस्तों में मिलते हैं। यानी जिस किसान को दोनों का लाभ मिलता है, उसके खाते में साल भर में छह तारीख़ों पर पैसा आता है।

बड़ी बात यह है कि यह मंज़ूरी ऐसे मौक़े पर आई है जब खेत पर दबाव है। इस साल ख़रीफ़ की बुवाई पिछले साल से क़रीब 26.5 लाख हेक्टेयर पीछे चल रही है, दालों का रक़बा सामान्य का 77 प्रतिशत है और मोटे अनाज का 86.4 प्रतिशत। मौसम विभाग ने अगस्त में सामान्य से कम बारिश का अनुमान दिया है। ऐसे मौसम में तय तारीख़ पर आने वाली किस्त वही काम करती है जो कामकाजी पूँजी करती है — वरना यही वह वक़्त होता है जब किसान सबसे महंगे ब्याज पर उधार लेता है। आगे का काम सीधा है: किस्तों की तारीख़ें पहले से बताई जाएँ, ई-केवाईसी और ज़मीन के रिकॉर्ड अपडेट रखे जाएँ ताकि कोई पात्र परिवार तकनीकी वजह से छूट न जाए, और राज्य अपनी किस्त केंद्र की किस्तों के बीच में दें, साथ-साथ नहीं।

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