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‘इसरो पर खर्च हुए 1 रुपये का ढाई गुना मिला रिटर्न’

by ब्लिट्ज़ इंडिया
November 22, 2024
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा है कि इसरो ने यह पता लगाने के लिए हाल ही में एक अध्ययन किया था कि अंतरिक्ष एजेंसी में निवेश की गई धनराशि से समाज को कोई फायदा हुआ है या नहीं। वह कर्नाटक आवासीय शैक्षणिक संस्थान सोसाइटी केआरईआईएस पहुंचे थे, जहां उन्होंने छात्रों से संवाद किया।

संवाद सत्र के दौरान एक सवाल पर उन्होंने बताया कि अध्ययन के अनुसार इसरो पर खर्च किए गए हर एक रुपये पर समाज को 2.50 रुपये वापस मिले। इस सत्र का आयोजन कर्नाटक सरकार के समाज कल्याण विभाग और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने किया था।

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सोमनाथ के मुताबिक, ‘इसरो का लक्ष्य अंतरिक्ष क्षेत्र में सक्रिय देशों के साथ वर्चस्व की लड़ाई में शामिल होने के बजाय देश की सेवा करना है। ऐसा करने के लिए इसरो को वह करने की आजादी चाहिए, जो वह करना चाहता है।’ उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में व्यावसायिक अवसरों के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र कायम कर यह स्वतंत्रता हासिल की जा सकती है। सोमनाथ ने कहा, ‘चंद्रमा से जुड़े अभियान काफी महंगे होते हैं और हम वित्त पोषण के लिए केवल सरकार पर निर्भर नहीं रह सकते। हमें व्यावसायिक अवसर पैदा करने होंगे। अगर आपको इसे जारी रखना है, तो आपको इसकी उपयोगिता साबित करनी होगी। वरना, जब हम कुछ करेंगे, तब सरकार हमसे उसे बंद करने के लिए कहेगी।’ उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इसरो अंतरिक्ष अन्वेषण के अलावा भी बहुत कुछ करता है। एक अन्य सवाल के जवाब में सोमनाथ ने इसरो की उन परियोजनाओं का उदाहरण दिया, जिनसे लोगों को सीधे लाभ पहुंचता है। उन्होंने कहा, ‘मिसाल के तौर पर, हम मछुआरों को जो सलाह जारी करते हैं, उसी को ले लीजिए। हमारी सलाह की मदद से वे जान पाते हैं कि मछली पकड़ने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान कहां है। हम समुद्री स्थिति का आकलन करने के लिए ओशनसैट का इस्तेमाल करते हैं और विभिन्न मापदंडों का अध्ययन करने के बाद सलाह जारी करते हैं। इस सेवा का इस्तेमाल कर मछुआरे न केवल ज्यादा मछली पकड़ पाते हैं, बल्कि वे नावों के लिए आवश्यक डीजल की भी काफी बचत कर पाते हैं।’

अपने जीवन को प्रभावित करने वाली चीजों के बारे में पूछने पर सोमनाथ ने कहा कि उनके शिक्षकों ने उनका मार्गदर्शन करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने भौतिकी शिक्षक राजप्पा और गणित शिक्षक पॉल के बारे में बात की, जिन्होंने न केवल अच्छे अंक प्राप्त करने में, बल्कि विषय पर अच्छी पकड़ बनाने में उनकी काफी मदद की। वह दसवीं कक्षा की अपनी शिक्षिका भागीरथी अम्मा के हमेशा आभारी रहेंगे, जिन्होंने सबसे पहले उन्हें आईआईटी के बारे में बताया था और जिन्हें विश्वास था कि वह एक दिन इंजीनियर जरूर बनेंगे।

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