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पृथ्वी पर बढ़ रहीं इंसानों के लिए गंभीर संकट पैदा करने वाली स्थितियां

फ्रेशवॉटर इंडेक्स में सबसे ज्यादा 85 प्रतिशत की गिरावट

by ब्लिट्ज़ इंडिया
October 18, 2024
in the blitz
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। बीते 50 सालों (1970-2020) में वन्यजीवों की आबादी में 73 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह गिरावट उन जीवों की आबादी में आई है, जिनकी निगरानी की गई। लंदन की जूलॉजिकल सोसायटी ने लिविंग प्लैनेट इंडेक्स रिपोर्ट 2024 में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पृथ्वी पर इंसानों के लिए गंभीर संकट पैदा करने वाली स्थितियां बढ़ रही है। वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ)-इंडिया ने इस रिपोर्ट पर गंभीर चिंता जाहिर की है।

लंदन की जूलॉजिकल सोसायटी की जारी लिविंग प्लैनेट इंडेक्स में साल 1970 से 2020 तक 5495 जीवों की लगभग 35 हजार आबादी कम होने की बात की गई है। फ्रेशवॉटर इंडेक्स में सबसे ज्यादा 85 प्रतिशत, स्थलीय इंडेक्स में 69 प्रतिशत और समुद्र इंडेक्स में 56 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जीवों की आबादी में इस गिरावट की वजह खान-पान के सिस्टम में बदलाव और अधिक लाभ की प्रवृत्ति के साथ आक्रामक जीव जंतुओं और बीमारी के चलते विश्वभर में वन्यजीवों के पर्यावास को सबसे अधिक क्षति और कमी का संकट सामने आया है। एशिया और प्रशांत क्षेत्र में प्रदूषण एक संकट है, जिसके चलते जीव की आबादी में औसत 60प्रतिशत की गिरावट आई है। वन्यजीवों की आबादी में गिरावट को उनके लुप्त होने के बढ़ते खतरे का शुरुआती संकेत माना जा सकता है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंटरनेशनल के डायरेक्टर जनरल कर्स्टन शूइट के अनुसार प्रकृति संकट का संकेत दे रही है। प्रकृति को हो रहे नुकसान और क्लाइमेट चेंज दोनों के संकटों और समस्त विश्व में प्रथ्वी की जीवन रक्षक प्रणालियों की क्षति और अलग अलग समाजों में अस्थिरता का खतरा बढ़ाने वाली स्थितियों के चलते वन्यजीव खतरे में हैं। भारत में कुछ अन्य वन्यजीवों की आबादी स्थिर हुई है। बाघ दुनिया भर में सबसे ज्यादा भारत में पाए जाते हैं। लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण पानी रोके रखने, भूजल के पुनर्भरण और बाढ़ पर नियंत्रण जैसी आर्दभूमि से मिलने वाले महत्वपूर्ण लाभ काफी कम हो चले थे। इसके चलते चेन्नई के लोगों के समक्ष सूखे और बाढ़ दोनों का संकट पैदा हो गया था। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के जनरल सेक्रेट्री और सीईओ रवि सिंह के अनुसार, लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2024 में प्रकृति, जलवायु और मानव कल्याण के परस्पर संबंध के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। अगले पांच सालों में हमारे विकल्प और कार्य पूरी पृथ्वी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

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