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पावर प्रोजेक्ट पर 3 राज्य आमने-सामने

- हरियाणा ने भी दावा ठोका, सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहे हिमाचल-पंजाब

by ब्लिट्ज़ इंडिया
December 20, 2024
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गुप्ता ब्रदर्स ने साबित कर दिखाया
ब्लिट्ज ब्यूरो

चंडीगढ़। ब्यास नदी की सहायक उहल नदी पर बने 110 मेगावाट शानन हाइडल पावर प्रोजेक्ट को लेकर हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बीच चल रही कानूनी लड़ाई ने एक नया मोड़ आ गया है। हरियाणा सरकार ने भी इस मामले में पक्ष बनने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दायर कर दिया है। हिमाचल प्रदेश और पंजाब सरकार दोनों ही इस परियोजना पर पहले ही अपना दावा कर रहे हैं। इसके बाद हिमाचल प्रदेश ने शानन परियोजना में हिस्सेदारी का दावा करने के हरियाणा सरकार के कदम का विरोध करने का फैसला किया है।

हिमाचल सरकार का कहना है कि यह पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच एक मुख्य मुद्दा है। पंजाब सरकार भी हरियाणा सरकार के इस आवेदन का विरोध करेगी। हिमाचल अगली सुनवाई की तारीख 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपनी आपत्ति दर्ज कराएगा। प्रारंभ में 48 मेगावाट की परियोजना के रूप में शुरू की गई शानन जल विद्युत परियोजना की क्षमता को बाद में 60 मेगावाट तक बढ़ा दिया गया तथा बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने के लिए पंजाब द्वारा अंततः 110 मेगावाट तक बढ़ा दिया गया।

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हरियाणा ने इन 2 वजहों से किया दावा
1. हरियाणा सरकार का कहना है ब्यास की सहायक नदी उहल नदी पर स्थित शानन परियोजना भी भाखड़ा बांध को पानी देती है। चूंकि हरियाणा की भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में हिस्सेदारी है। इसलिए उसका तर्क है कि परियोजना पर उसका वैध दावा है।

2. हरियाणा के सुप्रीम कोर्ट में किए गए अपने आवेदन में पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 का भी हवाला दिया गया है जिसमें अविभाजित पंजाब राज्य के हिस्से के रूप में उसके ऐतिहासिक संबंध पर जोर दिया गया है।

क्या है शानन पावर प्रोजेक्ट
1932 में शुरू की गई शानन हाइडल परियोजना हिमाचल प्रदेश के जोगिंदरनगर में स्थित है। इस परियोजना के लिए 99 साल का पट्टा 1925 में मंडी रियासत के तत्कालीन शासक जोगेंद्र सेन बहादुर और अविभाजित पंजाब सरकार के मुख्य अभियंता कर्नल बीसी बैटी के बीच हस्ताक्षरित किया गया था। समझौते के तहत परियोजना को मंडी के लिए 500 किलोवाट मुफ्त बिजली के बदले उहल नदी से पानी का उपयोग करने की अनुमति दी गई थी।

यहां से शुरू हुआ विवाद
2 मार्च, 2024 को पट्टे की अवधि समाप्त हो गई। एक दिन पहले, केंद्र सरकार ने निर्बाध संचालन सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा स्थिति बनाए रखने का आदेश जारी किया। तब तक, पंजाब ने हिमाचल प्रदेश को परियोजना को अपने हाथ में लेने से रोकने के लिए पहले ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया दिया था।

जबकि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने लगातार तर्क दिया है कि 99 साल के पट्टे की समाप्ति के साथ ही पंजाब का दावा समाप्त हो गया।

पंजाब के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा हिमाचल प्रदेश
20 सितंबर को हिमाचल प्रदेश ने पंजाब के दीवानी मुकदमे को खारिज करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। राज्य ने तर्क दिया कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 7, नियम 11 के तहत कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए पहले उसके मामले की सुनवाई होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने 23 सितंबर को पंजाब को नोटिस जारी किया, जिस पर बाद में पंजाब ने हिमाचल प्रदेश के दावे का विरोध करते हुए जवाब दाखिल किया।

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