ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।भारत ने वित्त वर्ष 2025–26 में 55.3 गीगावाट गैर-जीवाश्म (नॉन-फ़ॉसिल) बिजली क्षमता जोड़ी — यह उसका अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक इज़ाफ़ा और पिछले वर्ष का लगभग दोगुना है, जिसमें करीब 44.6 गीगावाट नई सौर क्षमता रही। इससे स्थापित सौर क्षमता बढ़कर लगभग 157 गीगावाट हो गई और गैर-जीवाश्म स्रोत देश की कुल बिजली क्षमता के 42% से अधिक हो गए।
यह पैमाना भारत को दुनिया के तीन सबसे बड़े नवीकरणीय-ऊर्जा क्षमता धारकों में रखता है। मेगावाट के आँकड़ों के पीछे, हरित हाइड्रोजन की मुहिम काग़ज़ से परियोजनाओं की ओर बढ़ रही है — ₹19,744 करोड़ के परिव्यय वाले मिशन के तहत, जिसका लक्ष्य 2030 तक सालाना 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन है — एक ऐसा ईंधन जो रिफ़ाइनिंग, उर्वरक और भारी उद्योग को स्वच्छ बना सकता है।
क्षमता जोड़ना ऊर्जा-संक्रमण का दिखने वाला आधा हिस्सा है — असली परीक्षा ग्रिड, भंडारण और पारेषण का साथ देना है, ताकि स्वच्छ बिजली ज़रूरत के समय उपलब्ध रहे।
एक नज़र में
- वित्त वर्ष 26 में जोड़ा: 55.3 गीगावाट गैर-जीवाश्म (रिकॉर्ड; ~44.6 गीगावाट सौर)
- कुल सौर: ~157 गीगावाट स्थापित
- हिस्सा: गैर-जीवाश्म स्रोत कुल क्षमता के 42% से अधिक
- हरित हाइड्रोजन: ₹19,744 करोड़ मिशन; 2030 तक 50 लाख टन/वर्ष लक्ष्य
ईमानदार चुनौती एकीकरण की है: तेज़ी से बढ़ते सौर व पवन संयंत्रों को भंडारण, पारेषण लाइनों और लचीले ग्रिड से जोड़ना, ताकि परिवर्तनशील उत्पादन चौबीसों घंटे विश्वसनीय आपूर्ति में बदले। सेल, मॉड्यूल और इलेक्ट्रोलाइज़र का घरेलू विनिर्माण बढ़ रहा है, पर कुछ घटकों और अहम खनिजों की आपूर्ति-शृंखला अभी निर्माणाधीन है।
रचनात्मक पाठ यह है कि भारत पहले से कहीं तेज़ी से स्वच्छ क्षमता बना रहा है और उसके नीचे औद्योगिक आधार भी गहरा कर रहा है। ग्रिड और भंडारण में निवेश के साथ मिलकर, यह रिकॉर्ड वर्ष सस्ती, स्वच्छ और अधिक सुरक्षित ऊर्जा — और नए विनिर्माण रोज़गार — का मंच बन सकता है।











