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जापान के साथ रेयर अर्थ निर्यात समझौते की दोबारा समीक्षा करेगा भारत

- चीन पर निर्भरता कम करने की कवायद

by Blitzindiamedia
June 20, 2025
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भ्रष्टतंत्र पर प्रहार जरूरी

हमेशा याद रखें, प्रशासन से जुड़ी हर फाइल के पीछे मानवीय पहलू हो आधार

मनोज जैन

नई दिल्ली। भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की खनन कंपनी इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (आईआरईएल) को जापान के साथ चल रहे रेयर अर्थ निर्यात समझौते को फिलहाल रोकने का निर्देश दिया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि देश के लिए जरूरी रेयर मिनरल्स की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और चीन पर निर्भरता को कम किया जा सके। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर में चीन द्वारा रेयर अर्थ की आपूर्ति पर नियंत्रण को लेकर चिंता बढ़ रही है। ये रेयर मिनरल्स इलेक्टि्रक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।
आईआरईएल और टोयोटा ग्रुप की कंपनी टोयोत्सु रेयर अर्थ्स इंडिया के बीच 2012 में हुआ समझौता जापान को मुख्य रूप से नियोडिमियम जैसे रेयर अर्थ निर्यात करने की सुविधा देता था। साल 2024 में ही टोयोत्सु ने भारत से 1,000 मीट्रिक टन से ज्यादा रेयर अर्थ जापान भेजा, जो आईआरईएल के कुल 2,900 मीट्रिक टन उत्पादन का करीब एक-तिहाई हिस्सा था। हालांकि जापान अभी भी चीन से ही रेयर अर्थ का बड़ा हिस्सा आयात करता है। क्योंकि चीन इस क्षेत्र में उत्पादन और प्रोसेसिंग दोनों में वैश्विक स्तर पर सबसे आगे है।
आईआरईएल अब घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देगा
आईआरईएल पहले तक रेयर अर्थ का निर्यात करता रहा क्योंकि भारत में उसकी प्रोसेसिंग की क्षमता सीमित थी लेकिन अप्रैल 2024 से चीन द्वारा रेयर अर्थ के निर्यात पर लगाम लगाए जाने के बाद भारत की सोच में बदलाव आया है। अब आईआरईएल का ध्यान देश के भीतर खनिज संसाधनों को विकसित करने और उनका उपयोग यहीं करने पर है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने उद्योग के हितधारकों के साथ बैठक में आईआरईएल को घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने की सलाह दी। हालांकि मौजूदा समझौते को तुरंत खत्म करना संभव नहीं है क्योंकि यह द्विपक्षीय करार है। लेकिन आईआरईएल अब इस मुद्दे को कूटनीतिक तरीके से हल करने की कोशिश कर रहा है। जापान को भारत एक रणनीतिक साझेदार मानता है।
घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने की तैयारी में भारत
भारत के पास दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रेयर अर्थ भंडार है, जो लगभग 6.9 मिलियन मीट्रिक टन है। बावजूद इसके, देश में बड़े पैमाने पर मैग्नेट उत्पादन की तकनीकी और ढांचागत क्षमता अभी विकसित नहीं हो पाई है। मार्च 2025 में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में भारत ने लगभग 53,748 मीट्रिक टन रेयर अर्थ मैग्नेट आयात किए, जिनमें से ज्यादातर चीन से आए। ये मैग्नेट इलेक्टि्रक गाड़ियों, विंड टर्बाइनों और मेडिकल उपकरणों में काम आते हैं।
भारत में रेयर अर्थ का खनन करने का अधिकार सिर्फ आईआरईएल के पास है और यह कंपनी परमाणु ऊर्जा विभाग को न्यूक्लियर और डिफेंस सेक्टर के लिए जरूरी खनिज सप्लाई करती है। लेकिन देश में पूरी सप्लाई चेन और आवश्यक तकनीक की कमी के कारण आत्मनिर्भरता हासिल नहीं हो पाई है।
उत्पादन बढ़ाने और निवेश
आकर्षित करने की योजना
आईआरईएल फिलहाल ओडिशा में एक्सट्रैक्शन यूनिट और केरल में रिफाइनिंग प्लांट चलाता है। कंपनी मार्च 2026 तक 450 मीट्रिक टन नियोडिमियम का उत्पादन करने की योजना बना रही है और 2030 तक इसे दोगुना करने का लक्ष्य है।
इसके साथ ही आईआरईएल अब एक कॉर्पोरेट पार्टनर की तलाश में है जो ऑटोमोटिव और फार्मा इंडस्ट्री के लिए रेयर अर्थ मैग्नेट बनाना शुरू कर सके।
सरकार भी इस दिशा में कदम उठा रही है और घरेलू प्रोसेसिंग और मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग के लिए निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विशेष इंसेंटिव पैकेज तैयार कर रही है।

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